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Hindi News ›   Chandigarh ›   Read the Interview of Wrestler Ravi Dahiya before Commonwealth Games

Ravi Dahiya Interview: सुनहरा दांव लगाने को बेताब रवि, बोले- देशवासियों को दूंगा एक और सौगात

Sat, 23 Jul 2022 01:47 AM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा) Published by: ajay kumar Updated Sat, 23 Jul 2022 01:47 AM IST
सार

रवि के पिता राकेश दहिया भी कुश्ती में देश का नाम रोशन करना चाहते थे। हालांकि आर्थिक स्थिति मजबूत न होने के कारण कुश्ती में आगे नहीं बढ़ सके थे लेकिन अपने बेटे को उन्होंने अंतरराष्ट्रीय फलक तक पहुंचा दिया है। रवि भी अपने पिता के सपने को पूरा कर रहे हैं। 

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पहलवान रवि दहिया - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

एक वर्ष पहले टोक्यो ओलंपिक में रजत पदक जीतने वाले रवि दहिया की सफलता को याद कर आज भी खेल प्रेमी रोमांचित हो उठते हैं। शानदार प्रदर्शन की बदौलत वह रातोंरात स्टार बन गए थे। विश्व में नंबर दो रैंकिंग वाले ओलंपियन पहलवान रवि दहिया अब इंग्लैंड के बर्मिंघम में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों में अपने 57 किलो भारवर्ग में सुनहरा दांव लगाने को बेताब हैं। दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में रोजाना सुबह-शाम छह घंटे अभ्यास कर रहे दहिया को राष्ट्रमंडल में सोने से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। ओलंपिक में देश को चांदी दिलाने वाले रवि तीन बड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीत चुके हैं। रवि ने कहा कि वह देशवासियों को जल्द बड़ी सौगात देंगे।

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हरियाणा के सोनीपत के गांव नाहरी के मूल निवासी रवि दहिया को उनके पिता राकेश दहिया गांव के संत हंसराज के अखाड़े में पहलवानी के गुर सिखाने लेकर गए थे। गांव के ही अखाड़े में उन्होंने रवि को कुश्ती के दांवपेंच सिखाने शुरू किए। महज 10 वर्ष की आयु में ही रवि को छत्रसाल स्टेडियम भेज दिया गया था। उन्होंने वर्ष 2015 में जूनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन किया और रजत पदक जीता था। 
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घुटने की चोट के कारण 2017 में सीनियर नेशनल गेम्स में सेमीफाइनल तक पहुंचकर भी उन्हें प्रतियोगिता से बाहर होना पड़ा था। कुछ समय बाद ही फिट होकर उन्होंने दोबारा अभ्यास शुरू किया था। वर्ष 2019 में हुई विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था। टोक्यो ओलंपिक-2020 में देश को रजत पदक दिलाया था। इतना ही नहीं वह पहले भारतीय पहलवान हैं, जिन्होंने एशियन चैंपियनशिप में लगातार वर्ष 2020, 2021 व 2022 में पदक जीता है। 

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पिता के सपने को कर रहे पूरा 
रवि के पिता राकेश दहिया भी कुश्ती में देश का नाम रोशन करना चाहते थे। हालांकि आर्थिक स्थिति मजबूत न होने के कारण कुश्ती में आगे नहीं बढ़ सके थे लेकिन अपने बेटे को उन्होंने अंतरराष्ट्रीय फलक तक पहुंचा दिया है। रवि भी अपने पिता के सपने को पूरा कर रहे हैं। 

राष्ट्रमंडल में सोने के लिए बहा रहे पसीना, लेग डिफेंस पर विशेष ध्यान 
रवि दहिया ने बताया कि वह राष्ट्रमंडल में स्वर्ण पदक के लिए जमकर पसीना बहा रहे हैं। उन्हें सोने से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। वह सुबह साढ़े पांच से साढ़े आठ बजे तक और शाम को साढ़े चार से सात बजे तक अभ्यास करते हैं। प्रशिक्षक महाबली सतपाल और अरुण शर्मा के निर्देशन में वह लगातार बेहतर तकनीक पर काम कर रहे हैं। लेग डिफेंस और बैलेंस पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। लेग अटैक और स्टेमिना उनके अच्छे हथियार हैं। यह विरोधी को हराने में मददगार साबित होते हैं। उनके अभ्यास की वीडियो को देखकर प्रशिक्षक लगातार नई टिप्स दे रहे हैं। 

पाकिस्तान, कनाडा, नाइजीरिया और दक्षिण अफ्रीका के पहलवान बेहतर 
रवि दहिया कहते हैं कि राष्ट्रमंडल खेलों में पाकिस्तान, कनाडा, नाइजीरिया और दक्षिण अफ्रीका के कई पहलवान बेहतर हैं। हालांकि कड़ी मेहनत, स्टेमिना और नई तकनीक से मैं खुद को इनमें बेहतर पाता हूं। मैं सोना जीतने का ही लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा हूं। मेहनत के चलते उन्होंने अपने सभी कार्यक्रम रद्द कर रखे हैं। 

राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियों के लिए ट्यूनीशिया में हुई रैंकिंग सीरीज में भाग नहीं लिया, ताकि अभ्यास के लिए अधिक समय मिल सके। वह फिलहाल बेहतर फार्म में हैं और एशिया चैंपियनशिप में स्वर्ण, इस्तांबुल में हुई रैंकिंग सीरीज में स्वर्ण और बुल्गारिया में हुए इंटरनेशनल कप में रजत पदक जीत चुके हैं।

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