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क्या पुनर्वास के लिए मुआवजे के हकदार हैं रेप पीड़िता और आश्रित: हाईकोर्ट
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 23 Mar 2017 01:56 PM IST
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कोर्ट
- फोटो : Pintrest
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अपने हक और न्याय के लिए रेप पीड़िता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो अपील स्वीकार करते हुए जज ने अहम सवाल खड़ा किया। रेप पीड़ित को मुआवजा देने के लिए तो पॉलिसी है परंतु यदि उसे घर से निकाल दिया जाए और रेप के चलते पैदा हुआ बच्चा गोद में हो तो क्या वह पुनर्वास के लिए मुआवजे की हकदार है?
यह अहम सवाल उठाते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक रेप पीड़िता की अपील को एडमिट करते हुए दो साल के भीतर इस पर सुनवाई करने का फैसला लिया है। इसी बीच अंतरिम तौर पर उसे दो लाख की राहत राशि मंजूर की है और इसका भुगतान यूटी व पंजाब की लीगल सर्विस अथॉरिटी को करना होगा।
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यह अहम सवाल उठाते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक रेप पीड़िता की अपील को एडमिट करते हुए दो साल के भीतर इस पर सुनवाई करने का फैसला लिया है। इसी बीच अंतरिम तौर पर उसे दो लाख की राहत राशि मंजूर की है और इसका भुगतान यूटी व पंजाब की लीगल सर्विस अथॉरिटी को करना होगा।
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मामला पंजाब से जुड़ा है
मामला पंजाब के एक जिले की मासूम लड़की से जुड़ा है जिसके साथ एमएमएस बनाकर बार-बार रेप किया गया। इस लड़की को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। इस बीच जब वह प्रेग्नेंट हो गई तो बच्चे को गिराने का प्रेशर डाला गया। लेकिन उसने ऐसा नहीं किया तथा किसी और शहर चली गई। इसके बीच आय का कोई साधन न होने के चलते वापस अपने शहर लौट आई।
इसी बीच बच्चे को जन्म दिया और इस छोटी सी बेटी के साथ आगे की जिंदगी बिताने का फैसला लिया। पीड़िता के घरवालों ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया तो चंडीगढ़ में आकर शरण ली। इस दौरान बच्ची को अवैध हिरासत में रखा गया जिसके चलते मां ने हाईकोर्ट की शरण ली और फिर अदालत के दखल से बच्ची वापस मिली।
इस दौरान हाईकोर्ट के आदेशों पर ही याची को सुरक्षा मुहैया करवाई गई और हाईकोर्ट के आदेशों पर ही मामला दर्ज हुआ। पंजाब में जांच सही न होते देख जांच चंडीगढ़ पुलिस की एसआईटी को सौंप दी गई। इसी बीच उन्हें वकील के रूप में एडवोकेट अनिल मल्होत्रा लीगल सर्विस अथॉरिटी द्वारा मुहैया करवाए गए।
इसी बीच बच्चे को जन्म दिया और इस छोटी सी बेटी के साथ आगे की जिंदगी बिताने का फैसला लिया। पीड़िता के घरवालों ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया तो चंडीगढ़ में आकर शरण ली। इस दौरान बच्ची को अवैध हिरासत में रखा गया जिसके चलते मां ने हाईकोर्ट की शरण ली और फिर अदालत के दखल से बच्ची वापस मिली।
इस दौरान हाईकोर्ट के आदेशों पर ही याची को सुरक्षा मुहैया करवाई गई और हाईकोर्ट के आदेशों पर ही मामला दर्ज हुआ। पंजाब में जांच सही न होते देख जांच चंडीगढ़ पुलिस की एसआईटी को सौंप दी गई। इसी बीच उन्हें वकील के रूप में एडवोकेट अनिल मल्होत्रा लीगल सर्विस अथॉरिटी द्वारा मुहैया करवाए गए।
प्रशासन ने नौकरी देने से किया इनकार
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : File Photo
हाईकोर्ट ने प्रशासन से पीड़िता को नौकरी और रिहाइश के लिए स्थान देने को कहा। प्रशासन ने सरकारी नौकरी के लिए जगह होने से इनकार कर दिया। इसी बीच अब बच्ची के पालन पोषण में आ रही समस्याओं के चलते पीड़िता ने पुनर्वास मुआवजे की अपील की। हाईकोर्ट ने इसपर कोई स्पष्ट स्थिति न होने केचलते की पुनर्वास के लिए रेप विक्टिम व उसकी आश्रित हकदार हैं या नहीं इस याचिका को एडमिट कर लिया।
पीड़िता की तत्काल स्थिति के चलते उसे राहत देने का निर्णय लेते हुए उसे 2 लाख मुआवजा देने के आदेश दिए। मुआवजा राशि चंडीगढ़ दे या पंजाब इसे तय नहीं किया जा सका तो हाईकोर्ट ने दोनों की लीगल सर्विस अथॉरिटी को एक-एक लाख रुपये पीड़िता को उपलब्ध करवाने के आदेश जारी कर दिए। हाईकोर्ट द्वारा एडमिट की गई इस याचिका पर आने वाले आदेश बेहद अहम होंगे।
इस याचिका पर आने वाले आदेशों पर निर्भर करेगा की पीड़िता और उसके आश्रितों को मुआवजा राशि के अतिरिक्त क्या आश्रित होने की स्थिति में पुनर्वास के लिए भी राशि मुहैया करवाई जा सकती है या नहीं।
पीड़िता की तत्काल स्थिति के चलते उसे राहत देने का निर्णय लेते हुए उसे 2 लाख मुआवजा देने के आदेश दिए। मुआवजा राशि चंडीगढ़ दे या पंजाब इसे तय नहीं किया जा सका तो हाईकोर्ट ने दोनों की लीगल सर्विस अथॉरिटी को एक-एक लाख रुपये पीड़िता को उपलब्ध करवाने के आदेश जारी कर दिए। हाईकोर्ट द्वारा एडमिट की गई इस याचिका पर आने वाले आदेश बेहद अहम होंगे।
इस याचिका पर आने वाले आदेशों पर निर्भर करेगा की पीड़िता और उसके आश्रितों को मुआवजा राशि के अतिरिक्त क्या आश्रित होने की स्थिति में पुनर्वास के लिए भी राशि मुहैया करवाई जा सकती है या नहीं।