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Chandigarh News: सैनिक सिर्फ योद्धा नहीं, संवेदनशील इंसान भी
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-पीयू में पंजाबी नॉवल में सैनिक जीवन की पेशकारी पर अध्यनन हुआ
-सैनिकों के दुख-सुख, जरूरतों-कमियों, सपनों, उम्मीदों और उलझनों को सामने लाया गया
अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला। पंजाबी यूनिवर्सिटी में हाल ही में किए गए एक शोध में पंजाबी नॉवल के माध्यम से सैनिक जीवन के विभिन्न पहलुओं का गहन अध्ययन किया गया। सुपरवाइजर डॉ. तारा सिंह की अगुवाई में शोधकर्ता डॉ. किरणदीप कौर ने सैनिक जीवन से जुड़े नॉवलों का विश्लेषण किया, जिसमें सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से सैनिकों के अनुभवों को सामने लाया गया।
डॉ. तारा सिंह ने कहा कि सैनिक समाज का अहम हिस्सा होने के बावजूद पंजाबी साहित्य में उन पर किसी व्यापक शोध का अभाव था। इस शोध ने सैनिकों की अंदरूनी दुनिया की परतों को उजागर किया और उनके सुख-दुख, ज़रूरतों-कमियों, सपनों, उम्मीदों और उलझनों को इंसानियत के नजरिए से दिखाने का प्रयास किया।
डॉ. किरणदीप कौर ने बताया कि यह अध्ययन साबित करता है कि सैनिक केवल योद्धा नहीं बल्कि संवेदनशील और सामाजिक रूप से जुड़े व्यक्ति भी होते हैं। शोध में पंजाब के इतिहास, संस्कृति और सार्वजनिक जीवन में सैन्य जीवन के महत्व को प्रमाणित स्रोतों, ऐतिहासिक लेखन और विद्वानों की सांस्कृतिक रचनाओं के हवाले से समझाया गया है।
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शोध टीम को बधाई दी
पंजाबी यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ. जगदीप सिंह ने शोध टीम को बधाई दी और कहा कि यह कार्य सेना, सैन्य जीवन और पंजाबी साहित्य में रुचि रखने वाले छात्रों, शोधकर्ताओं और पाठकों के लिए मार्गदर्शक साबित होगा। उन्होंने कहा कि यह शोध भविष्य में और गहन अध्ययन और शोध कार्य के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। यह शोध साबित करता है कि सैनिकों का जीवन केवल युद्ध तक सीमित नहीं, बल्कि उनकी संवेदनशीलता, सामाजिक जिम्मेदारियां और व्यक्तिगत संघर्ष भी साहित्य के माध्यम से समझे जा सकते हैं।
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-सैनिकों के दुख-सुख, जरूरतों-कमियों, सपनों, उम्मीदों और उलझनों को सामने लाया गया
अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला। पंजाबी यूनिवर्सिटी में हाल ही में किए गए एक शोध में पंजाबी नॉवल के माध्यम से सैनिक जीवन के विभिन्न पहलुओं का गहन अध्ययन किया गया। सुपरवाइजर डॉ. तारा सिंह की अगुवाई में शोधकर्ता डॉ. किरणदीप कौर ने सैनिक जीवन से जुड़े नॉवलों का विश्लेषण किया, जिसमें सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से सैनिकों के अनुभवों को सामने लाया गया।
डॉ. तारा सिंह ने कहा कि सैनिक समाज का अहम हिस्सा होने के बावजूद पंजाबी साहित्य में उन पर किसी व्यापक शोध का अभाव था। इस शोध ने सैनिकों की अंदरूनी दुनिया की परतों को उजागर किया और उनके सुख-दुख, ज़रूरतों-कमियों, सपनों, उम्मीदों और उलझनों को इंसानियत के नजरिए से दिखाने का प्रयास किया।
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डॉ. किरणदीप कौर ने बताया कि यह अध्ययन साबित करता है कि सैनिक केवल योद्धा नहीं बल्कि संवेदनशील और सामाजिक रूप से जुड़े व्यक्ति भी होते हैं। शोध में पंजाब के इतिहास, संस्कृति और सार्वजनिक जीवन में सैन्य जीवन के महत्व को प्रमाणित स्रोतों, ऐतिहासिक लेखन और विद्वानों की सांस्कृतिक रचनाओं के हवाले से समझाया गया है।
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शोध टीम को बधाई दी
पंजाबी यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ. जगदीप सिंह ने शोध टीम को बधाई दी और कहा कि यह कार्य सेना, सैन्य जीवन और पंजाबी साहित्य में रुचि रखने वाले छात्रों, शोधकर्ताओं और पाठकों के लिए मार्गदर्शक साबित होगा। उन्होंने कहा कि यह शोध भविष्य में और गहन अध्ययन और शोध कार्य के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। यह शोध साबित करता है कि सैनिकों का जीवन केवल युद्ध तक सीमित नहीं, बल्कि उनकी संवेदनशीलता, सामाजिक जिम्मेदारियां और व्यक्तिगत संघर्ष भी साहित्य के माध्यम से समझे जा सकते हैं।