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...और भगवान बनते-बनते रह गए डेरामुखी, राम रहीम का एक और सच पढ़िए
मोहित धुपड़/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 11 Sep 2017 09:09 AM IST
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राम रहीम
- फोटो : social media
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शायद ही कोई जानता हो कि डेरामुखी भगवान बनते बनते रह गए थे। जानिए राम रहीम का एक ऐसा सच, जो अब खुलकर दुनिया के सामने आया है। दरअसल, खुद को एमएसजी (मैसेंजर ऑफ गॉड) बताने वाले रेप के दोषी डेरामुखी गुरमीत सिंह अपनी आत्मकथा लिख रहा था।
इस आत्मकथा के जरिए वह अपने अनुयायियों में सचमुच एमएसजी साबित करने की चाह रखता था। इस दौरान डेरामुखी को बिल्कुल इल्म नहीं था कि कभी उसे विवादित मामलों में सजा भी हो सकती है, लेकिन 28 अगस्त को सीबीआई कोर्ट से 20 साल की सजा होने के बाद न केवल डेरामुखी की आत्मकथा अधूरी रह गई, बल्कि इसके जरिएसदा-सदा के लिए भगवान बनने का सपना भी टूट गया।
इसका खुलासा इस प्रकरण के बाद डेरा छोड़ चुके एक बेहद खास डेरा अनुयायी ने किया है। उसने बताया कि डेरामुखी ने यह बात अपने एक इंटरव्यू में भी कबूली थी कि अपनी बायोग्राफी लिख रहा है। इस बायोग्राफी में डेरामुखी ने अध्यात्म से अपने लगाव और डेरे की गद्दी संभालने के बाद खुद के साथ हुए चमत्कारों का भी जिक्र करना था ताकि भक्तों के बीच उनकी एक अलग इमेज क्रिएट हो सके।
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इस आत्मकथा के जरिए वह अपने अनुयायियों में सचमुच एमएसजी साबित करने की चाह रखता था। इस दौरान डेरामुखी को बिल्कुल इल्म नहीं था कि कभी उसे विवादित मामलों में सजा भी हो सकती है, लेकिन 28 अगस्त को सीबीआई कोर्ट से 20 साल की सजा होने के बाद न केवल डेरामुखी की आत्मकथा अधूरी रह गई, बल्कि इसके जरिएसदा-सदा के लिए भगवान बनने का सपना भी टूट गया।
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इसका खुलासा इस प्रकरण के बाद डेरा छोड़ चुके एक बेहद खास डेरा अनुयायी ने किया है। उसने बताया कि डेरामुखी ने यह बात अपने एक इंटरव्यू में भी कबूली थी कि अपनी बायोग्राफी लिख रहा है। इस बायोग्राफी में डेरामुखी ने अध्यात्म से अपने लगाव और डेरे की गद्दी संभालने के बाद खुद के साथ हुए चमत्कारों का भी जिक्र करना था ताकि भक्तों के बीच उनकी एक अलग इमेज क्रिएट हो सके।
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इंटरव्यू में राम रहीम ने ये सब भी बताया था
Ram Rahim
संबंधित इंटरव्यू में डेरामुखी ने बताया था कि वह राजस्थान के एक बड़े घराने से है और काफी लोग उसके पास आते और कहते थे कि वह एमएलए या एमपी के चुनाव में खड़ा हो जाए, लेकिन उसने साफ मना कर दिया था।
क्योंकि उसका लगाव तो अध्यात्म की ओर था, इसलिए उन्होंने शाह सतनाम के समय डेरा ज्वाइन कर लिया और फिर 1990 में डेरे की गद्दी सौंप दी गई। वह धीरे-धीरे ईश्वर के नजदीक जाता गया और अब वह यहां धरती पर ईश्वर के दूत यानी मैसेंजर ऑफ गॉड बन गया।
करीबी डेरा अनुयायी के अनुसार डेरामुखी की आत्मकथा डेरा अनुयायियों के लिए एक पाक ग्रंथ बन जाती और डेरामुखी हमेशा के लिए उनके भगवान। उनके अनुसार इस बायोग्राफी की शुरुआत हो चुकी थी, लेकिन उनका प्रोजेक्ट कहां तक पहुंचा था, इस बारे में वह नहीं जानता।
क्योंकि उसका लगाव तो अध्यात्म की ओर था, इसलिए उन्होंने शाह सतनाम के समय डेरा ज्वाइन कर लिया और फिर 1990 में डेरे की गद्दी सौंप दी गई। वह धीरे-धीरे ईश्वर के नजदीक जाता गया और अब वह यहां धरती पर ईश्वर के दूत यानी मैसेंजर ऑफ गॉड बन गया।
करीबी डेरा अनुयायी के अनुसार डेरामुखी की आत्मकथा डेरा अनुयायियों के लिए एक पाक ग्रंथ बन जाती और डेरामुखी हमेशा के लिए उनके भगवान। उनके अनुसार इस बायोग्राफी की शुरुआत हो चुकी थी, लेकिन उनका प्रोजेक्ट कहां तक पहुंचा था, इस बारे में वह नहीं जानता।
गुरु गोबिंद सिंह जैसी पोशाक पहन भी विवाद में फंसे थे
Ram Rahim
खुद को ईश्वर साबित करने की चाह डेरामुखी की काफी पुरानी है। इसी चक्कर में एक बड़ा विवाद बठिंडा के सलाबतपुरा गांव में डेरामुखी केसत्संग के दौरान खड़ा हो गया था। इस सत्संग में डेरामुखी ने दशम गुरु गुरु गोबिंद सिंह जैसी कथित पोशाक पहनकर रूहानी जाम भक्तों में बांटा था, जिसके बाद जबरदस्त बवाल हुआ।
डेरामुखी के खिलाफ केस दर्ज हुआ। अकाल तख्त ने डेरामुखी को तलब भी किया, लेकिन बाद में डेरामुखी ने माफी मांगते हुए यह कहा था कि इस पोशाक पहने केपीछे उनकी मंशा खुद को गुरुगोबिंद सिंह जी के समकक्ष खड़ा होने की नहीं थी।
डेरामुखी के खिलाफ केस दर्ज हुआ। अकाल तख्त ने डेरामुखी को तलब भी किया, लेकिन बाद में डेरामुखी ने माफी मांगते हुए यह कहा था कि इस पोशाक पहने केपीछे उनकी मंशा खुद को गुरुगोबिंद सिंह जी के समकक्ष खड़ा होने की नहीं थी।