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हरियाणा में लिंग जांच मामले में सामने आया चौंकाने वाला खुलासा

Thu, 19 May 2016 06:40 PM IST
प्रवीण पाण्डेय/अमर उजाला, चंडीगढ़
प्रवीण पाण्डेय/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 19 May 2016 06:40 PM IST
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revealed in report: Turnover of Rs 200 crore in Haryana sex investigation
रिपोर्ट - फोटो : demo pics

हरियाणा में लिंग जांच और भ्रूण हत्या के कारोबार पर स्वास्थ्‍य विभाग की रिपोर्ट पर सामने आया चौंकाने वाला  खुलासा। हरियाणा में लिंग जांच और भ्रूण हत्या का कारोबार तकरीबन 200 करोड़ का अवैध उद्योग स्थापित कर चुका है। स्वास्थ्य विभाग की छापामारी में बार-बार वही नाम सामने आ रहे हैं, जिन्हें एक  या एक से ज्यादा बार इस धंधे में लिप्त होने के आरोप में दबोचा जा चुका है। यह खुलासा विभाग की कार्रवाई के बाद सामने आया है। हरियाणा सरकार ऐसे लोगों पर अंकुश लगाने के लिए रणनीति बदलने जा रही है। नई रणनीति के तहत फील्ड में जिला उपायुक्त लिंग जांच और भ्रूण हत्या में शामिल लोगों से निपटते नजर आएंगे। 

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स्वास्थ्य विभाग ने खुलासा किया है कि कई रसूखदार इस घृणित कार्य में संलिप्त हैं। खुलासे के मुताबिक विधानसभा चुनाव लड़ चुका एक आरोपी मोबाइल वैन में लिंग जांच का काम करता है। वर्ष 2003-04 में पहला केस होने के बाद पुलिस जांच में इसका दोबारा 28 जून 2015 को नाम आया। हाईकोर्ट ने बेल रिजेक्ट की, सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका ठुकराई, लेकिन करीब 15 दिन पहले यह आरोपी फिर से हरियाणा में लिंग जांच करते पकड़ा गया।
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जगाधरी में भी स्वास्थ्य विभाग ने चंद रोज पहले छापामारी में एक केस पकड़ा है, जिसमें आरोपी लिंग जांच के 40 हजार रुपये ले रहा था। यह अब तक की सबसे बड़ी रकम है, जो लिंग जांच के लिए आरोपी ने मांगी थी। इसके बाद नतीजा यह निकला है कि सख्ती के कारण आरोपियों ने रेट बढ़ा दिए हैं। फतेहाबाद की एक महिला भी कई बार इस मामले में पकड़ी जा चुकी है। नारनौल के तीन अस्पताल दो-दो बार पकड़े जा चुके हैं, लेकिन सजा से बच गए।
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सिर्फ एफआईआर दर्ज करवाने तक सीमित न रहें
हरियाणा सरकार ने बुधवार को जिले के एसपी और डीसी की वीडियो कांफ्रेसिंग कर उन्हें सख्ती से पेश आने के निर्देश दिए हैं। इस संदर्भ में सभी पुलिस अधीक्षकों और उपायुक्तों को मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों ने स्पष्ट कहा है कि सिर्फ एफआईआर दर्ज करवाने तक सीमित न रहें। बल्कि सजा करवाने में भी अहम भूमिका निभाएं। उपायुक्तों को निजी तौर पर ऐसे मामलों में संज्ञान लेने के निर्देश दिए हैं।

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