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ये कैसा पुनर्वास... सड़कों पर सीवर का पानी, बदहाली का जीवन जीने को मजबूर सेक्टर-49 के लोग
Tue, 11 Aug 2020 12:41 PM IST
खुशबू गोयल
रिशु राज सिंह, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 11 Aug 2020 12:41 PM IST
सार
- न पार्क बचे, न खेल के मैदान... कई नेता बदले, लेकिन नहीं सुधरी सेक्टर की हालत
- 8 साल पहले अलॉट हुए फ्लैट, ड्रेनेज सिस्टम फेल, घरों के नीचे से निकल रहा पानी
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सेक्टर 49 में बदहाल सड़कें
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
चंडीगढ़ के सेक्टर-49सी में साल 2012 में करीब 1024 स्मॉल फ्लैट्स गरीब लोगों को दिए गए। करीब 8 साल बाद उन मकानों की हालत देखकर कोई नहीं कह सकता कि यह सरकार की ओर से दिए गए मकान हैं। हालात यह हैं कि मकानों की जमीन अंदर धंस रही है। घरों के नीचे से पानी निकल रहा है। पूरे एरिया का ड्रेनेज सिस्टम फेल हो चुका है।
सीवर का पानी बिल्डिंग के नीचे जा रहा है। सेक्टर-49सी के 1024 स्मॉल फ्लैट्स में करीब 5 हजार लोग हर समय खतरे के साये में जी रहे हैं। पूरे इलाके में बीमारी फैलने का खतरा बना हुआ है। ऐसी तमाम परेशानियों के साथ सेक्टर-49 के पुनर्वास फ्लैट्स में लोग जीने को मजबूर हैं। यह मकान हाउसिंग बोर्ड की ओर से बनाए गए हैं।
सिर्फ यही नहीं, हाउसिंग बोर्ड के इन मकानों में टॉयलेट की पाइप घर के अंदर से गुजर रही है, जो हमेशा रिसती रहती है। स्थानीय लोग प्रधानमंत्री कार्यालय तक को इस समस्या से अवगत करा चुके हैं, लेकिन हालात जस के तस हैं। इलाके में न तो पार्क बचे हैं, न ही खेलने के मैदान। हर ओर गंदगी ही गंदगी है। 8 साल में इन फ्लैट की ऐसी हालत हो गई है कि मानों यह 40 साल पुराने हों।
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फ्लैट्स के अंदर की सीढ़ियां टूट कर गिरने लगी हैं। आलम यह है कि सरिया नजर आने लगा है। बिल्डिंग के ऊपर पानी के टंकी का स्टैंड पूरी तरह से गिरने के कगार पर है। पूरे इलाके में चूहों की समस्या काफी गंभीर है। चूहे बिल्डिंग को खोखला कर रहे हैं। 2012 में इन फ्लैट्स को लोगों को सौंपा गया, उसके बाद से यहां एक बार भी रिपेयरिंग नहीं हुई है।
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सीवर का पानी बिल्डिंग के नीचे जा रहा है। सेक्टर-49सी के 1024 स्मॉल फ्लैट्स में करीब 5 हजार लोग हर समय खतरे के साये में जी रहे हैं। पूरे इलाके में बीमारी फैलने का खतरा बना हुआ है। ऐसी तमाम परेशानियों के साथ सेक्टर-49 के पुनर्वास फ्लैट्स में लोग जीने को मजबूर हैं। यह मकान हाउसिंग बोर्ड की ओर से बनाए गए हैं।
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सिर्फ यही नहीं, हाउसिंग बोर्ड के इन मकानों में टॉयलेट की पाइप घर के अंदर से गुजर रही है, जो हमेशा रिसती रहती है। स्थानीय लोग प्रधानमंत्री कार्यालय तक को इस समस्या से अवगत करा चुके हैं, लेकिन हालात जस के तस हैं। इलाके में न तो पार्क बचे हैं, न ही खेलने के मैदान। हर ओर गंदगी ही गंदगी है। 8 साल में इन फ्लैट की ऐसी हालत हो गई है कि मानों यह 40 साल पुराने हों।
