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Chandigarh News: भजनलाल परिवार की राजनीति पर ब्रेक लगाते रहे हैं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी
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भजन लाल भी रिटायर्ड आईएएस से हारे थे और अब भव्य भी हारे
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। संयोग की बात है कि प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी भजनलाल और उनके परिवार की सियासी पारी पर समय-समय पर रिटायर्ड आईएएस अधिकारी ब्रेक लगाते रहे हैं। पहले रिटायर्ड आईएएस आईडी स्वामी ने करनाल में भजन लाल को लोकसभा चुनाव में हराकर उनकी राजनीतिक पीएचडी तोड़ी थी और अब मौजूदा समय में उनके पौत्र भव्य बिश्नोई की विधानसभा पहुंचने की राह और चाह पर रिटायर्ड आईएएस अधिकारी चंद्रप्रकाश भारी पड़े हैं।
1998 में भजनलाल ने करनाल से कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा और उन्होंने भाजपा के रिटायर्ड आईएएस अधिकारी आईडी स्वामी को शिकस्त दी। 1999 फिर लोकसभा चुनाव हुए तो भजनलाल ने फिर ताल ठोकी और सामने फिर से आईडी स्वामी थे। इस बार मामला उलटा पड़ गया और भजनलाल को आईडी स्वामी ने हरा दिया। उसके बाद से भजनलाल कभी इस हार से उभर नहीं पाए। ऐसा भी कहा जाता है कि जोड़-तोड़ के माहिर भजन लाल की करनाल के मतदाताओं ने राजनीति की पीएचडी तोड़ दी थी।
2019 में हुए लोकसभा चुनाव में भजनलाल के पौत्र भव्य बिश्नोई ने कांग्रेस के टिकट पर हिसार लोकसभा से चुनाव लड़ा था, यहां पर उनकी राह सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी बृजेंद्र सिंह ने रोकी। बृजेंद्र सिंह उस समय भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे और जीत प्राप्त की थी। इस बार विधानसभा चुनाव में भी गजब का संयोग बना कि कांग्रेस ने सेवानिवृत्त आईएएस चंद्रप्रकाश को भव्य बिश्नोई के सामने मैदान में उतारा। जब उनको टिकट दिया गया तो उन्हें काफी कमजोर प्रत्याशी माना जा रहा था। क्योंकि आदमपुर सीट भजनलाल परिवार की परंपरागत सीट है और इससे पहले कभी भी भजनलाल परिवार का कोई सदस्य इस सीट से नहीं हारा है। लेकिन रिटायर्ड आईएएस ने भव्य को राजनीतिक अखाड़े में चित्त कर दिया।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। संयोग की बात है कि प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी भजनलाल और उनके परिवार की सियासी पारी पर समय-समय पर रिटायर्ड आईएएस अधिकारी ब्रेक लगाते रहे हैं। पहले रिटायर्ड आईएएस आईडी स्वामी ने करनाल में भजन लाल को लोकसभा चुनाव में हराकर उनकी राजनीतिक पीएचडी तोड़ी थी और अब मौजूदा समय में उनके पौत्र भव्य बिश्नोई की विधानसभा पहुंचने की राह और चाह पर रिटायर्ड आईएएस अधिकारी चंद्रप्रकाश भारी पड़े हैं।
1998 में भजनलाल ने करनाल से कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा और उन्होंने भाजपा के रिटायर्ड आईएएस अधिकारी आईडी स्वामी को शिकस्त दी। 1999 फिर लोकसभा चुनाव हुए तो भजनलाल ने फिर ताल ठोकी और सामने फिर से आईडी स्वामी थे। इस बार मामला उलटा पड़ गया और भजनलाल को आईडी स्वामी ने हरा दिया। उसके बाद से भजनलाल कभी इस हार से उभर नहीं पाए। ऐसा भी कहा जाता है कि जोड़-तोड़ के माहिर भजन लाल की करनाल के मतदाताओं ने राजनीति की पीएचडी तोड़ दी थी।
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2019 में हुए लोकसभा चुनाव में भजनलाल के पौत्र भव्य बिश्नोई ने कांग्रेस के टिकट पर हिसार लोकसभा से चुनाव लड़ा था, यहां पर उनकी राह सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी बृजेंद्र सिंह ने रोकी। बृजेंद्र सिंह उस समय भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे और जीत प्राप्त की थी। इस बार विधानसभा चुनाव में भी गजब का संयोग बना कि कांग्रेस ने सेवानिवृत्त आईएएस चंद्रप्रकाश को भव्य बिश्नोई के सामने मैदान में उतारा। जब उनको टिकट दिया गया तो उन्हें काफी कमजोर प्रत्याशी माना जा रहा था। क्योंकि आदमपुर सीट भजनलाल परिवार की परंपरागत सीट है और इससे पहले कभी भी भजनलाल परिवार का कोई सदस्य इस सीट से नहीं हारा है। लेकिन रिटायर्ड आईएएस ने भव्य को राजनीतिक अखाड़े में चित्त कर दिया।
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