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रावी-ब्यास का पानी न जाए पाकिस्तान, हरियाणा ने पंजाब पर बढ़ाया दबाव...लिखा लेटर

Mon, 07 May 2018 11:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 07 May 2018 11:07 AM IST
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ravi beas river water dispute in punjab, haryana
पंजाब बनाम हरियाणा
हरियाणा और पंजाब के बीच एसवाईएल विवाद थमा नहीं कि अब रावी ब्यास लिंक बैराज-2 को लेकर भी विवाद कभी भी छिड़ सकता है। हरियाणा ने पंजाब पर पाकिस्तान जा रहे रावी और ब्यास के पानी को रोकने के लिए दबाव बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अपने समकक्ष मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह को पत्र लिखकर पाकिस्तान जा रहे दोनों नदियों के पानी को रोकने और रावी ब्यास लिंक बैराज-2 की कार्ययोजना बनाने का सुझाव दिया है।
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विदेश दौरे पर जाने से पहले पत्रकारों से बातचीत में सीएम मनोहर लाल ने कहा कि रावी से देश के हिस्से का पानी बहकर पाकिस्तान जा रहा है, उसका सदुपयोग होना चाहिए। हरियाणा, पंजाब व अन्य राज्य पानी का संकट झेल रहे हैं। देश की विभिन्न नदियों का भारत के हिस्से का पानी पाकिस्तान में चला जाता है, उस पानी को रोकने का प्रयास करना होगा। उम्म्मीद है कि विदेश दौरे से लौटने तक पंजाब के मुख्यमंत्री से पत्र का जवाब आ जाएगा।
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उन्होंने अपनी तरफ से पहल कर दी है, अब पंजाब को आगे बढ़ना है। अगर सहयोग नहीं मिलता है तो केंद्र से इसमें हस्तक्षेप करने को कहा जाएगा, उसके बावजूद बात न बनने का कोर्ट के रास्ते भी खुले हैं। समय-समय पर काल और परिस्थितियां बदल जाती है और आज के दिन पानी सभी की जरूरत है।
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हरियाणा-पंजाब में गंभीर जल संकट
मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा है कि हरियाणा व पंजाब के कई खंडों में पानी का स्तर गिर रहा है। इस कारण से कृषि के क्षेत्र में लगे मेहनतकश किसानों को दिक्कत हो रही है। अब समय आ गया है कि दोनों राज्यों को परस्पर सहयोग कर रावी के व्यर्थ में बहकर पाकिस्तान जाने वाले पानी को रोकना होगा। इस संबंध में 23 अप्रैल 2012 को नई दिल्ली में केंद्र जल आयोग की बैठक हुई थी, जिसमें सतत आधार पर 0.58 एमएएफ के समान न्यूनतम प्रयोगिक पानी का आंकलन किया गया था।

इस बैठक में धर्मकोट से हरिके हैड तक 2.0 से 2.5 मीटर ऊंचा बांध तैयार करने का निर्णय लिया गया। इस पर केंद्र सरकार ने सभी संबधित राज्यों को भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड को इस परियोजना की व्यवहार्रता के अध्ययन की संभावना के लिए लगाया और पंजाब सरकार ने इस बैठक में लिए गए निर्णय पर कार्रवाई शुरू की, लेकिन फिर भी अब तक कोई प्रगति नजर नहीं आ रही। अभी भी यह पानी पाकिस्तान में जा रहा है। इसलिए देश के कीमती पानी को तुरंत रोका जाना चाहिए।

उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि इस कार्य के लिए अपने राज्य के सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देश दें। हरियाणा के सिंचाई विभाग के प्रधान सचिव व मुख्य सचिव को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस बारे में एक बैठक करेंगे ताकि इस प्रस्ताव को क्रियान्वित किया जा सके। केंद्र सरकार पहले ही राष्ट्रीय परियोजना घोषित कर चुकी है। रावी-ब्यास बैराज लिंक-2 से हरियाणा-पंजाब में पानी की स्थिति बेहतर हो सकती है।


मिलेगा 1112 क्यूसिक पानी
पाकिस्तान जा रहे पानी को अगर बांध के जरिए रोकने की योजना सफल रही तो 1112 क्यूसिक यानि 5 लाख 60 हजार एकड़ फीट पानी मिलेगा। बंटवारे के समय भारत को सतलुज, रावी और ब्यास नदियां मिली थी, वहीं पाकिस्तान को सिंधु, झेलम और चिनाब। इसके बाद भी भारतीय नदियों का पानी पाकिस्तान जा रहा है। बता दें कि पाकिस्तान जा रहे पानी को रोककर रावी ब्यास बैराज लिंक-2 को बनाने की घोषणा केंद्रीय जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी ने बीते अप्रैल में रोहतक में हुए एग्री समिट के दौरान की थी। उसके बाद हरियाणा सरकार सक्रिय हुई है।
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