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कार फ्री डे: 10 साल में दोगुने हो गए सांस के मरीज, रोजाना की ओपीडी 100 के पार, विषैला धुआं कर रहा सेहत खराब
Wed, 22 Sep 2021 11:33 AM IST
Trainee Trainee
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
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Published by: Trainee Trainee
Updated Wed, 22 Sep 2021 11:33 AM IST
सार
जीएमएसएच-16 के फेफड़ा एवं सांस रोग विशेषज्ञ डॉक्टर हनी साहनी का कहना कि फेफड़े के कैंसर और दमा जैसी बीमारियों का मूल कारण वायु प्रदूषण ही है। विशेषज्ञ साइकिल चलाने को तरजीह दे रहे हैं। जीएमएसएच-16 की फिजियोथेरेपिस्ट नम्रता तांगड़ी का कहना है कि शोध से भी यह बात साबित हो चुकी है कि नियमित रूप से साइकिल चलाने वालों को सामान्य लोगों की तुलना में कम तनाव होता है।
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स्वास्थ्य
- फोटो : pixabay
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विस्तार
सिटी ब्यूटीफुल में तेजी से बढ़ रही वाहनों की संख्या सेहत के लिए बड़ा संकट बन रही है। स्थिति यह है कि पिछले 10 साल में शहर में सांस के मरीजों की संख्या दोगुनी से भी ज्यादा हो गई है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो 10 साल पहले एक दिन की ओपीडी में सांस संबंधी 40 मरीज आते थे, जो अब बढ़कर 100 के पार पहुंच चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वाहनों से निकलने वाले विषैले धुएं से सेहत पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव की जानकारी होने के बावजूद लोग लापरवाही करते हैं।
जीएमएसएच-16 के फेफड़ा एवं सांस रोग विशेषज्ञ डॉक्टर हनी साहनी का कहना कि वाहनों से निकलने वाली गैसों में मुख्य रूप से कार्बन मोनोऑक्साइड, बिना जले हाईड्रोकार्बन यौगिक, नाइट्रोजन के ऑक्साइड, कज्जल, सीसा शामिल हैं। इनसे खांसी, सिर में दर्द, जी मिचलाना, घबराहट होना, आंखों में जलन होना, दिल से संबंधित बीमारियां, फेफड़े, हृदय, गुर्दे और रक्त पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। फेफड़े के कैंसर और दमा जैसी बीमारियों का मूल कारण वायु प्रदूषण ही है।
कार छोड़कर साइकिल चलाने के फायदे जान लीजिए
जीएमएसएच-16 की फिजियोथेरेपिस्ट नम्रता तांगड़ी का कहना है कि शोध से भी यह बात साबित हो चुकी है कि नियमित रूप से साइकिल चलाने वालों को सामान्य लोगों की तुलना में कम तनाव होता है। साथ ही मांसपेशियों में भी मजबूती आती है। साइकिल चलाने से दिल से लेकर दिमाग तक स्वस्थ रहता है। वहीं, हड्डियां क्रियाशील रहने से जोड़ों में दर्द संबंधी समस्याएं कम होती हैं। साइकिल चलाने से हृदयाघात और हृदय संबंधी अन्य बीमारियों का खतरा भी कम होता है। ब्लड सेल्स और त्वचा में ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्रा पहुंचने से त्वचा में कसाव और चमक आती है।
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जीएमएसएच-16 के फेफड़ा एवं सांस रोग विशेषज्ञ डॉक्टर हनी साहनी का कहना कि वाहनों से निकलने वाली गैसों में मुख्य रूप से कार्बन मोनोऑक्साइड, बिना जले हाईड्रोकार्बन यौगिक, नाइट्रोजन के ऑक्साइड, कज्जल, सीसा शामिल हैं। इनसे खांसी, सिर में दर्द, जी मिचलाना, घबराहट होना, आंखों में जलन होना, दिल से संबंधित बीमारियां, फेफड़े, हृदय, गुर्दे और रक्त पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। फेफड़े के कैंसर और दमा जैसी बीमारियों का मूल कारण वायु प्रदूषण ही है।
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कार छोड़कर साइकिल चलाने के फायदे जान लीजिए
जीएमएसएच-16 की फिजियोथेरेपिस्ट नम्रता तांगड़ी का कहना है कि शोध से भी यह बात साबित हो चुकी है कि नियमित रूप से साइकिल चलाने वालों को सामान्य लोगों की तुलना में कम तनाव होता है। साथ ही मांसपेशियों में भी मजबूती आती है। साइकिल चलाने से दिल से लेकर दिमाग तक स्वस्थ रहता है। वहीं, हड्डियां क्रियाशील रहने से जोड़ों में दर्द संबंधी समस्याएं कम होती हैं। साइकिल चलाने से हृदयाघात और हृदय संबंधी अन्य बीमारियों का खतरा भी कम होता है। ब्लड सेल्स और त्वचा में ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्रा पहुंचने से त्वचा में कसाव और चमक आती है।
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