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डॉ. हरशिंदर कौर की प्रेरक कहानी: बेटियों को बचाती भी हैं और पढ़ाती भी हैं, हर महीने 415 लड़कियों की भरती हैं फीस

Tue, 08 Mar 2022 12:26 AM IST
ajay kumar रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब)
रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Tue, 08 Mar 2022 12:26 AM IST
सार

2008 में डॉ. हरशिंदर कौर ने डॉ. हर्ष चैरिटेबल ट्रस्ट की स्थापना की। ट्रस्ट की शुरुआत 20 लड़कियों को स्कूली शिक्षा देने से की गई। अब यह संख्या 415 तक पहुंच गई है। 

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प्रोफेसर डॉ. हरशिंदर कौर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सरकारी राजिंदरा अस्पताल की बाल रोग विशेषज्ञ प्रोफेसर डॉ. हरशिंदर कौर उन बेटियों का सहारा बनी हैं, जिनके सिर पर पिता का साया नहीं है। उनका डॉ. हर्ष चैरिटेबल ट्रस्ट तीन एनआईआर की मदद से 415 लड़कियों की स्कूल फीस दे रहा है। इनमें तीसरी से लेकर 12वीं और कुछ बीए कर रहीं लड़कियां शामिल हैं। इनकी फीस पर प्रत्येक महीने करीब साढ़े तीन लाख रुपये खर्च आता है।

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डॉ. हरशिंदर कौर का मानना है कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के सरकारी नारे को धरातल पर लागू करना जरूरी है। वे लोगों को बेटियों को शिक्षित करने के साथ-साथ भ्रूण हत्या न करने संबंधी जागरुक भी कर रही हैं। 
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2008 में की थी डॉ. हर्ष चैरिटेबल ट्रस्ट की स्थापना
डॉ. हरशिंदर कौर ने बताया कि 14-15 साल पहले वह पातड़ां के नजदीक एक गांव में स्वास्थ्य शिविर लगाने गईं थीं। वहां बच्ची के भ्रूण को कुत्ते नोच रहे थे। इस घटना के बाद उन्होंने फैसला लिया कि समाज में लड़कियों की दशा सुधारने के लिए काम करेंगी। 2008 में डॉ. हरशिंदर कौर ने डॉ. हर्ष चैरिटेबल ट्रस्ट की स्थापना की। ट्रस्ट की शुरुआत 20 लड़कियों को स्कूली शिक्षा देने से की गई। अब यह संख्या 415 तक पहुंच गई है। 
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डॉ. हरशिंदर को मिल चुके हैं कई अवॉर्ड
डॉ. हरशिंदर ने बताया कि समाजसेवा के क्षेत्र में काम के लिए उन्हें दो बार पंजाब सरकार की ओर से स्टेट अवार्ड मिला है। इसके साथ ही पार्लियामेंट ऑफ कनाडा, कैलिफोर्निया, ऑस्ट्रेलिया व न्यू साउथ वेल्स की पार्लियामेंट में भी लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड मिल चुका है। उन्हें यूनाइटेड नेशन की ओर से 2012 में वुमन ऑफ द ईयर और इंटरनेशनल वुमन राइट्स एक्टिविस्ट के तौर पर सम्मानित किया गया था।

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