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फ्लैट्स के अंदर की सीढ़ियां टूट कर गिरने लगी हैं। आलम यह है कि सरिया नजर आने लगा है। बिल्डिंग के ऊपर पानी के टंकी का स्टैंड पूरी तरह से गिरने के कगार पर है। पूरे इलाके में चूहों की समस्या काफी गंभीर है। चूहे बिल्डिंग को खोखला कर रहे हैं। 2012 में इन फ्लैट्स को लोगों को सौंपा गया, उसके बाद से यहां एक बार भी रिपेयरिंग नहीं हुई है।
दो पार्षद बदले, कई बार उद्घाटन हुआ, लेकिन नहीं बन पाया पार्क
स्थानीय लोगों ने बताया कि इलाके में एक पार्क है, जिसका कई बार उद्घाटन हुआ, लेकिन आज तक उसका विकास नहीं हो पाया। दो पार्षद बदले, बावजूद इसके पार्क की हालत जस की तस है। पार्क में बड़ी-बड़ी घासें उग आई हैं, उन्हें देखने कोई नहीं आता। कई बार स्थानीय लोग घांसों को कटवाने का आग्रह कर चुके हैं, लेकिन किसी के कान पर जूं तक नहीं रेंगी।
लोगों का कहना है कि स्मॉल फ्लैट्स होने की वजह से उनके साथ भेदभाव किया जाता है। ड्रेनेज सिस्टम को बदलवाने की कई बार मांग की जा चुकी है। प्रशासन और नगर निगम के अधिकारी भी कई बार यहां का दौरा कर चुके हैं लेकिन यहां कुछ नहीं बदला। सब कुछ जस का तस है।
बिल्डिंग को बनाने में घटिया मैटीरियल के इस्तेमाल का आरोप
कजहेड़ी में पंडित कॉलोनी व मजदूर कॉलोनी, इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 की संजय कॉलोनी और सेक्टर-52 स्थित टीन शेड में रहने वाले परिवारों को यहां वर्ष 2009 से 2012 के बीच शिफ्ट किया गया। लोगों का आरोप है कि यह मकान मजदूरों को मिलने थे, सिर्फ इसलिए इन्हें बनाने में घटिया क्वालिटी के मैटीरियल का इस्तेमाल किया गया।
इसी वजह से 8 साल के अंदर ही मकान टूट कर गिरने लगे हैं। लोगों ने कहा कि पूरे इलाके में गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। साफ-सफाई करने के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी तो लगी हुई है, लेकिन वह भी सिर्फ खानापूर्ति ही करते हैं।
लोगों का कहना है कि स्मॉल फ्लैट्स होने की वजह से उनके साथ भेदभाव किया जाता है। ड्रेनेज सिस्टम को बदलवाने की कई बार मांग की जा चुकी है। प्रशासन और नगर निगम के अधिकारी भी कई बार यहां का दौरा कर चुके हैं लेकिन यहां कुछ नहीं बदला। सब कुछ जस का तस है।
बिल्डिंग को बनाने में घटिया मैटीरियल के इस्तेमाल का आरोप
कजहेड़ी में पंडित कॉलोनी व मजदूर कॉलोनी, इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 की संजय कॉलोनी और सेक्टर-52 स्थित टीन शेड में रहने वाले परिवारों को यहां वर्ष 2009 से 2012 के बीच शिफ्ट किया गया। लोगों का आरोप है कि यह मकान मजदूरों को मिलने थे, सिर्फ इसलिए इन्हें बनाने में घटिया क्वालिटी के मैटीरियल का इस्तेमाल किया गया।
