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नवजोत सिद्धू के इस्तीफे पर सियासत गरमाई, प्रतिक्रिया आई- बेइज्जत हो रहे थे, अच्छा किया पद छोड़कर
Mon, 15 Jul 2019 11:29 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 15 Jul 2019 11:29 AM IST
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नवजोत सिद्धू
- फोटो : फाइल फोटो
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कैबिनेट मंत्री के पद से नवजोत सिद्धू के इस्तीफे को लेकर राजनीति गरमा गई है। हर कोई इस्तीफे पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहा है। केंद्रीय राज्य मंत्री सोमप्रकाश ने कहा कि नवजोत सिद्धू कांग्रेस में रहकर बेइज्जत हो रहे थे, अच्छा किया कि अपने पद से इस्तीफा दे दिया। केंद्रीय मंत्री लुधियाना में चेंबर ऑफ इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल अंडरटेकिंग (सीआईसीयू) के समारोह में शिरकत करने पहुंचे थे।
उन्होंने कहा कि कई दिन से सिद्धू राहुल से मिलने के लिए दिल्ली में डेरा जमा कर बैठे थे, लेकिन उन्हें किसी ने भी मिलने का मौका ही नहीं दिया। दिग्गज राजनेता के साथ ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए। अभी तक राजनीतिक के इतिहास में उन्होंने पहली बार सुना है कि किसी मंत्री का पोर्टफोलियो बदला गया हो और उस मंत्री ने अपने नए विभाग में पदग्रहण ही नहीं किया हो।
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उन्होंने कहा कि कई दिन से सिद्धू राहुल से मिलने के लिए दिल्ली में डेरा जमा कर बैठे थे, लेकिन उन्हें किसी ने भी मिलने का मौका ही नहीं दिया। दिग्गज राजनेता के साथ ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए। अभी तक राजनीतिक के इतिहास में उन्होंने पहली बार सुना है कि किसी मंत्री का पोर्टफोलियो बदला गया हो और उस मंत्री ने अपने नए विभाग में पदग्रहण ही नहीं किया हो।
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सिद्धू को डेकोरम का पालन करना चाहिए था
नवजोत सिंह सिद्धू के सहयोगी रहे कैबिनेट मंत्री ब्रह्म मोहिंदरा और चरनजीत सिंह चन्नी ने भी नवजोत सिद्धू के इस्तीफे का मजाक उड़ाया है। उन्होंने इसे ड्रामा बताते हुए कहा कि सिद्धू को डेकोरम का पालन करना चाहिए था। दोनों मंत्रियों ने कहा कि यह सब एक ड्रामा है। अगर सिद्धू को इस्तीफा देना ही था तो प्रोटोकॉल के मुताबिक सीधा सीएम को भेजना चाहिए था।
क्या सिद्धू को यह भी नहीं पता है कि कैबिनेट मंत्री का पद पार्टी का पद नहीं है और उनका इस्तीफा पार्टी प्रधान स्वीकार नहीं कर सकते। सिद्धू ने अपना कथित इस्तीफा दस जून को कांग्रेस प्रधान को भेजा था तो उन्हें इसकी घोषणा करने में 34 दिन कैसे लग गए। फिर इस्तीफा देने के लिए ट्विटर कब से प्लेटफार्म बन गया।
मंत्रियों ने कहा कि सिद्धू के चलते बिजली विभाग को लेकर 40 दिन तक असमंजस की स्थिति रही, क्योंकि उन्होंने कार्यभार नहीं संभाला। उन्होंने यह भी नहीं समझा कि यह समय पावर सेक्टर के लिए अहम है, क्योंकि धान की रोपाई में बिजली की प्रमुख भूमिका है। इससे साफ है कि सिद्धू को परवाह नहीं है कि उनके कार्यों का क्या बुरा प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने सिद्धू को सलाह दी कि भविष्य में कोई कदम उठाने से पहले यह जरूर सोच लें कि उसका प्रभाव क्या होगा। सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि राज्य, लोगों और पार्टी के लिए सोचें, जिसने उन्हें बहुत कुछ दिया है।
क्या सिद्धू को यह भी नहीं पता है कि कैबिनेट मंत्री का पद पार्टी का पद नहीं है और उनका इस्तीफा पार्टी प्रधान स्वीकार नहीं कर सकते। सिद्धू ने अपना कथित इस्तीफा दस जून को कांग्रेस प्रधान को भेजा था तो उन्हें इसकी घोषणा करने में 34 दिन कैसे लग गए। फिर इस्तीफा देने के लिए ट्विटर कब से प्लेटफार्म बन गया।
