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इस वजह से फिरा जाट और सरकार के बीच सुलह की उम्मीदों पर पानी, देखिए
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 18 Mar 2017 09:59 AM IST
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जाट नेता यशपाल मलिक
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जाटों और हरियाणा सरकार के बीच बात फिर से बिगड़ गई। इस बार दोनों के बीच सुलह की उम्मीदों पर पानी फिरने की वजह भी पता चल गई है। 48 दिन बाद भी हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन वहीं खड़ा है, जहां से शुरू हुआ था।
वीरवार को पानीपत रिफाइनरी गेस्ट हाउस में सरकार के मंत्री समूह की तीन सदस्यीय समिति से जाट नेताओं की वार्ता के बाद आंदोलन खत्म होने के आसार लगभग बन गए थे, शुक्रवार दोपहर दिल्ली में होने वाली घोषणा का इंतजार था।
लेकिन, बात फिर 21 सीबीआई और 11 जघन्य अपराध के दर्ज मामलों को वापस लेने पर अटक गई। जाट आंदोलनकारी इन केसों को भी वापस लेने का सरकार से लिखित आश्वासन चाह रहे हैं, जिससे सरकार पहले ही मना कर चुकी है, चूंकि केस उनके विचाराधीन न होकर सीबीआई के पास या कोर्ट में हैं।
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वीरवार को हुई वार्ता के बाद मानी गई सात मांगों में से अधिकांश पर सरकार पहले ही हामी भर चुकी थी, अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक ने जब इसकी सूचना कोर कमेटी व धरनों पर बैठे अन्य जाट नेताओं को दी तो वे बिफर गए।
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वीरवार को पानीपत रिफाइनरी गेस्ट हाउस में सरकार के मंत्री समूह की तीन सदस्यीय समिति से जाट नेताओं की वार्ता के बाद आंदोलन खत्म होने के आसार लगभग बन गए थे, शुक्रवार दोपहर दिल्ली में होने वाली घोषणा का इंतजार था।
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लेकिन, बात फिर 21 सीबीआई और 11 जघन्य अपराध के दर्ज मामलों को वापस लेने पर अटक गई। जाट आंदोलनकारी इन केसों को भी वापस लेने का सरकार से लिखित आश्वासन चाह रहे हैं, जिससे सरकार पहले ही मना कर चुकी है, चूंकि केस उनके विचाराधीन न होकर सीबीआई के पास या कोर्ट में हैं।
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वीरवार को हुई वार्ता के बाद मानी गई सात मांगों में से अधिकांश पर सरकार पहले ही हामी भर चुकी थी, अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक ने जब इसकी सूचना कोर कमेटी व धरनों पर बैठे अन्य जाट नेताओं को दी तो वे बिफर गए।
मलिक पर सरकार ने ये काम करने का दबाव बनाया
सरकार और जाटों में बनी सहमति
- फोटो : अमर उजाला
सूत्रों के अनुसार उन्होंने मलिक पर सरकार से जघन्य अपराध व सीबीआई के केसों की वापसी का भी लिखित आश्वासन लेने का दबाव बनाया, जिसमें मलिक गुट फिलहाल असमर्थ दिखाई दिया, क्योंकि पानीपत में हुई तीसरे चरण की वार्ता में जिन सात मांगों पर सहमति बनी थी, उसमें इनका जिक्रनहीं था।
इसलिए जाट आंदोलनकारियों ने समझौते का विरोध किया। सूत्रों की मानें तो इसके बाद ही अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने अपनी रणनीति बदली है। मलिक गुट किसी सूरत में हरियाणा के जाटों में अपना जनाधार खोना नहीं चाहता,
चूंकि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में भाजपा विरोध की रणनीति फ्लाप रहने के बाद उनके पास ज्यादा विकल्प नहीं हैं। हरियाणा सरकार के पास खुफिया एजेंसियों के जरिए इस बात की सूचना पहुंच चुकी है कि जाट आंदोलनकारियों में ही समझौते को लेकर एक राय नहीं बन पा रही।
इसलिए जाट आंदोलनकारियों ने समझौते का विरोध किया। सूत्रों की मानें तो इसके बाद ही अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने अपनी रणनीति बदली है। मलिक गुट किसी सूरत में हरियाणा के जाटों में अपना जनाधार खोना नहीं चाहता,
चूंकि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में भाजपा विरोध की रणनीति फ्लाप रहने के बाद उनके पास ज्यादा विकल्प नहीं हैं। हरियाणा सरकार के पास खुफिया एजेंसियों के जरिए इस बात की सूचना पहुंच चुकी है कि जाट आंदोलनकारियों में ही समझौते को लेकर एक राय नहीं बन पा रही।