इसी वजह से 8 साल के अंदर ही मकान टूट कर गिरने लगे हैं। लोगों ने कहा कि पूरे इलाके में गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। साफ-सफाई करने के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी तो लगी हुई है, लेकिन वह भी सिर्फ खानापूर्ति ही करते हैं।
कोई सुनने वाला नहीं
यहां पर पार्क की हालत काफी खराब है। कई बार इसका उद्घाटन हुआ, लेकिन अभी तक वह डेवलप नहीं हो पाया है। सीवरेज की लाइन फ्लैट्स के नीचे से है, जो टूट गई है। अब पानी रिसता रहता है। यही पानी लोगों के घरों में भी घुस रहा है। कोई सुनने वाला नहीं है।
- सुनील कुमार
चारों ओर गंदगी ही गंदगी
यहां हजारों लोगों को बसा दिया गया, लेकिन न तो मार्केट, पब्लिक टॉयलेट और डिस्पेंसरी बनाया गया। पार्क भी बच्चों के खेलने लायक नहीं है। प्रशासन गरीब लोगों के साथ दोहरा व्यवहार करता है। चारों ओर गंदगी ही गंदगी है।
- विनोट इंदौरा
सड़कों पर बहता है गंदा पानी
सबसे ज्यादा समस्या सीवरेज की है। सड़कों पर गंदा पानी बहता रहता है। जहां खाना बनाते हैं, वहीं नीचे से सीवर का पानी आ जाता है। बारिश हो या न हो छत पूरे साल टपकती रहती है। न जानें कितनी बार शिकायत की लेकिन कोई गरीबों की नहीं सुनता है।
- सुमन
यहां साफ-सफाई करने कोई नहीं आता
सीवर की पाइप टूटी हुई है, पानी की पाइप में लीकेज होने के बाद गंदा पानी आने लगता है। पीने के पानी की पाइप और सीवर की लाइन एक साथ ही है। कई बार लोग बीमार भी हुए हैं, लेकिन कोई नहीं सुनता है। यहां साफ-सफाई करने कोई नहीं आता है।
- शिव कुमार
सीवरेज का सिस्टम पूरी तरह से फेल
गंदगी की वजह से इलाके में चूहों की समस्या भी बढ़ गई है। सीढ़ियां टूट कर गिर रही हैं। सीवरेज का सिस्टम पूरी तरह से फेल हो गया है। जमीन नीचे धंस रही है। हर वक्त लोगों को बिल्डिंग के गिरने का डर सताता रहता है।
- बबलू कुमार
- सुनील कुमार
चारों ओर गंदगी ही गंदगी
यहां हजारों लोगों को बसा दिया गया, लेकिन न तो मार्केट, पब्लिक टॉयलेट और डिस्पेंसरी बनाया गया। पार्क भी बच्चों के खेलने लायक नहीं है। प्रशासन गरीब लोगों के साथ दोहरा व्यवहार करता है। चारों ओर गंदगी ही गंदगी है।
- विनोट इंदौरा
सड़कों पर बहता है गंदा पानी
सबसे ज्यादा समस्या सीवरेज की है। सड़कों पर गंदा पानी बहता रहता है। जहां खाना बनाते हैं, वहीं नीचे से सीवर का पानी आ जाता है। बारिश हो या न हो छत पूरे साल टपकती रहती है। न जानें कितनी बार शिकायत की लेकिन कोई गरीबों की नहीं सुनता है।
- सुमन
यहां साफ-सफाई करने कोई नहीं आता
सीवर की पाइप टूटी हुई है, पानी की पाइप में लीकेज होने के बाद गंदा पानी आने लगता है। पीने के पानी की पाइप और सीवर की लाइन एक साथ ही है। कई बार लोग बीमार भी हुए हैं, लेकिन कोई नहीं सुनता है। यहां साफ-सफाई करने कोई नहीं आता है।
- शिव कुमार
सीवरेज का सिस्टम पूरी तरह से फेल
गंदगी की वजह से इलाके में चूहों की समस्या भी बढ़ गई है। सीढ़ियां टूट कर गिर रही हैं। सीवरेज का सिस्टम पूरी तरह से फेल हो गया है। जमीन नीचे धंस रही है। हर वक्त लोगों को बिल्डिंग के गिरने का डर सताता रहता है।
- बबलू कुमार