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पंजाब में ईंट भट्ठों पर लगी रोक हटी, अपीलीय अथॉरिटी ने पीपीसीबी का फैसला पलटा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 08 Oct 2018 09:42 PM IST
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ईंट भट्ठा
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पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) की ओर से राज्य में एक अक्तूबर, 2018 से 31 जनवरी, 2019 तक ईंट भट्ठा संचालन पर लगाई गई रोक को हटा लिया गया है। अदालत पहुंचे इस मामले पर हाईकोर्ट ने प्रथम अपीलीय अथॉरिटी को फैसला लेने के निर्देश दिए थे, जिसने अपीलकर्ता पंजाब ब्रिक किल्न आनर्स एसोसिएशन की दलीलों पर सहमति जताते हुए पीपीसीबी के फैसले को खारिज कर दिया।
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पीपीसीबी ने ईंट भट्ठों से उठने वाले धुएं को प्रदूषण की वजह बताते हुए 9 अप्रैल को इन पर रोक लगाने के आदेश जारी किए थे। इस फैसले के खिलाफ होशियारपुर के भट्ठा मालिक मनीष गुप्ता ने 24 अप्रैल को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने अपील को तो सही माना लेकिन इस मामले में अपीलीय अथॉरिटी को फैसला लेने के निर्देश दिए। इसके बाद याचिकाकर्ता ने पंजाब ब्रिक किल्न आनर्स एसोसिएशन के साथ मिलकर उस अपीलीय अथॉरिटी के समक्ष यह मामला रखा, जिसका गठन वायु (रोकथाम और नियंत्रण का नियंत्रण) अधिनियम, 1981 की धारा 31 के तहत किया गया है।
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जून से सितंबर तक बारिश की मार
अपीलीय अथॉरिटी के समक्ष याचिकाकर्ता ने पीपीसीबी के फैसले को अवैध और असंवैधानिक करार देते हुए कहा कि ईंट भट्ठों पर रोक लगाना भारतीय संविधान की धारा 19 और 21 का उल्लंघन है। पीपीसीबी ने याचिकाकर्ता को न सिर्फ जीविका के लिए व्यापार करने के रोका है बल्कि ईंट भट्ठों पर काम करके अपना जीवनयापन करने वाले मजदूरों की आजीविका भी छीनी है।
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याचिकाकर्ता का कहना था कि जून से सितंबर माह तक बारिश के कारण ईंट भट्ठों का काम वैसे ही बंद रहता है और यह अक्तूबर में ही शुरू हो पाता है। इसके अलावा ईंट-भट्ठों ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशानुसार धुआं कम करने के लिए जिग-जैग तकनीक भी भट्ठों पर लगा ली है। याचिका में ईंट-भट्ठों के धुएं को लेकर एनजीटी द्वारा 18 दिसंबर, 2017 को दिए गए आदेशों का भी हवाला दिया गया था।