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चंडीगढ़ः भाजपा की तर्ज पर कांग्रेस में भी बवाल के आसार

Wed, 09 Dec 2015 03:26 PM IST
राजेश ढल्ल/अमर उजाला, चंडीगढ़
राजेश ढल्ल/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 09 Dec 2015 03:26 PM IST
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rebellion in chandigarh bjp and chandigarh congress

चंडीगढ़ में भाजपा के बाद कांग्रेस को भी भाजपा की तरह गुटबाजी की बीमारी लग गई है। हालात यह हैं कि अब कांग्रेस में भी बवाल आगे और बढ़ने के आसार दिख रहे हैं। इसका असर आने वाले मेयर चुनाव पर भी पड़ सकता है। इससे पहले कांग्रेस को हमेशा ही भाजपा की गुटबाजी का फायदा मिलता रहा है।

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भाजपा की गुटबाजी के कारण ही इस साल पूनम शर्मा मेयर बनी थी। पिछले 15 साल से कांग्रेस में सिर्फ पवन बंसल का ही गुट रहा है और मेयर, सीनियर और डिप्टी मेयर के उम्मीदवार के चयन में पवन बंसल का निर्णय सर्वोच्च रहा है।
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वहीं अब मनीष तिवारी के शहर की राजनीति में सक्रिय होने और कांग्रेस की गुटबाजी का फायदा भाजपा लेना चाहती है, ताकि नए साल में होने वाले मेयर चुनाव में भाजपा को जीत मिल जाए। कांग्रेस के पास इस समय सिर्फ 8 पार्षद हैं, जबकि भाजपा-अकाली गठबंधन के पास सांसद को मिलाकर 16 मत हैं।
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कांग्रेस में इसलिए मचा बवाल
मालूम हो कि पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी के रविवार को मलोया में पब्लिक मीटिंग करने पर कांग्रेस में बवाल मच गया है। हाईकमान ने इस पर कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा से रिपोर्ट मांगी है।

इस पब्लिक मीटिंग में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष बीबी बहल ने बंसल के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए आने वाले लोकसभा चुनाव में मनीष तिवारी को संभावित उम्मीदवार बता दिया था।

तिवारी के सक्रिय होने का कारण
पिछले साल हुए लोकसभा चुनाव में हार के बाद पवन बंसल ने कहा था कि यह उनका आखिरी चुनाव था, वह आगे चुनाव नहीं लड़ेंगे। वहीं मनीष तिवारी ने बीमारी के कारण लुधियाना से पिछला लोकसभा चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया था। वहां से अब कांग्रेस से रवनीत बिट्टू सांसद हैं और तिवारी की अब लुधियाना से फिर से उम्मीदवार बनने की उम्मीद नहीं है। ऐसे में तिवारी शहर में अब अपनी किस्मत आजमाना चाहते हैं।

शहर से तिवारी का रिश्ता
तिवारी ने शहर से ही राजनीति शुरू की थी। उनकी मां अमृत तिवारी नगर निगम की मनोनीत पार्षद भी हैं। जबकि बंसल गुट के करीबी सूत्रों का कहना है कि बंसल अगले लोकसभा चुनाव में अपने बेटे मनीष बंसल को टिकट दिलवाने का प्रयास करेंगे। वहीं इस समय कांग्रेस के अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा पवन बंसल के करीबी हैं। छाबड़ा को बंसल ने ही अध्यक्ष बनवाया है।

पार्टी में किसी भी तरह की गुटबाजी नहीं है। जल्द ही सब ठीक हो जाएगा। दूसरे गुट के नेता भी कांग्रेस के लिए ही शहर में काम कर रहे हैं।
- प्रदीप छाबड़ा, कांग्रेस अध्यक्ष
 
हमारा मकसद सिर्फ इतना है कि पवन बंसल को अगले लोकसभा चुनाव में टिकट नहीं लेने दी जाए। पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ही अगला चुनाव जीत सकते हैं। ऐसे में तिवारी के नेतृत्व में अगले दिनों शहर में और पब्लिक मीटिंग करवाने की तैयारी की जा रही है।
- रविंदर सिंह पाली, पूर्व मेयर

बंसल के नेतृत्व में शहर में कांग्रेस आगे नहीं बढ़ सकती है। मनीष तिवारी शहर में काफी लोकप्रिय हैं। ऐसे में पार्टी में तिवारी की काफी अहम भूमिका रहेगी। अगले साल होने वाले नगर निगम चुनाव में उम्मीदवार तय करने में तिवारी की काफी मजबूत स्थिति रहेगी।

- बीबी बहल, पूर्व अध्यक्ष, कांग्रेस

भाजपा में हैं चार गुट
भाजपा में इस समय चार गुट हैं, जिनमें संजय टंडन के अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री हरमोहन धवन, पूर्व सांसद सत्यपाल जैन और सांसद किरण खेर का गुट सक्रिय है। इस गुटबाजी के कारण पार्टी का काफी नुकसान भी हो चुका है। इस साल भाजपा की मेयर उम्मीदवार हीरा नेगी इसी गुटबाजी के कारण हारी थीं। हाईकमान भी इस गुटबाजी को रोकने में पूरी तरह से असफल रहा है।

बस्सी हैं बहल के करीबी
कांग्रेस में मेयर पद के लिए मुकेश बस्सी प्रबल दावेदार हैं। इस समय वह पवन बंसल के गुट में हैं, लेकिन वह पूर्व अध्यक्ष बीबी बहल के भी करीबी हैं।

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