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चेतन भगत के नावेल रेवोल्यूशन 2020 पर फिल्म
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 10 Nov 2013 09:12 AM IST
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आमिर, नो वन किल्ड जेसिका और घनचक्कर जैसी हिट फिल्में बना चुके मशहूर फिल्म मेकर और स्क्रिप्ट राइटर राजकुमार गुप्ता अब नावेल पर आधारित फिल्म बनाने जा रहे हैं।
वे अंग्रेजी के मशहूर लेखक चेतन भगत के नावेल रेवोल्यूशन 2020 पर फिल्म बना रहे हैं। इन दिनों वह इसी प्रोजेक्ट में व्यस्त हैं। वे शनिवार को चंडीगढ़ लिटरेचर फेस्ट के लिए शहर आए हुए थे।
गुप्ता के मुताबिक उन्हें ये नावेल और इसके तथ्य बेहद पसंद हैं और इसीलिए उन्होंने इसे फिल्म का रूप देने के बारे में सोचा।
उन्होंने कहा कि एक किताब को ढाई-तीन घंटे की फिल्म में कनवर्ट करने के लिए बहुत चालाकी से काम करना पड़ता है। यह इस तरह का उनका पहला एक्सपीरियंस होगा जिसके लिए वे काफी उत्साहित हैं।
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जिनके सपने पूरे नहीं होते, मैं उनकी कहानी लिखता हूं
हिंदी के मशहूर लेखक और अनुवादक प्रभात रंजन भी चंडीगढ़ लिटरेचर फेस्ट में मौजूद थे। रंजन का कहना है कि आज की युवा पीढ़ी के सपने तो बहुत होते हैं, लेकिन बहुत कम ही अपने सपनों को सच कर पाते हैं।
रंजन के मुताबिक वे ऐसे ही तथ्यों को अपनी रचना में शामिल करते हैं। इस समय वे बदनाम बस्ती के किस्से शीर्षक से किताब लिख रहे हैं। रंजन का कहना है कि आज के दौर में लेखन शैली में बहुत परिवर्तन आ चुका है। आज लेखक प्रसिद्धि हासिल कर रहे हैं लेकिन लेखन कला को पहचान नहीं मिल रही है।
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वे अंग्रेजी के मशहूर लेखक चेतन भगत के नावेल रेवोल्यूशन 2020 पर फिल्म बना रहे हैं। इन दिनों वह इसी प्रोजेक्ट में व्यस्त हैं। वे शनिवार को चंडीगढ़ लिटरेचर फेस्ट के लिए शहर आए हुए थे।
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गुप्ता के मुताबिक उन्हें ये नावेल और इसके तथ्य बेहद पसंद हैं और इसीलिए उन्होंने इसे फिल्म का रूप देने के बारे में सोचा।
उन्होंने कहा कि एक किताब को ढाई-तीन घंटे की फिल्म में कनवर्ट करने के लिए बहुत चालाकी से काम करना पड़ता है। यह इस तरह का उनका पहला एक्सपीरियंस होगा जिसके लिए वे काफी उत्साहित हैं।
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जिनके सपने पूरे नहीं होते, मैं उनकी कहानी लिखता हूं
हिंदी के मशहूर लेखक और अनुवादक प्रभात रंजन भी चंडीगढ़ लिटरेचर फेस्ट में मौजूद थे। रंजन का कहना है कि आज की युवा पीढ़ी के सपने तो बहुत होते हैं, लेकिन बहुत कम ही अपने सपनों को सच कर पाते हैं।
रंजन के मुताबिक वे ऐसे ही तथ्यों को अपनी रचना में शामिल करते हैं। इस समय वे बदनाम बस्ती के किस्से शीर्षक से किताब लिख रहे हैं। रंजन का कहना है कि आज के दौर में लेखन शैली में बहुत परिवर्तन आ चुका है। आज लेखक प्रसिद्धि हासिल कर रहे हैं लेकिन लेखन कला को पहचान नहीं मिल रही है।