हाईकोर्ट की पांच खबरें: सामाजिक बहिष्कार मामले में हरियाणा सरकार ने बताया- शांति का है माहौल, 14 से शुरू होगी फिजिकल सुनवाई
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने फीस का भुगतान न करने के कारण बच्चों को ऑनलाइन क्लास से वंचित करने के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए हरियाणा व पंजाब के एडवोकेट जनरल को ऐसा तंत्र विकसित करने का आदेश दिया है जिससे इस तरह के मामले कोर्ट न पहुंचे।
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जींद के छातर गांव में 150 परिवारों के सामाजिक बहिष्कार मामले में हरियाणा सरकार ने जवाब दाखिल करते हुए बताया कि दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई हैं। याचिकाकर्ता को फिलहाल कोई खतरा नहीं है और गांव में शांति का माहौल है। हाईकोर्ट को बताया गया कि याचिकाकर्ता के किसी सामाजिक अधिकार का उल्लंघन नहीं हुआ है। याचिकाकर्ता की तरफ से चार व विरोधी पक्ष की तरफ से दो एफआईआर दर्ज करवाई गई है। पुलिस पर पक्षपात के आरोप निराधार हैं और पुलिस कानून के अनुरूप निष्पक्ष जांच कर रही है।
सरकार ने कहा कि याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से यह याचिका केवल पुलिस पर दबाव बनाने के लिए दायर की है। साथ ही बताया कि फिलहाल सभी पक्ष शांति से रह रहे हैं, गांव में किसी भी तरह का कोई तनाव नहीं है। इस मामले में अनुसूचित जाति के गुरमीत व अन्य ने एडवोकेट अर्जुन श्योराण के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए उनका सामाजिक बहिष्कार करने वालों पर कार्रवाई करने के निर्देश देने की मांग की है। हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार का पक्ष सुनने के बाद याचिका पर सुनवाई मार्च तक स्थगित कर दी।
2- फीस से जुड़े बढ़ते मामलों पर हाईकोर्ट ने जताई चिंता
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने फीस का भुगतान न करने के कारण बच्चों को ऑनलाइन क्लास से वंचित करने के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए हरियाणा व पंजाब के एडवोकेट जनरल को ऐसा तंत्र विकसित करने का आदेश दिया है जिससे इस तरह के मामले कोर्ट न पहुंचे। कोरोना के चलते स्कूल बंद हैं और ऑनलाइन कक्षाएं चल रही हैं। ऐसे में कई मामले सामने आ रहे हैं, जहां फीस न भर पाने के चलते छात्रों को कक्षाओं व परीक्षा से वंचित किया जा रहा है। इस तरह के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह की बढ़ती याचिकाओं के कारण हाईकोर्ट पर बोझ बढ़ रहा है। इन अनावश्यक याचिकाओं के चलते अन्य मामलों की सुनवाई प्रभावित हो रही है। सरकार को चाहिए कि वह ऐसा तंत्र विकसित करे कि सरकार के स्तर पर ही इन मामलों का निपटारा हो जाए।
याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया गया था कि याचिकाकर्ताओं ने बढ़ी हुई फीस को चुनौती दी है, इसलिए वह फीस जमा नहीं करवा रहे हैं। फीस न जमा करवाने के चलते उनके बच्चों को कक्षाओं व परीक्षा से वंचित किया जा रहा है। हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए आरोपों की जांच का हरियाणा सरकार को आदेश दिया था। साथ ही स्पष्ट किया कि किसी भी छात्र को कक्षाओं व परीक्षा से वंचित न किया जाए। यदि ऐसा किया गया है तो स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
3- स्कूल बसों को चलाने की अवधि बढ़ाने व कर माफी की मांग पर निर्णय ले यूटी प्रशासन: हाईकोर्ट
कोरोना के चलते स्कूल बसों के खड़े रहने और किसी भी प्रकार की कमाई न होने के चलते चंडीगढ़ स्कूल बस ऑपरेटर वेलफेयर एसोसिएशन ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर राहत की मांग की है। हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए याची की मांग पर निर्णय लेने का यूटी प्रशासन को आदेश दिया है।
