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मनोहर सरकार के नौ साल पूरे: पढ़ें- वो नौ बड़े विवाद, जिन्हें विपक्ष ने खूब बनाया मुद्दा, सरकार हुई असहज

Thu, 26 Oct 2023 08:14 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Thu, 26 Oct 2023 08:14 PM IST
सार

हरियाणा के कर्मचारी संगठन ओल्ड पेंशन (ओपीएस) की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रदेश सरकार ओपीएस लागू करने से पीछे हट गई है। कर्मचारी संगठनों के दबाव सरकार में सरकार ने ओपीएस के मुद्दे पर रिपोर्ट देने के लिए एक कमेटी का गठन तो कर दिया है लेकिन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार ओपीएस लागू नहीं करेगी।

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Read nine big controversies on completion of nine years of BJP government in  Haryana
हरियाणा के सीएम मनोहर लाल। - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

विस्तार

मनोहर सरकार को नौ साल के सफर में कई विवादों का भी सामना करना पड़ा। विपक्ष ने भी इन विवादों को मुद्दा बनाया और सरकार पर तीखे हमले किए। विपक्ष ने सरकार की मंशा और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। इन विवादों के कारण कई बार सरकार को असहज स्थिति का भी सामना करना पड़ा। एक नजर नौ बड़े विवादों पर...

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जाट आंदोलन: अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का दर्जा देने के लिए जाट समुदाय के लोगों ने फरवरी 2016 में आंदोलन शुरू किया। उत्तर भारत के राज्यों में चले आंदोलन ने हरियाणा में हिंसक रूप ले लिया था। आंदोलन के अंतिम पांच दिनों में राज्य के आठ जिले आगजनी, लूटपाट, तोड़फोड़ और हिंसा का शिकार हुए थे। इस दौरान 16 लोगों की मौत हुई थी।
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किसान आंदोलनः तीन कृषि कानून के विरोध में दिल्ली का घेराव करने आए किसानों ने हरियाणा में डेरा डाल दिया और इस तरह हरियाणा इस आंदोलन का केंद्र बन गया था। कुंडली और टीकरी बॉर्डर पर बैठे किसान नेता पूरे आंदोलन की रूपरेखा बनाते थे। पांच नवंबर, 2020 को शुरू हुआ आंदोलन 378 दिन तक चला।
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मंत्री संदीप सिंह यौन उत्पीड़न प्रकरण: जूनियर महिला कोच ने पंचकूला से तबादला किए जाने पर दिसंबर 2022 में तत्कालीन खेल मंत्री संदीप सिंह पर यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाया। विपक्ष ने सड़क से लेकर सदन तक इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश की। आखिरकार संदीप सिंह से खेल विभाग वापस ले लिया गया।

बॉन्ड पॉलिसी: सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले एमबीबीएस छात्रों के लिए सरकार साल 2022 में बॉन्ड पॉलिसी लाई। इस नीति के तहत मेडिकल छात्रों को सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में सात साल तक काम करना होगा। काम नहीं करने पर 36.40 लाख रुपये जुर्माना देना होगा। मेडिकल छात्रों ने 54 दिनों आंदोलन चला इसका विरोध किया। बाद में सरकार में नीति में संशोधन किया।

योजनाओं में खामी: लोगों की सुविधाओं, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर लगाम के इरादे से सरकार परिवार पहचान पत्र (पीपीपी), प्रॉपर्टी टैक्स, ई-टेंडरिंग जैसी योजनाएं लाई लेकिन कर्मचारियों व निजी एजेंसी की लापरवाही से पीपीपी व प्रॉपर्टी टैक्स में काफी खामियां रह गईं। इससे लोगों को परेशान और उनके आक्रोश का सामना सरकार को करना पड़ा। ई-टेंडरिंग का सरपंचों ने विरोध किया।

सुनपेड़ कांड: फरीदाबाद के सुनपेड़ गांव में पांच अक्तूबर 2014 को राजपूत समाज के तीन युवकों की हत्या कर दी गई और इसका आरोप अनुसूचित जाति के जितेंद्र के परिवार पर लगा। 19 अक्तूबर 2015 की रात जितेंद्र के कमरे में आग लग गई। इस घटना में उनकी 11 माह की बेटी दिव्या और चार साल के बेटे वैभव की मौत हो गई। पत्नी रेखा और जितेंद्र भी झुलस गए थे। इस घटना के बाद अनुसूचित जाति उत्पीड़न को लेकर हंगामा खड़ा हो गया। सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी। सीबीआई ने तीन साल की जांच के बाद राजपूत समाज के सभी आरोपियों को क्लीनचिट दे दी।

शराब घोटाला: सोनीपत के खरखौदा में हरियाणा सरकार द्वारा पकड़ी गई शराब को एक गोदाम में रखा गया था। जिस गोदाम में शराब रखी गई थी, उसके मालिक ने शराब चोरी करवाई और कोरोना काल में लॉक डाउन के दौरान अवैध रूप से करोड़ों रुपये की विदेशी शराब बेच डाली। शराब घोटाला सामने आने के बाद गृह मंत्री अनिल विज के आदेश पर होम सेक्रेट्री विजय वर्धन ने पूरे राज्य में जांच के लिए सीनियर आईएएस टीसी गुप्ता की अध्यक्षता में विशेष जांच दल गठित किया था। इस मुद्दे पर विपक्ष ने सदन में सरकार को घेरा था।

ओपीएस: हरियाणा के कर्मचारी संगठन ओल्ड पेंशन (ओपीएस) की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रदेश सरकार ओपीएस लागू करने से पीछे हट गई है। कर्मचारी संगठनों के दबाव सरकार में सरकार ने ओपीएस के मुद्दे पर रिपोर्ट देने के लिए एक कमेटी का गठन तो कर दिया है लेकिन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार ओपीएस लागू नहीं करेगी।

नूंह हिंसा: गत 31 जुलाई को बजरंग दल की शोभायात्रा पर नूंह में कुछ उपद्रवियों ने हमला कर दिया। इस बवाल ने सांप्रदायिक रूप ले लिया और उपद्रव में हजारों लोग फंस गए। हमले में घायल छह लोगों की मौत हो गई। इसके बाद कई दिनों तक कर्फ्यू लगा रहा। इंटरनेट और एसएमएस सेवाएं बंद कर दी गईं। पुलिस अब तक सौ से अधिक लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।

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