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हरियाणा CMO में फेरबदल: भूपेश्वर दयाल को अब कोई विभाग नहीं, CM विंडो का कार्यभार देवेंद्र सिंह को
Mon, 10 Oct 2022 10:59 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Mon, 10 Oct 2022 10:59 PM IST
सार
नीरज के जाने के बाद भूपेश्वर से भी सीएम विंडो का कार्यभार वापस लेने की सियासी गलियारों और सचिवालय में खूब चर्चा है। बीते दिनों रोहतक में एक कार्यक्रम के दौरान भूपेश्वर के ससुर मुख्यमंत्री से उलझ गए थे। इसके बाद से ही मुख्यमंत्री कार्यालय में बदलाव की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया था।
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- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
हरियाणा सरकार ने मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात अधिकारियों, सलाहकारों और ओएसडी के विभागों में अहम फेरबदल किया है। ओएसडी भूपेश्वर दयाल अब बिना विभाग हो गए हैं, उनके पास कोई जिम्मा नहीं बचा है। उनसे ग्रीवेंसिज सीएम विंडो का कार्यभार वापस लेकर सेवानिवृत्त आईएएस और मुख्यमंत्री के सलाहकार देवेंद्र सिंह को सौंपा गया है।
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देवेंद्र के पास सिंचाई विभाग का भी जिम्मा है। मुख्यमंत्री कार्यालय के रिसोर्स मोबलाइजेशन सलाहकार योगेंद्र चौधरी अब कला एवं संस्कृति मामले विभाग का कामकाज नहीं देखेंगे। यह अब मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव अमित अग्रवाल को मिला है। पूर्व प्रधान ओएसडी नीरज दफ्तुआर के इस्तीफा देने से खाली हुए सूचना एवं जनसंपर्क विभाग का कार्यभार अब मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव वी. उमाशंकर संभालेंगे।
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सोमवार को नए सिरे से हुए बंटवारे के बाद मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव डीएस ढेसी के पास पहले की तरह 12 विभागों के अलावा सीएमओ के ओवरआल प्रभारी, स्थापना सहित किसी को भी आवंटित नहीं किए गए विभागों का जिम्मा रहेगा। वी. उमाशंकर के पास मुख्यमंत्री कार्यालय में पहले 11 विभाग थे, जो अब बढ़कर 12 हो गए हैं। योगेंद्र चौधरी के पास अब तीन विभाग ही रह गए हैं।
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देवेंद्र सिंह के पास सिंचाई के अलावा ग्रीवेंसिज सीएम विंडो का कार्यभार आ गया है। अमित अग्रवाल के पास पहले 13 विभाग थे, जो अब बढ़कर 14 हो गए हैं। केएम पांडुरंग पहले की तरह ही 14 विभाग देखते रहेंगे। मुख्यमंत्री के ओएसडी सुधांशु गौतम के बीते नौ सितंबर को आवंटित सभी छह विभाग बरकरार रखे गए हैं।
नीरज के जाने के बाद भूपेश्वर से भी सीएम विंडो का कार्यभार वापस लेने की सियासी गलियारों और सचिवालय में खूब चर्चा है। बीते दिनों रोहतक में एक कार्यक्रम के दौरान भूपेश्वर के ससुर मुख्यमंत्री से उलझ गए थे। इसके बाद से ही मुख्यमंत्री कार्यालय में बदलाव की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया था।