जी-20 सम्मेलन: गिद्दा और भंगड़े पर थिरके विदेशी मेहमान, चूल्हे पर बनाई मक्के की रोटी, पंजाब ने जीता दिल
जी-20 सम्मेलन में विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने शिक्षा क्षेत्र की बेहतरी पर चर्चा की। वहीं पंजाबी सभ्याचार और यहां की स्वादिष्ट डिशों का भी भरपूर लुत्फ उठाया। स्थानीय होटल रेडिसन ब्लू में दूसरे एजुकेशन वर्किंग ग्रुप सेमिनार के बाद होटल के प्रांगण में एक सभ्याचारक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पंजाब की विरासत से मेहमानों को जोड़ा गया।
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जी-20 सम्मेलन के दूसरे दिन सुबह से शाम तक चले मंथन के बाद 20 देशों के प्रतिनिधियों ने पंजाब की संस्कृति को जानने का प्रयास किया। गुरु नानक देव यूनविर्सिटी (जीएनडीयू) के स्वर्ण जयंती कन्वेंशन सेंटर में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी अतिथियों ने भरपूर आनंद लिया। यहां जब युवतियों ने पंजाबी लोक नाच गिद्दा और भंगड़ा प्रस्तुत किया तो मेहमान भी खुद को थिरकने से नहीं रोक सके।
लोक वाद्यों के साथ पश्चिमी समूह गीत और शास्त्रीय नृत्य कत्थक की प्रस्तुति ने भी खूब रंग जमाया। इसके बाद मेहमानों को पंजाब की विरासत से रूबरू करवाने के लिए साडा पिंड ले जाया गया। यहां उन्होंने पंजाब के ग्रामीण परिवेश में इस्तेमाल की जा रहीं पुरानी वस्तुओं, बर्तनों, कृषि औजारों व घरेलू सामान को नजदीक से देखा और इसक जानकारी ली। विदेशी महिलाओं ने खास तौर से चूल्हे पर मक्के की रोटी पकाने में काफी रुचि दिखाई। उन्होंने रोटी पकाना भी सीखा। इस दौरान सभी मेहमानों ने एक-दूसरे को करीब से जाना और अपनी-अपनी संस्कृति पेश की।
जब ढोल की थाप पर थिरके विदेशी मेहमान
जी-20 सम्मेलन में विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने शिक्षा क्षेत्र की बेहतरी पर चर्चा की। वहीं पंजाबी सभ्याचार और यहां की स्वादिष्ट डिशों का भी भरपूर लुत्फ उठाया। स्थानीय होटल रेडिसन ब्लू में दूसरे एजुकेशन वर्किंग ग्रुप सेमिनार के बाद होटल के प्रांगण में एक सभ्याचारक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पंजाब की विरासत से मेहमानों को जोड़ा गया।
पारंपरिक पंजाबी परिधानों में कलाकारों ने पंजाबी लोक संगीत के खूबसूरत रंगों को पारंपरिक वाद्य यंत्रों जैसे तुब्बी, अलगोजा, सारंगी, ढोल, नगाड़ा, बीन, बौंसारी, चिमटा, बुग्चू के साथ प्रस्तुत किया। ढोल की थाप और तरह-तरह के वाद्य यंत्रों की मनमोहक आवाज ने विदेशी मेहमानों को भंगड़ा और डांस करने पर मजबूर कर दिया। विदेशी मेहमानों ने पंजाबी कलाकारों के साथ भंगड़ा और गिद्दा में अपनी खुशी का इजहार किया और पंजाबी व्यंजनों का लुत्फ उठाया।
दक्षिण अफ्रीका का प्रतिनिधित्व करने वाले निदेशक इंस्टीट्यूशनल फंडिंग अल्फ्रेड मैकागाटो ने पंजाब के आतिथ्य की प्रशंसा की और कहा कि उन्होंने पंजाब और पंजाबियों के खुलेपन के बारे में बहुत सुना था और आज उन्होंने यहां पंजाबियों की आतिथ्य परंपरा का आनंद लिया है। यहां की संस्कृति अपनी आंखों से देखी है। उन्होंने कहा कि ढोल की थाप पर अपने आपको भंगड़ा करने से नहीं रोक सके।
चीन की राजधानी बीजिंग से पहुंचे डेयुंग युआन डिप्टी डीन ग्रेजुएट स्कूल ऑफ एजुकेशन ने भी पंजाबी लोकनृत्य भंगड़ा और पंजाबी खाने की तारीफ की और कहा कि पंजाबियों में मेहमाननवाजी का कोई मुकाबला नहीं है। मैं पहली बार भारत आया हूं। पंजाब के लोगों के दोस्ताना स्वभाव और स्वागत ने उनका दिल जीत लिया है।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के निदेशक अबू धाबी हेंड-उल-तायर और यूनिसेफ, न्यूयॉर्क के वरिष्ठ शिक्षा सलाहकार निकोलस रीयूज के प्रतिनिधियों ने भी ढोल की थाप पर भंगड़ा किया। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस, मुंबई की निदेशक एवं कुलपति शालिनी भरत ने कहा कि पंजाब भारत का ताज है और यहां के लोगों और संस्कृति की अपनी एक अलग पहचान है।