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बागी अकाली ढींढसा बोले, अकाली हूं और अकाली दल में ही रहूंगा
Sun, 15 Dec 2019 02:49 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अशोक नीर, अमृतसर
अशोक नीर, अमृतसर
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 15 Dec 2019 02:49 AM IST
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सुखदेव सिंह ढींढसा
- फोटो : Social Media
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सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा ने शनिवार को खुलासा किया कि उन्होंने कोर कमेटी की बैठक में यही कहा था कि विधानसभा चुनाव में अकाली दल की करारी हार की जिम्मेदारी सुखबीर बादल की है।
सुखबीर अध्यक्ष पद से इस्तीफा दें और प्रकाश सिंह बादल अध्यक्ष पद संभालें लेकिन बड़े बादल ने उनकी इस सलाह को अनसुना कर दिया। इस सलाह को बार-बार याद दिलाया गया लेकिन बादल के इंकार करने पर उन्होंने पार्टी से किनारा कर लिया।
बादल ने अपने राजनीतिक जीवन में कई बार अकाली नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाया लेकिन वह अकाली दल में पैदा हुए हैं और अकाली दल में ही रहेंगे। कभी कोई चुनाव नहीं लड़ेंगे। शिअद की आज जो स्थिति है, ऐसी व्यवस्था नहीं रहने देंगे।
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पिछले एक साल से बादल परिवार के विरुद्ध मुखर रहे ढींढसा शनिवार को शिरोमणि अकाली दल (टकसाली) के कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे थे। शिरोमणि अकाली दल में बादल परिवार के वर्चस्व के खिलाफ बागी हुए रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा ने शनिवार को बादल विरोधियों को शिअद (टकसाली) के प्लेटफार्म पर इकट्ठा किया।
इन बागी नेताओं में पंजाब विधानसभा के पूर्व स्पीकर रवि इंद्र सिंह, परमजीत सिंह सरना के साथ-साथ दिल्ली कमेटी के पूर्व अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके भी शामिल थे। हालांकि विधायक बैंस बंधु न्योता मिलने के बावजूद कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए।
इस दौरान सभी ने आगामी वर्ष होने वाले संभावित एसजीपीसी चुनाव में शिअद (बादल) के नवनिर्वाचित अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के साथ दो-दो हाथ करने के अपने संकल्प को दोहराया। सुखदेव सिंह ढींढसा ने इस अवसर पर कहा कि एसजीपीसी की स्थापना जिस उद्देश्य की पूर्ति के लिए की गई थी, वहां अब क्या हो रहा है।
उन्होंने उपस्थित सभी बादल विरोधियों से अपील की कि शिअद के अस्तित्व की रक्षा की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है। उन्होंने कहा कि शिअद (टकसाली) में ऐसी व्यवस्था बनानी होगी कि एसजीपीसी का चुनाव वह लड़े, जो सिख सिद्धांतों और गुरसिखी पर पहरा देने वाले हो। सिख संस्थाओं के पहरेदार हो। एसजीपीसी का चुनाव लड़ने वाले कोई भी राजनीतिक चुनाव न लड़ सकें।
विधायक और संसद का चुनाव लड़ने वाले एसजीपीसी का चुनाव न लड़ पाएं। ढींढसा ने कहा कि शिअद (बादल) के पास धन-बल की शक्ति है। सुखबीर बादल की कैप्टन सरकार के साथ मिलीभगत है। पूरा देश कांग्रेस के विरुद्ध है लेकिन सुखबीर कैप्टन के विरुद्ध कुछ नहीं कहते। ढींढसा ने नेताओं से कहा कि वह हमख्याल पार्टियों से संपर्क साधे। उन्होंने सुखबीर बादल के चुनाव को अलोकतांत्रिक बताया।
बादल से कहा था अकाल तख्त साहिब जाकर माफी मांगें :
जत्थेदार रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा ने कहा कि जब सिरसा डेरा मुखी को माफी दी गई तो उन्होंने इसका विरोध किया था। उन्होंने बादल से आग्रह किया था कि वह अकाल तख्त साहिब जाकर माफी मांगे। वहां कहें कि बेअदबी के आरोपियों को सरकार गिरफ्तार कर कानून के अनुसार सजा दिलवाएगी।
