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हीरो को विदाई: महान धावक को अंतिम विदाई देने उमड़ा चंडीगढ़, न गर्मी की फिक्र न कोरोना की
Sat, 19 Jun 2021 11:24 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 19 Jun 2021 11:24 PM IST
सार
कोरोना की पाबंदियों और गर्मी के बावजूद मिल्खा सिंह के अंतिम संस्कार में 300 से ज्यादा लोग पहुंचे थे। सेक्टर-25 के शमशान घाट में लोगों की भारी भीड़ जुटी रही।
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मिल्खा सिंह को मुखाग्नि देते जीव मिल्खा सिंह।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
महान धावक मिल्खा सिंह को शनिवार को अंतिम विदाई देने पूरा चंडीगढ़ उमड़ पड़ा। राजनेताओं से लेकर प्रशासनिक अफसरों का जमावड़ा लगा रहा। सेक्टर-25 के श्मशानघाट और उसके बाहर मौजूद हर आंख नम थी। चेहरों पर उदासी थी। सबका दिल जार जार रो रहा था। हर कोई अपने चहेते हीरो की एक झलक पाने को बेताब था। उनकी अंतिम तस्वीर उनके प्रशंसक मोबाइल में कैद रहे थे।
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लोगों को रोकने के लिए पुलिस की तरफ से कई जगह बैरिकेडिंग की गई थी, लेकिन वो भी नाकाफी रही। हर किसी की इच्छा थी कि स्पोर्ट्स आइकन की आखिरी झलक देख सकें। लोगों को न तो कोरोना की फिक्र थी और न ही गर्मी की। जब मिल्खा सिंह के बेटे उन्हें मुखाग्नि दे रहे थे, तो परिवार के साथ मौके पर मौजूद हर व्यक्ति की आंखों में पानी था। लोगों की उम्मीद थी कि मिल्खा सिंह जिंदगी की रेस जीतेंगे, लेकिन भगवान की इच्छा कुछ और थी। इतनी उम्र होने के बावजूद वे इतने जोश से भरे रहते थे कि लोगों को लगता था कि वे अभी काफी लंबे समय तक उनके बीच रहेंगे, लेकिन अचानक उनकी मौत से हर कोई गमगीन था
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शनिवार को उमस उच्चतम स्तर पर थी। हवा में नमी की अधिकतम मात्रा 85 फीसदी रिकार्ड हुई। अधिकतम तापमान 35.6 डिग्री सेल्सियस था, जो सामान्य से तीन डिग्री कम रहा। पंजाब यूनिवर्सिटी के गेट नंबर-3 की तरफ से श्मशान घाट की तरफ जाने वाली सड़क को बंद किया गया था। सेक्टर-25 से श्मशानघाट की तरफ जाने वाली सड़क पर भी पुलिसकर्मियों को खड़ा कर लोगों को घाट की ओर से जाने से रोका जा रहा था, लेकिन मिल्खा सिंह को श्रद्धांजलि देने के सामने सख्ती काम नहीं आई।
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लोग किसी न किसी तरह शमशान घाट पहुंच गए और मिल्खा सिंह के अंतिम संस्कार में शामिल हुए। शव को अग्नि के हवाले करने के बाद लोगों द्वारा लाइन लगाकर मिल्खा सिंह को नमन किया गया। परिवारजनों के जाने के काफी देर तक लोग एक-एक कर मिल्खा सिंह को प्रणाम करते रहे। यह क्षण भावुक करने वाला था। इसके अलावा श्मशान घाट में कई लोग ऐसे थे, जो सिर्फ मिल्खा सिंह का नाम सुनकर वहां पहुचे थे।
दोस्त प्रो. कैलाश बोले- उम्मीद नहीं थी, मिल्खा ऐसे चले जाएंगे
मिल्खा सिंह के निधन की खबर सुनकर सुबह-सुबह उनके पुराने मित्र व बॉक्सर प्रो. कैलाश शर्मा श्रद्धांजलि देने पहुंचे। कैलाश शर्मा की खुद की उम्र भी 91 वर्ष है। उन्होंने बताया कि वह मिल्खा सिंह के घर से कुछ दूरी पर ही रहते हैं और अकसर दोनों टहलते हुए या फिर घर पर मिलते रहते थे। प्रो. शर्मा ने बताया कि दोनों के खेल प्रेमी होने की वजह से उनमें काफी प्यार था। उन्होंने कहा कि निधन की खबर सुनने के बाद से वह स्तब्ध हैं। उम्मीद नहीं थी कि मिल्खा उन्हें छोड़कर ऐसे चले जाएंगे। प्रो. शर्मा ने कहा कि मिल्खा सिंह एक महान धावक तो थे ही लेकिन इसके साथ ही वे एक बहुत अच्छे इंसान थे। वे हर जरूरतमंद की मदद करते थे। हमेशा मुस्कुराते रहते थे और हमें भी हमेशा खुश रहने के लिए प्रेरित करते थे। मिल्खा हमेशा दूसरों से कहते थे कि अगर उनकी सेहत ठीक रहेगी, तो जीवन में सबकुछ संभव है।