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पीजीआई: मलेरिया के दो नए टेस्ट लांच, मरीजों को सुविधा
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 21 Dec 2015 04:38 PM IST
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कई बार रोगी में मलेरिया की पहचान नहीं हो पाती, क्योंकि पैरासाइट लोड कम होता है। इससे इलाज में देरी होती है और मरीज को परेशानी का सामना करना पड़ता है, लेकिन पीजीआई ने अब इसका उपाय ढूढ़ लिया है।
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पीजीआई के पैरासिटोलॉजी डिपार्टमेंट ने कड़ी मेहनत के बाद दो नए टेस्ट लांच किए हैं। इससे मलेरिया को पहचानने में आसानी हो गई है। दावा किया गया है कि दोनों ही टेस्टों की सेंटीविटी काफी ज्यादा है। हाल ही में इन टेस्टों को पीजीआई की हास्पिटल चार्ज कमेटी ने हरी झंडी दे दी है। अब ये टेस्ट पीजीआई में उपलब्ध हो गए हैं।
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इन टेस्टों के नाम प्लासमोडियम वाइवैक्स (लैंप) व प्लासमोडियम फेल्सीपैरम (लैंप) है। पीजीआई ने इन टेस्टों के दाम जनरल वार्ड के लिए 600 रुपये रखे हैं, जबकि प्राइवेट वार्ड के लिए 1200 रुपये। पीजीआई के मेडिकल पैरासिटोलॉजी डिपार्टमेंट का दावा है कि ये टेस्ट फिलहाल नार्थ इंडिया के किसी भी हास्पिटल में पेशेंट के लिए नहीं हो रहे हैं।
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इसकी खासियत यह है कि इसकी प्रकिया काफी आसान है। मलेरिया के टेस्ट माइक्रोस्कोपी और एंटीजेन से की जाती है, लेकिन कई बार एक दो केसों में इनसे भी मलेरिया की पहचान नहीं हो पाती। ऐसे में नए टेस्ट काफी कारगर साबित होंगे।
मलेरिया के हैं चार किस्म
मलेरिया एक जानलेवा बीमारी है। समय पर इसकी पहचान न होने से मरीजों की मौत हो सकती है। मलेरिया के चार किस्म होते हैं। पहला प्लासमोडियम फेल्सीपेरम, दूसरा प्लासमोडियम वाइवैक्स, तीसरा प्लासमोडियम मलेरिया व चौथा प्लासमोडियम ओवेल।
प्लासमोडियम फैल्सीपैरम प्रजाति के मच्छर के काटने से इंसान की मौत तक हो सकती है, लेकिन वाइवैक्स मलेरिया आमतौर पर मरीज की जान नहीं लेता, पर बार-बार बुखार आने और पूरे बदन में दर्द से मरीज का हाल बुरा हो जाता है।