चंडीगढ़ स्कूल बस ऑपरेटर्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया था कि कोरोना के चलते स्कूल बंद हैं और ऑनलाइन कक्षाएं चल रही हैं। स्कूलों के बंद होने के चलते स्कूल बसें भी चलना बंद हो चुकी हैं। तब से लेकर अब तक स्कूल बस के कर्मी और मालिकों की आजीविका बुरी तरह से प्रभावित हुई है। निजी स्कूलों को तो ट्यूशन फीस वसूले जाने की इजाजत मिल चुकी है लेकिन ट्रांसपोर्ट फीस वसूलने पर रोक लगा दी गई है।
ट्रांसपोर्ट फीस न वसूलने के कारण उनकी स्कूल बसों का खर्च नहीं निकल रहा है। संस्था ने कहा कि चाहे स्कूल बसें बंद हैं लेकिन इन खाली बसों का भी उन पर खर्च पड़ रहा है। चाहे इन बसों की किश्तें हो या इंश्योरेंस या अन्य खर्च, वह उन्हें करने ही पड़ रहे हैं। बसें न चलने से सिर्फ डीजल का खर्च नहीं पड़ा रहा है। कोरोना के कारण मार्च 2020 से स्कूल बंद हो गए थे और क्लास ऑनलाइन चल रही थी, जिस कारण उनकी बसें बंद कर दी गईं। 2020 में प्रशासन ने उन्हें राहत देते हुए 31 दिसंबर 2020 तक टैक्स से छूट दे दी थी।
पिछले साल भी अधिकतर समय कोरोना की दूसरी लहर के चलते स्कूल बंद रहे हैं, जिस कारण उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ा है। याचिकाकर्ता एसोसिएशन ने अब हाईकोर्ट से मांग की है कि उनके पिछले साल 1 जनवरी से 31 दिसंबर का टैक्स भी माफ किया जाए। इसके साथ इन एसोसिएशन ने मांग की है कि एक बस कि मियाद 15 साल होती है लेकिन पिछले दो वर्ष उनकी बसें चली ही नहीं, ऐसे में इसकी मियाद को 15 से बढ़ाकर 20 वर्ष की जाए। चंडीगढ़ प्रशासन ने कहा कि वह मांग पर उचित निर्णय ले लेंगे। इस जानकारी पर हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया।
4- 14 फरवरी से हाईकोर्ट में कुल संख्या के आधे जज करेंगे फिजिकल सुनवाई
कोरोना के बिगड़े हालात के चलते सभी मामलों की वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई के फैसले में बड़ा संशोधन करते हुए हाईकोर्ट ने अब आधे जजों को फिजिकल सुनवाई करने का आदेश दिया है। मुख्य न्यायाधीश द्वारा जारी आदेश के अनुसार अब कुल संख्या के आधे जज फिजिकल सुनवाई करेंगे। आदेश के अनुरूप हर जज एक दिन छोड़कर केसों की फिजिकल सुनवाई करेगा। इससे पूर्व में हाईकोर्ट के सभी जज केवल वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये ही सुनवाई कर रहे थे। हालांकि अब भी सभी मामलों में सुनवाई नहीं होगी।
कोरोना से पहले जिन मामलों में तारीख डाली गई थी, उन्हें आगे भी तारीख ही दी जा रही है। जिन मामलों में कोई इमरजेंसी है और मेंशनिंग की गई है, उन्हीं मामलों में न्यायालय की स्वीकृति के बाद सुनवाई होगी। फिजिकल सुनवाई का आदेश 14 फरवरी से प्रभावी होगा। बार एसोसिएशन लंबे समय से मांग कर रही थी कि हाईकोर्ट में फिजिकल सुनवाई शुरू की जाए।
5- 6635 ईटीटी शिक्षकों की भर्ती में स्नातक के 5 अंक देने के प्रावधान को हाईकोर्ट में चुनौती
पंजाब सरकार द्वारा ईटीटी के 6635 पदों के लिए जारी नियुक्ति प्रक्रिया में ग्रेजुएशन को उच्च योग्यता मानते हुए इसके लिए अतिरिक्त 5 अंक देने के प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब कर लिया है। प्रीति प्रभात सहित 57 आवेदकों ने एडवोकेट विकास चतरथ के जरिये याचिका दाखिल करते हुए बताया कि पंजाब सरकार ने गत वर्ष जुलाई में ईटीटी के 6635 पदों के लिए आवेदन मांगे थे।
ईटीटी की योग्यता के साथ यह भी तय कर दिया गया कि जिन आवेदकों ने ग्रेजुएशन की है, उन्हें उच्च शिक्षा के अतिरिक्त पांच अंक दिए जाएंगे। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि इस तरह से ग्रेजुएशन के लिए अलग से अतिरिक्त अंक देना तय नियमों का उल्लंघन है। इस तरह समानता के अधिकार का उल्लंघन किया जा रहा है। ऐसे में इस प्रावधान को रद्द करने की याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट से मांग की है। हाईकोर्ट ने याचिका पर पंजाब सरकार सहित अन्य प्रतिवादी पक्षों को 31 मार्च के लिए नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है।