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इमटेक के वैज्ञानिकों की रिसर्च: अंतरिक्ष में ईंधन की टेंशन होगी खत्म, सूरज से सीधे मिलेगी लेजर ऊर्जा

Wed, 11 Feb 2026 12:30 PM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 11 Feb 2026 12:30 PM IST
सार

शोध में ऐसे उन्नत सोलर कंसन्ट्रेटर डिजाइन पर काम किया गया है जो बिना किसी रुकावट सूर्य की रोशनी को केंद्रित कर सकते हैं।

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Research by IMTECH scientists Fuel tension in space will end laser energy available directly from sun
सूरज - फोटो : NASA

विस्तार

सूर्य की अनंत ऊर्जा को सीधे लेजर शक्ति में बदलने की दिशा में इंस्टीट्यूट ऑफ माइक्रोवेव टेक्नोलॉजी (इमटेक-सीएसआईओ) के वैज्ञानिकों ने बड़ी सफलता हासिल की है। वैज्ञानिकों की यह खोज अंतरिक्ष मिशनों के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है। 

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शोधकर्ताओं ने एक उन्नत सोलर-पावर्ड लेजर तकनीक विकसित की है जो सूर्य की रोशनी से सीधे ऊर्जा उत्पन्न कर लेजर शक्ति में परिवर्तित करती है। अंतरिक्ष में ईंधन ले जाना जहां अत्यधिक महंगा और जोखिम भरा होता है, वहीं यह तकनीक सैटेलाइट्स, डीप-स्पेस मिशनों और भविष्य के स्पेस स्टेशनों को आत्मनिर्भर और टिकाऊ ऊर्जा समाधान प्रदान कर सकती है। 

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लंबे मिशन के लिए उपयोगी

कम वजन, कम लागत और उच्च दक्षता वाला यह सिस्टम अंतरिक्ष में लंबे समय तक चलने वाले मिशनों के लिए विशेष रूप से उपयोगी माना जा रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तकनीक से अंतरिक्ष अभियानों की लागत घटेगी और मिशनों की अवधि बढ़ाई जा सकेगी। इस महत्वपूर्ण शोध को अंतरराष्ट्रीय जर्नल ऑफ ऑप्टिक्स में प्रकाशित किया गया है।

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इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व डॉ. सोनम बैरवाल ने किया। उनके साथ डॉ. भरपूर सिंह, डॉ. विपेंदर नेगी और प्रो. ह्युकमो कांग (एरिजोना विश्वविद्यालय) सहित अन्य विशेषज्ञ जुड़े रहे। शोध में ऐसे उन्नत सोलर कंसन्ट्रेटर डिजाइन पर काम किया गया है जो बिना किसी रुकावट सूर्य की रोशनी को केंद्रित कर सकते हैं। शोधकर्ताओं ने बताया कि इसके लिए 99 मिमी व्यास का एक ऑफ-एक्सिस पैराबोलिक मिरर तैयार किया जो अकेले ही सूर्य ऊर्जा को 8.0 वॉट तक केंद्रित करने में सक्षम पाया गया।

इसके बाद इसमें एक छोटा स्मार्ट फ्री-फॉर्म सेकेंडरी मिरर जोड़ा गया जिसने निर्माण के दौरान पैदा हुई खामियों को ठीक कर दिया। नतीजा यह हुआ कि ऊर्जा क्षमता बढ़कर 8.9 वॉट हो गई। यानी करीब 11.25 प्रतिशत की बढ़त हुई। उन्होंने बताया कि इस तकनीक का सीधा फायदा आम लोगों तक भी पहुंच सकता है। भविष्य में यही सिस्टम अंतरिक्ष मिशनों, सैटेलाइट्स, दूरस्थ इलाकों में ऊर्जा आपूर्ति और स्वच्छ ऊर्जा आधारित लेजर तकनीकों में इस्तेमाल हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह शोध भारत को अंतरिक्ष और नवीकरणीय ऊर्जा तकनीकों में वैश्विक स्तर पर और मजबूत बना सकता है।

नई तकनीक के मुख्य फायदे

सूरज की रोशनी से सीधे ताकतवर ऊर्जा - यह तकनीक सूरज की रोशनी को इकट्ठा करके सीधे एक बिंदु पर केंद्रित करती है, जिससे बिना ईंधन या बिजली के लेजर जैसी उच्च ऊर्जा प्राप्त होती है।
कम खर्च, ज्यादा फायदा - इसमें बहुत बड़े और महंगे दर्पण बनाने की जरूरत नहीं पड़ती। छोटी सेकेंडरी मिरर से ही सारी खामियां ठीक हो जाती हैं, जिससे लागत काफी कम हो जाती है।


ऊर्जा की बर्बादी नहीं- पारंपरिक सिस्टम में बीच में रुकावट आ जाती है लेकिन यह नया ऑफ-एक्सिस डिजाइन बिना किसी रुकावट के पूरी धूप का उपयोग करता है।
ज्यादा पावर आउटपुट- नई व्यवस्था से पहले की तुलना में करीब 11 प्रतिशत ज्यादा ऊर्जा मिलती है यानी वही सूरज अब और ज्यादा काम करेगा।
पर्यावरण के अनुकूल - इसमें न धुआं है, न प्रदूषण। यह पूरी तरह स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा पर आधारित तकनीक है।
भविष्य की कई तकनीकों का आधार- आने वाले समय में इसका इस्तेमाल सैटेलाइट पावर सिस्टम, अंतरिक्ष संचार, रक्षा तकनीक और दूरदराज इलाकों में ऊर्जा आपूर्ति के लिए किया जा सकता है।

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