इसके लिए एक पत्र भी लिखा गया। बादल अकाल तख्त साहिब जा रहे थे, लेकिन रास्ते से ही लौट आए थे। बादल श्री अकाल तख्त साहिब से माफी तक मांगने को तैयार नहीं हुए। अकाली दल को बादल परिवार के चुंगल से मुक्त करवाना ही उनकी प्राथमिकता है।
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सुखबीर अध्यक्ष पद से इस्तीफा दें और प्रकाश सिंह बादल अध्यक्ष पद संभालें लेकिन बड़े बादल ने उनकी इस सलाह को अनसुना कर दिया। इस सलाह को बार-बार याद दिलाया गया लेकिन बादल के इंकार करने पर उन्होंने पार्टी से किनारा कर लिया।
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बादल ने अपने राजनीतिक जीवन में कई बार अकाली नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाया लेकिन वह अकाली दल में पैदा हुए हैं और अकाली दल में ही रहेंगे। कभी कोई चुनाव नहीं लड़ेंगे। शिअद की आज जो स्थिति है, ऐसी व्यवस्था नहीं रहने देंगे।
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पिछले एक साल से बादल परिवार के विरुद्ध मुखर रहे ढींढसा शनिवार को शिरोमणि अकाली दल (टकसाली) के कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे थे। शिरोमणि अकाली दल में बादल परिवार के वर्चस्व के खिलाफ बागी हुए रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा ने शनिवार को बादल विरोधियों को शिअद (टकसाली) के प्लेटफार्म पर इकट्ठा किया।
इन बागी नेताओं में पंजाब विधानसभा के पूर्व स्पीकर रवि इंद्र सिंह, परमजीत सिंह सरना के साथ-साथ दिल्ली कमेटी के पूर्व अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके भी शामिल थे। हालांकि विधायक बैंस बंधु न्योता मिलने के बावजूद कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए।
इस दौरान सभी ने आगामी वर्ष होने वाले संभावित एसजीपीसी चुनाव में शिअद (बादल) के नवनिर्वाचित अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के साथ दो-दो हाथ करने के अपने संकल्प को दोहराया। सुखदेव सिंह ढींढसा ने इस अवसर पर कहा कि एसजीपीसी की स्थापना जिस उद्देश्य की पूर्ति के लिए की गई थी, वहां अब क्या हो रहा है।
उन्होंने उपस्थित सभी बादल विरोधियों से अपील की कि शिअद के अस्तित्व की रक्षा की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है। उन्होंने कहा कि शिअद (टकसाली) में ऐसी व्यवस्था बनानी होगी कि एसजीपीसी का चुनाव वह लड़े, जो सिख सिद्धांतों और गुरसिखी पर पहरा देने वाले हो। सिख संस्थाओं के पहरेदार हो। एसजीपीसी का चुनाव लड़ने वाले कोई भी राजनीतिक चुनाव न लड़ सकें।
विधायक और संसद का चुनाव लड़ने वाले एसजीपीसी का चुनाव न लड़ पाएं। ढींढसा ने कहा कि शिअद (बादल) के पास धन-बल की शक्ति है। सुखबीर बादल की कैप्टन सरकार के साथ मिलीभगत है। पूरा देश कांग्रेस के विरुद्ध है लेकिन सुखबीर कैप्टन के विरुद्ध कुछ नहीं कहते। ढींढसा ने नेताओं से कहा कि वह हमख्याल पार्टियों से संपर्क साधे। उन्होंने सुखबीर बादल के चुनाव को अलोकतांत्रिक बताया।
बादल से कहा था अकाल तख्त साहिब जाकर माफी मांगें :
जत्थेदार रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा ने कहा कि जब सिरसा डेरा मुखी को माफी दी गई तो उन्होंने इसका विरोध किया था। उन्होंने बादल से आग्रह किया था कि वह अकाल तख्त साहिब जाकर माफी मांगे। वहां कहें कि बेअदबी के आरोपियों को सरकार गिरफ्तार कर कानून के अनुसार सजा दिलवाएगी।
इसके लिए एक पत्र भी लिखा गया। बादल अकाल तख्त साहिब जा रहे थे, लेकिन रास्ते से ही लौट आए थे। बादल श्री अकाल तख्त साहिब से माफी तक मांगने को तैयार नहीं हुए। अकाली दल को बादल परिवार के चुंगल से मुक्त करवाना ही उनकी प्राथमिकता है।