{"_id":"66494e3df79be412ed0bc613","slug":"research-ignoring-ulcerative-colitis-will-weaken-muscles-before-old-age-2024-05-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Research : अल्सरेटिव कोलाइटिस की अनदेखी बुढ़ापे से पहले कर देगी मांसपेशियां कमजोर, पीजीआई चंडीगढ़ शोध का नतीजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Research : अल्सरेटिव कोलाइटिस की अनदेखी बुढ़ापे से पहले कर देगी मांसपेशियां कमजोर, पीजीआई चंडीगढ़ शोध का नतीजा
Sun, 19 May 2024 06:26 AM IST
दुष्यंत शर्मा
वीणा तिवारी, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, चंडीगढ़
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 19 May 2024 06:26 AM IST
सार
इतना ही नहीं मांसपेशियों की कमजोरी के कारण मरीज की कार्य क्षमता कम होने लगती है।
विज्ञापन
चंडीगढ़ पीजीआई
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अल्सरेटिव कोलाइटिस के जिन मरीजों में बीमारी नियंत्रित नहीं होती, उनमें बुढ़ापे से पहले मांसपेशियों के कमजोर होने का खतरा बढ़ जाता है। इतना ही नहीं मांसपेशियों की कमजोरी के कारण मरीज की कार्य क्षमता कम होने लगती है।
विज्ञापन
अगर स्थिति पर काबू न पाया गया तो मरीज सीवियर सार्कोपेनिया की स्थिति में चला जाता है, जिससे उसकी गेट स्पीड यानी चलने की क्षमता भी कम होने लगती है। इसकी पुष्टि पीजीआई के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के शोध में हुई है। इसके मुताबिक, सार्कोपेनिया अल्सरेटिव कोलाइटिस में स्थिति गंभीर होने पर मरीज की मौत होने के साथ ही हृदय रोग का भी खतरा बढ़ जाता है। इस शोध को 2024 में इंटेस्टाइनल रिसर्च जर्नल में प्रकाशित किया गया है।
विज्ञापन
शोध के वरिष्ठ लेखक व विभाग के डॉ. विशाल शर्मा ने बताया कि शोध छात्रा डॉ. प्रधू नीलम ने उनके मार्गदर्शन में इस बीमारी से ग्रस्त मरीजों पर शोध किया। शोध में गंभीर अल्सरेटिव कोलाइटिस के 114 मरीजों (64 पुरुष, 50 महिलाएं) को शामिल किया गया, जिनकी औसत उम्र 37 साल थी। 22 फीसदी मरीजों में सार्कोपेनिया अल्सरेटिव कोलाइटिस की पुष्टि हुई। ये वे मरीज थे, जिनमें बीमारी नियंत्रित नहीं थी। जब इनकी गेट स्पीड चेक की गई तो चार मीटर के वॉक टेस्ट में 12 फीसदी को चलने में परेशानी आई। इस मर्ज के कारण मांसपेशियों का प्रभावित होना बेहद गंभीर बात है।
विज्ञापन
मर्ज को आप भी जान लें
अल्सरेटिव कोलाइटिस को बड़ी आंत की एक क्रॉनिक बीमारी के रूप में भी जाना जाता है। इस बीमारी में बड़ी आंत की अंदरूनी परत में सूजन और जलन हो जाती है। इससे कई छोटे-छोटे छाले बनने लगते है। इन छालों में सूजन के कारण पेट में दर्द और पेट से संबंधित कई परेशानियां होने लगती हैं। अगर समय पर इस बीमारी का इलाज नहीं कराया जाए तो यह जानलेवा साबित होती है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता ही खतरा
डॉ. विशाल ने बताया कि आंत की इस बीमारी में रोग प्रतिरोधक क्षमता ही खुद के आंत की दुश्मन बन जाती है। बीमारी में रोग प्रतिरोधक क्षमता बाहर के कीटाणुओं पर हमला करने के बजाय बड़ी आंत पर हमला करना शुरू कर देती है। इससे आंत में सूजन और जलन की परेशानी होती है। इस बीमारी के लक्षणों की समय पर पहचान कर ली जाए तो मलाशय और मलनाली के कैंसर होने के जोखिम से बचा जा सकता है।
लक्षणों पर करें गौर
- दस्त, अक्सर रक्त या मवाद के साथ मलाशय से रक्तस्राव होने लगता है
- मल के साथ थोड़ी मात्रा में रक्त निकलता है
- पेट में दर्द और ऐंठन
- मलाशय में दर्द
- शौच करने की शीघ्रता
- अत्यावश्यकता के बावजूद शौच करने में असमर्थता
- वजन घटना
- थकान
- बुखार
- बच्चों में विकास न हो पाना
इनका रखें ध्यान...
- खान-पान में बदलाव कर बीमारी से बचा जा सकता है
- कोलाइटिस से जूझने वाले मरीज कुछ चीजों से परहेज करें। इस बीमारी में दूध और दूध से बने फूड्स का सेवन करने से बचें
- पूरे दिन में 5-6 बार थोड़ा-थोड़ा खाएं। एक बार भर पेट खाने से बचें
- पानी अधिक पीएं
- तनाव से दूर रहें। तनाव आपकी बीमारी को बढ़ा सकता है