Chandigarh: बिना पोस्टमार्टम शव लेने जाने को लेकर हंगामा, इमरजेंसी का दरवाजा तोड़ा, महिला कर्मी से हाथापाई
सेक्टर-52 कजहेड़ी निवासी अशोक कुमार (35) बुधवार रात घर में बेहोश हो गया था। उन्नाव का रहने वाला अशोक माली का काम करता था। परिजन अशोक को सेक्टर-16 अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
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बिना पोस्टमार्टम करवाए शव ले जाने को लेकर परिजनों और रिश्तेदारों ने चंडीगढ़ में दो घंटे तक जमकर हंगामा किया। लोगों ने इमरजेंसी गेट के दरवाजे पर लात मारकर उसे तोड़ दिया। इतना ही नहीं लोगों ने वहां तैनात महिला कर्मी के साथ भी हाथापाई भी की। लोगों के गुस्से को देखते हुए सेक्टर-16 स्थित अस्पताल के मोर्चरी में तैनात कर्मचारियों ने शव सुपुर्द करने के साथ पुलिस को सूचना दी।
पुलिस ने अस्पताल के गेट पर ही एंबुलेंस को रोक लिया। इसकी सूचना जैसे ही रिश्तेदारों को मिली, वह करीब 200 लोगों के साथ अस्पताल के गेट में पहुंच गए और शव ले जाने की मांग करने लगे। पुलिस ने सख्ती की तो परिजन एंबुलेंस के आगे लेट गए। शाम 6 बजे तक भी जब लोग शांत हुए तो पुलिस ने हलका बल प्रयोग कर खदेड़ दिया।
हंगामे की सूचना पर डीएसपी सेंट्रल गुरमुख सिंह, सेक्टर-36 थाना प्रभारी जसपाल सिंह भुल्लर, सेक्टर-17 थाना प्रभारी ओम प्रकाश, सेक्टर-43 बस स्टैंड चौकी प्रभारी सुनील कुमार भी मौके पर पहुंचे और शव को एंबुलेंस से निकालकर वापस मोर्चरी में रखवा दिया। डॉक्टरों के अनुसार मृतक कोरोना संक्रमित था। सेक्टर-36 थाना प्रभारी ने बताया कि शुक्रवार को पोस्टमार्टम करवाया जाएगा।
सेक्टर-43 बस स्टैंड चौकी प्रभारी सुनील कुमार ने बताया कि सेक्टर-52 कजहेड़ी निवासी अशोक कुमार (35) बुधवार रात घर में बेहोश हो गया था। वह मूलरूप से उत्तर प्रदेश उन्नाव का रहने वाला था और माली का काम करता था। परिजन अशोक को सेक्टर-16 अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने बताया कि उनके रिश्तेदार गांव से आएंगे इसलिए पोस्टमार्टम गुरुवार को कराएंगे। गुरुवार दोपहर में अशोक के परिजन अस्पताल में पहुंच गए। डॉक्टरों ने बताया कि अशोक संक्रमित है। पोस्टमार्टम के बाद शव सौंपा जाएगा।
परिजनों ने इसका विरोध किया। लोगों के गुस्से को देखते हुए मोर्चरी के कर्मचारियों ने परिजनों को शव दे दिया और पुलिस को पूरे मामले से अवगत कराया। परिजन शव लेकर अभी अस्पताल के गेट पर ही पहुंचे थे कि पुलिस ने एंबुलेंस को रोक लिया। पुलिस ने चालक को एंबुलेंस पीछे ले जाने को कहा तो परिजन उसके आगे लेट गए। पुलिस ने जब शव को स्ट्रेचर सहित खींचा तो परिजन भी उसे पकड़कर अड़ गए। इसके बाद लोगों ने मोर्चरी के बाहर दरवाजे पर लात मारनी शुरू कर दी। इस पर पुलिस ने हलका बल प्रयोग कर लोगों को खदेड़ दिया।
अस्पताल स्टाफ को हुई गलतफहमी
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मोर्चरी कर्मचारियों को गलतफहमी हो गई थी कि शव देने के लिए उन्होंने कहा है। पुलिस ने शव देने के लिए नहीं कहा था।
अस्पताल प्रबंधन ने शव को परिजनों को नहीं दिया था। जब तक पुलिस नहीं कहेगी शव परिजनों को नहीं दे सकते हैं। इस मामले की जांच कराएंगे। - डॉ सुमन सिंह, निदेशक स्वास्थ्य।