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एप बताएगा आपका बच्चा प्री-डायबिटिक तो नहीं: बिना खून लिए होगी शुगर की जांच, पीजीआई में हुआ शोध

Sat, 03 Dec 2022 04:15 PM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 03 Dec 2022 04:15 PM IST
सार

इस जांच में मेजरमेंट का महत्वपूर्ण रोल है क्योंकि जानकारी सही तरीके से न भरने पर रिपोर्ट गड़बड़ आ सकती है। 8 बिंदुओं में शामिल अलग-अलग मापन में स्किनफोल्ड थिकनेस लेने का तरीका कुछ मुश्किल है क्योंकि इसके उपकरण और मेजरमेंट लेने की तकनीक सामान्य तौर पर आसान नहीं होती।

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Research student of Chandigarh PGI invented method of painless sugar testing
बनाया गया एप - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ पीजीआई के एक शोध छात्र ने दर्द रहित शुगर जांच का तरीका ईजाद किया है। इसमें रक्त का नमूना नहीं लिया जाता है। पीजीआई सामुदायिक चिकित्सा विभाग की प्रो. पूनम खन्ना के एक छात्र ने एक विशेष एप तैयार किया है। इस एप से 5 साल के बच्चे से लेकर 19 साल तक के युवा के शरीर के अलग-अलग भागों के माप (मेजरमेंट) के आधार पर यह बताया जा सकता है कि उसे शुगर होने का कितना खतरा है। 

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एप बनाने वाले डॉ. सवितेश कुशवाहा ने बताया कि इसकी मदद से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और आंगनबाड़ी केंद्रों के साथ स्कूलों में बच्चों की प्री-डायबिटिक स्क्रीनिंग आसानी से की जा सकती है। वहीं इस रिपोर्ट के आधार पर उन बच्चों को डायबिटीज के खतरे से आगाह करने के साथ बचाव के उपाय भी किए जा सकते हैं। सामुदायिक चिकित्सा विभाग के विशेषज्ञ इस एप की मदद से स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर चंडीगढ़ के स्कूलों के बच्चों के प्री-डायबिटिक टेस्ट का प्रयास कर रहे हैं ताकि इस गंभीर बीमारी के खतरे को समय से पहले पता लगाकर उसके बचाव के उपाय पर काम किया जा सके।
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2018 के सर्वे के बाद शुरू किया काम
डॉ. सवितेश कुशवाहा ने बताया कि साल 2018 में देशभर के 113000 किशोरों पर हुए सर्वे के बाद इस एप को बनाने का निर्णय लिया। कंप्रिहेंसिव नेशनल न्यूट्रिशन सर्वे (जिसमें यूनिसेफ कॉरपोरेशन काउंसिल सर्वे एजेंसी और पीजीआई ने मिलकर काम किया था) में शामिल किशोर लड़के-लड़कियों की बॉडी मेजरमेंट और ब्लड टेस्ट की रिपोर्ट को अलग-अलग बिंदुओं पर अध्ययन कर एप में उस मेजरमेंट को शामिल करने की योजना बनाई गई। इस एप में ट्रायल के लिए जब सर्वे रिपोर्ट के डाटा को फीड किया गया तो रिपोर्ट की तरफ ही एप ने भी परिणाम दिया। 
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खून नहीं शरीर का माप बना माध्यम
एप में प्री शुगर जांच के लिए खून की जगह बॉडी मेजरमेंट के आठ अलग-अलग बिंदुओं पर उसकी डिटेल भरनी होती है। डॉ. सवितेश ने बताया कि इन 8 बिंदुओं में अपर आर्म का मेजरमेंट, स्किनफोल्ड थिकनेस, हाइट, वेट, उम्र, लिंग, बैक का मेजरमेंट और कमर की साइज शामिल है। इन सभी बिंदुओं पर मांगी गई जानकारी को एप में भरते ही प्री-डायबिटिक की रिपोर्ट सामने आ जाती है।

मेजरमेंट है महत्वपूर्ण
डॉ. सवितेश ने बताया कि इस जांच में मेजरमेंट का महत्वपूर्ण रोल है क्योंकि जानकारी सही तरीके से न भरने पर रिपोर्ट गड़बड़ आ सकती है। 8 बिंदुओं में शामिल अलग-अलग मापन में स्किनफोल्ड थिकनेस लेने का तरीका कुछ मुश्किल है क्योंकि इसके उपकरण और मेजरमेंट लेने की तकनीक सामान्य तौर पर आसान नहीं होती।


देशभर में हुए सर्वे रिपोर्ट के आधार पर कहा जा सकता है कि बच्चे तेजी से शुगर की चपेट में आ रहे हैं। इस एप की मदद से स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर स्कूल स्तर पर स्क्रीनिंग कर प्री-डायबिटीज बच्चों का आकलन किया जा सकता है ताकि समय रहते शुगर का शिकार होने से बचाया जा सके। - प्रो. पूनम खन्ना, सामुदायिक चिकित्सा विभाग पीजीआई
 

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