मंत्रियों ने कहा कि सिद्धू के चलते बिजली विभाग को लेकर 40 दिन तक असमंजस की स्थिति रही, क्योंकि उन्होंने कार्यभार नहीं संभाला। उन्होंने यह भी नहीं समझा कि यह समय पावर सेक्टर के लिए अहम है, क्योंकि धान की रोपाई में बिजली की प्रमुख भूमिका है। इससे साफ है कि सिद्धू को परवाह नहीं है कि उनके कार्यों का क्या बुरा प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने सिद्धू को सलाह दी कि भविष्य में कोई कदम उठाने से पहले यह जरूर सोच लें कि उसका प्रभाव क्या होगा। सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि राज्य, लोगों और पार्टी के लिए सोचें, जिसने उन्हें बहुत कुछ दिया है।
राहुल को हार से भागना नहीं चाहिए
नरेंद्र मोदी सरकार में सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में राहुल को अपनी जिम्मेदारियों से भागना नहीं चाहिए। चुनावों में जीत और हार तो होती रहती है। इसमें किसी न किसी की तो जिम्मेदारी बनती है। लेकिन राहुल कांग्रेस की हार से भाग रहे हैं। अठावले रविवार को यूटी गेस्ट हाउस में आयोजित एक कार्यक्रम में पहुंचे थे। उन्होंने कहा पीएम मोदी के नेतृत्व में देश का विकास तेजी से हो रहा है। इसे आम जनता महसूस कर रही है।
सिद्धू ने कांग्रेस में जाकर गलती की
पंजाब में कांग्रेस नेता नवजोत सिद्धू के सवाल पर अठावले ने कहा कि अगर सिद्धू बीजेपी में रहते तो लोकसभा चुनाव जीत जाते और अब केंद्र सरकार में मंत्री होते। लेकिन उन्होंने कांग्रेस में जाकर बड़ी गलती की। आखिरकार उन्हें कैप्टन अमरिंदर सरकार से इस्तीफा देना पड़ा है।
राहुल को इस्तीफा भेजना नाटक - अमन
आप विधायक अमन अरोड़ा ने कहा है कि बिजली मंत्रालय का कार्यभार न संभाल कर सिद्धू अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं। उन्होंने सिद्धू के राहुल गांधी को इस्तीफा भेजने पर हैरानी जताई। अमन ने कहा कि इस्तीफा स्वीकार करने का अधिकार सीएम या राज्यपाल केपास ही है। ऐसे में यह इस्तीफा एक सियासी नाटक है।
जिस राहुल गांधी को नवजोत सिद्धू ने इस्तीफा भेजा है, उसने खुद इस्तीफा दिया हुआ है। नवजोत सिद्धू और राहुल गांधी केनाटक तक तो ठीक है, लेकिन वह पंजाब की जनता का पैसा व समय बर्बाद कर विकास रोक रहे हैं।
- विजय सांपला, पूर्व प्रदेश भाजपा प्रधान
कांग्रेस से भी इस्तीफा दें सिद्धू - चीमा
नेता प्रतिपक्ष हरपाल चीमा ने कहा है कि नवजोत सिद्धू को अब कांग्रेस में रहने का कोई हक नहीं है, उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। सिद्धू का साफ-सुथरा अक्स और बादलों के खिलाफ बेबाक बोल सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह को रास नहीं आ रहे थे। आखिर सिद्धू को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया गया। सिद्धू ही नहीं, साफ छवि वाले सभी लोगों का आप में स्वागत है।
सिद्धू ने कांग्रेस में जाकर गलती की
पंजाब में कांग्रेस नेता नवजोत सिद्धू के सवाल पर अठावले ने कहा कि अगर सिद्धू बीजेपी में रहते तो लोकसभा चुनाव जीत जाते और अब केंद्र सरकार में मंत्री होते। लेकिन उन्होंने कांग्रेस में जाकर बड़ी गलती की। आखिरकार उन्हें कैप्टन अमरिंदर सरकार से इस्तीफा देना पड़ा है।
राहुल को इस्तीफा भेजना नाटक - अमन
आप विधायक अमन अरोड़ा ने कहा है कि बिजली मंत्रालय का कार्यभार न संभाल कर सिद्धू अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं। उन्होंने सिद्धू के राहुल गांधी को इस्तीफा भेजने पर हैरानी जताई। अमन ने कहा कि इस्तीफा स्वीकार करने का अधिकार सीएम या राज्यपाल केपास ही है। ऐसे में यह इस्तीफा एक सियासी नाटक है।
जिस राहुल गांधी को नवजोत सिद्धू ने इस्तीफा भेजा है, उसने खुद इस्तीफा दिया हुआ है। नवजोत सिद्धू और राहुल गांधी केनाटक तक तो ठीक है, लेकिन वह पंजाब की जनता का पैसा व समय बर्बाद कर विकास रोक रहे हैं।
- विजय सांपला, पूर्व प्रदेश भाजपा प्रधान
कांग्रेस से भी इस्तीफा दें सिद्धू - चीमा
नेता प्रतिपक्ष हरपाल चीमा ने कहा है कि नवजोत सिद्धू को अब कांग्रेस में रहने का कोई हक नहीं है, उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। सिद्धू का साफ-सुथरा अक्स और बादलों के खिलाफ बेबाक बोल सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह को रास नहीं आ रहे थे। आखिर सिद्धू को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया गया। सिद्धू ही नहीं, साफ छवि वाले सभी लोगों का आप में स्वागत है।