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महंगाई की मार से राहत: पंजाब टॉप पांच राज्यों की सूची से बाहर

Wed, 14 Jan 2026 09:20 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 14 Jan 2026 09:20 PM IST
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Relief from the burden of inflation: Punjab is out of the list of top five states.
-जीएसटी दरों में कटौती से मिली राहत, राजस्व में बढ़ोतरी का अनुमान
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।

कर्ज और महंगाई के दबाव में झूल रहे पंजाब के लिए नए साल की शुरुआत अच्छी खबर लेकर आई है। दिसंबर 2025 में सूबे की महंगाई दर घटकर 1.82 प्रतिशत पर पहुंच गई जिससे पंजाब उन पांच राज्यों की सूची से बाहर हो गया जो महंगाई की सबसे अधिक मार झेल रहे थे। विशेषज्ञों के अनुसार जीएसटी दरों में हालिया कटौती ने जरूरी वस्तुओं की कीमतों में कमी ला दी है जिससे आम लोगों की जेब पर दबाव कम हुआ है।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक दिसंबर में पंजाब की महंगाई दर 1.82% रही जबकि नवंबर 2025 तक यह दर राज्य को टॉप पांच महंगाई प्रभावित राज्यों में रख रही थी। राष्ट्रीय स्तर पर महंगाई दर 1.33% तक रही। राज्यों की तुलना में केरल 9.49% महंगाई के साथ सबसे ऊपर है, इसके बाद कर्नाटक 2.99%, आंध्र प्रदेश 2.71%, तमिलनाडु 2.67% और जम्मू-कश्मीर 2.26% हैं।
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जीएसटी कटौती से वित्तीय लाभ
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में वित्तीय वर्ष 2026 में जीएसटी दरों में कटौती से पंजाब के राजस्व में 6.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है। इससे राज्य को लगभग 1786 करोड़ रुपये अतिरिक्त मिलने की संभावना है और कुल जीएसटी राजस्व 28,507 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। राज्य पर कर्ज का बोझ अभी भी चुनौती बना हुआ है। वर्ष 2024-25 में राज्य का अनुमानित कर्ज 3.82 लाख करोड़ रुपये था, जो 2025-26 के अंत तक बढ़कर 4.17 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है।
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उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में भी आई कमी
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) दिसंबर 2025 में 190.4 दर्ज किया गया, जो नवंबर 2025 के 190.8 से कम है। सबसे अधिक सीपीआई केरल में 221.6 रहा। सीपीआई में कमी आने का मतलब है कि आम लोगों के लिए रोजमर्रा की वस्तुएं और सेवाएं अपेक्षाकृत सस्ती हुई हैं। इस गिरावट से स्पष्ट होता है कि पंजाब में महंगाई पर नियंत्रण पाने के प्रयास सफल रहे हैं, और आने वाले महीनों में स्थिति और बेहतर होने की संभावना है।

क्या है सीपीआई
सीपीआई उपभोक्ताओं की ओर से खरीदी जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों का माप है। इसमें खाने-पीने का सामान, किराया, कपड़े, शिक्षा, इलाज, परिवहन, बिजली और पानी जैसी सेवाएं शामिल होती हैं।
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