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Chandigarh News: बिल्डर के खिलाफ जल्द एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई शुरू करें

Fri, 09 Dec 2022 08:30 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Fri, 09 Dec 2022 08:30 AM IST
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Register an FIR against the builder and initiate action
चंडीगढ़। प्लॉट और फ्लैट देने के नाम पर लोगों से काफी ठगी हो रही है। इन मामलों में कई केस पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट, जिला अदालत और उपभोक्ता आयोग में चल रहे हैं और कइयों में सुनवाई हो चुकी है। ऐसे ही एक मामले में वीरवार को जिला अदालत के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट डॉ. अमन इंद्र सिंह की कोर्ट ने चंडीगढ़ पुलिस को आदेश दिए हैं कि मनोहर इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ एफआईआर दर्ज करें।
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रवकिरत सिंह ने दायर शिकायत में कहा था कि 22 सितंबर 2016 को बिल्डर ने अपने एक प्रोजेक्ट द पाम में प्लाट देने के नाम पर अलॉटमेंट लेटर जारी किया था। इसके लिए शिकायतकर्ता ने 21, 54, 375 रुपए का लोन भी लिया था और यह रकम बिल्डर को उन्होंने दी थी। शिकायतकर्ता ने कहा कि 6 साल बीतने के बाद भी उन्हें प्लॉट का कब्जा नहीं मिला। ऐसे में वह बिल्डर के पास प्लॉट का कब्जा मांगने आए मगर कोई राहत नहीं मिली। वहीं साइट पर गए तो एक व्यक्ति मिला जिसने खुद को संबंधित जमीन का मालिक बताया। शिकायतकर्ता के मुताबिक आरोपी पक्ष ने एक नई स्कीम निकाली और उनके साथ धोखाधड़ी की।
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जल्द एफआईआर दर्ज करे पुलिस
मनोहर इन्फ्रास्ट्रक्चर के मालिक ने मुल्लांपुर, न्यू चंडीगढ़ में मोहाली के रहने वाले शिकायतकर्ता को रिहायशी प्लॉट देने में उसके साथ कथित रूप से ठगी की थी। जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता रवकिरत सिंह ने एडवोकेट मनप्रीत सिंह ने अदालत से मांग की गई थी कि चंडीगढ़ पुलिस को आदेश दिए जाए कि धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश रचने और आपराधिक स्तर पर विश्वासघात की धाराओं के तहत बिल्डर पर केस दर्ज किया जाए।
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शिकायत में गंभीर आरोप तो करें एफआईआर : सीजेएम
इस मामले की सुनवाई करते हुए सीजेएम सिंह ने अहम टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि हमारे देश में यह तय कानून है कि यदि कोई जानकारी गंभीर अपराध के बारे में बताती हो तो तुरंत एफआईआर दर्ज करने के अलावा और कोई अन्य विकल्प नहीं है। एफआईआर दर्ज करने की स्थिति में क्या जानकारी झूठी है, विश्वसनीय है आदि विचार महत्वपूर्ण नहीं हैं। यह वह मुद्दे हैं जो केस दर्ज करने के बाद जांचे जाने हैं। यदि जानकारी झूठी पाई जाती है तो पुलिस के पास हमेशा शिकायतकर्ता के खिलाफ केस चलाने का एक विकल्प मौजूद रहता है।
पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप
शिकायतकर्ता के मुताबिक आरोपी पक्ष ने प्लॉट को अपना बताने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए और वह चैक दिए जो रद्द हो गए थे। इस मामले में चंडीगढ़ पुलिस को शिकायत दी गई थी मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में कोर्ट में शिकायत दायर की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट की जजमेंट को बनाया आधार
चंडीगढ़ कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की ललिता कुमार बनाम यूपी सरकार मामले में दिए गए फैसले को आधार बनाते हुए कहा कि संज्ञेय अपराध को लेकर विचार योग्य आरोप लगाए गए हैं। ऐसे में केस में जांच की जानी बनती है। कोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए संबंधित थाना एसएचओ को मामले में शिकायत की कॉपी देते हुए केस दर्ज करने के आदेश दिए हैं।

जो चेक दिए वो हुए बाउंस
शिकायतकर्ता के मुताबिक आरोपियों ने उन्हें रिफंड हासिल करने के लिए एक और एग्रीमेंट के लिए राजी कर लिया। इसके तहत मनोहर इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड अपने अथोराइज्ड सिग्नेटरी डायरेक्टर धनवंत सिंह सिद्धू खरीददार होगा और शिकायतकर्ता प्लॉट को बेचने वाला होगा। शिकायतकर्ता को एग्रीमेंट के तहत 14 पोस्ट डेटिड चेक जारी किए गए जो पांच-पांच लाख रुपये के थे। शुरुआती सात चेक कैश हो गए थे। वहीं आगे के चार चेक रद्द हो गए। ऐसे में शिकायतकर्ता ने जब मनोहर इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड कंस्ट्रक्शन को एक लीगल नोटिस भेजा तो डिमांड ड्राफ्ट के जरिए आरोपी पक्ष ने रकम जारी कर दी।
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