जाट नेता धरने जारी रखने और दिल्ली कूच पर अडिग
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति की कार्यकारिणी की बैठक को संबधित करते राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक।
हरियाणा में पिछले 48 दिन से चल रहे जाट आरक्षण आंदोलन के खत्म होने की उम्मीदों पर शुक्रवार को तब फिर से पानी फिर गया, जब समझौते के मुताबिक सीएम मनोहर लाल खट्टर जाट नेताओं से बातचीत के लिए दिल्ली नहीं पहुंच पाए। इससे अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के नेता बिफर गए और रोहतक आकर एलान किया कि धरने जारी रहेंगे व 20 मार्च को दिल्ली कूच भी करेंगे।
जाटों के आंदोलन जारी रखने की घोषणा के बाद सीएम खट्टर ने चंडीगढ़ में प्रेसवार्ता कर अपना पक्ष रखा। दरअसल पानीपत में वीरवार को तीसरे दौर की वार्ता के बाद यह तय हुआ था कि समिति और सीएम के बीच दिल्ली में वार्ता होगी और उम्मीद की जा रही थी कि वहां आंदोलन खत्म करने की घोषणा की जा सकती है। लेकिन पूरे घटनाक्रम में नाटकीय मोड़ आने के बाद सुरक्षा अमला अलर्ट हो गया है।
रोहतक में सुरक्षा बलों की छह और कंपनियों ने मोर्चा संभाल लिया है। दिल्ली में सीएम मनोहर लाल के वार्ता व साझा प्रेस कांफ्रेंस न करने से भड़के जाट नेता यशपाल मलिक ने रोहतक में पत्रकार सम्मेलन कर दिल्ली कूच में कोई बदलाव न होने का एलान कर डाला।
जाटों के आंदोलन जारी रखने की घोषणा के बाद सीएम खट्टर ने चंडीगढ़ में प्रेसवार्ता कर अपना पक्ष रखा। दरअसल पानीपत में वीरवार को तीसरे दौर की वार्ता के बाद यह तय हुआ था कि समिति और सीएम के बीच दिल्ली में वार्ता होगी और उम्मीद की जा रही थी कि वहां आंदोलन खत्म करने की घोषणा की जा सकती है। लेकिन पूरे घटनाक्रम में नाटकीय मोड़ आने के बाद सुरक्षा अमला अलर्ट हो गया है।
रोहतक में सुरक्षा बलों की छह और कंपनियों ने मोर्चा संभाल लिया है। दिल्ली में सीएम मनोहर लाल के वार्ता व साझा प्रेस कांफ्रेंस न करने से भड़के जाट नेता यशपाल मलिक ने रोहतक में पत्रकार सम्मेलन कर दिल्ली कूच में कोई बदलाव न होने का एलान कर डाला।
जाट नेताओं से मुलाकात का नहीं था कार्यक्रम
मनोहर लाल खट्टर
चंडीगढ़ में पूरे घटनाक्रम से हैरान मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने साफ कहा कि जाट नेताओं के साथ संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस का कोई कार्यक्रम तय नहीं था। रामबिलास शर्मा सरकार में वरिष्ठ मंत्री हैं, और उन्हें ही जाटों के साथ संयुक्त रूप से समझौते की जानकारी देनी थी। उनका पहले से कार्यक्रम तय होता तो वह पंचकूला और नारनौल के दौरे में फेरबदल करते। उनके दरवाजे बातचीत के लिए खुले हैं। उन्होंने जाटों के यू-टर्न के पीछे राजनीति होने की आशंका भी जताई।
जारी रहेगा आंदोलन: मलिक
दिल्ली में सीएम के साथ बातचीत नहीं होने से बिफरे अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के नेता यशपाल मलिक ने रोहतक आकर आंदोलन जारी रखने की घोषणा कर दी। उन्होंने कहा कि सरकार के साथ किसी तरह का कोई समझौता नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि आंदोलन पहले की ही भांति चलता रहेगा। लोग भारी संख्या में 20 मार्च को दिल्ली कूच में भाग लेंगे। मलिक ने बातचीत को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए और कहा कि सीएम ने दिल्ली में होते हुए बातचीत नहीं की और चंडीगढ़ चले गए।
जारी रहेगा आंदोलन: मलिक
दिल्ली में सीएम के साथ बातचीत नहीं होने से बिफरे अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के नेता यशपाल मलिक ने रोहतक आकर आंदोलन जारी रखने की घोषणा कर दी। उन्होंने कहा कि सरकार के साथ किसी तरह का कोई समझौता नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि आंदोलन पहले की ही भांति चलता रहेगा। लोग भारी संख्या में 20 मार्च को दिल्ली कूच में भाग लेंगे। मलिक ने बातचीत को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए और कहा कि सीएम ने दिल्ली में होते हुए बातचीत नहीं की और चंडीगढ़ चले गए।