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टैक्स चोरी करने वाले सावधान रहें, रेलवे ने बनाई नई पॉलिसी

Sun, 13 Sep 2015 05:58 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 13 Sep 2015 05:58 PM IST
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railway new policy for Tax thief and lease mafia

टैक्स चोरी करने वाले लीज माफिया पर चंडीगढ़ रेल प्रशासन ने शिकंजा कसने के फैसला किया है। इसके लिए रेल अधिकारी जल्द पार्सल बुकिंग केंद्र में आईडी प्रूफ सिस्टम लागू करने जा रहे हैं।

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सिस्टम के तहत स्टेशन से बाहर भेजने और आने वाले पार्सल को छुड़ाने के लिए संबंधित व्यक्ति को आईडी प्रूफ दिखाना होगा। अगर पार्सल पर लिखे नाम और पते से आईडी प्रूफ का मिलान नहीं होगा तो बुकिंग केंद्र के अधिकारी पार्सल को हैंडओवर नहीं करेंगे। अधिकारियों ने बताया कि इस सिस्टम को अगस्त माह में लागू कर दिया जाएगा।
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गायब नहीं होगा पार्सल: आईडी प्रूफ सिस्टम लागू न होने से रेलवे के पास लगातार पार्सल गायब होने की शिकायतें आ रही थी। शिकायतों से बचने और पार्सल को गायब होने से बचाने के लिए आईडी प्रूफ सिस्टम लागू किया जा रहा है। यह सिस्टम दिल्ली और लखनऊ स्टेशन पर पहले से लागू है।
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स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि अभी तक 100 से ज्यादा इस तरह की शिकायतें आ चुकी हैं। आईडी प्रूफ सिस्टम लागू न होने से किसी का सामान कोई दूसरा रिसीव कर लेता है। इससे रेलवे को हर्जाना भरना पड़ता है।

अगस्त से इसे हर सामान की बुकिंग पर आईडी प्रूफ अनिवार्य

railway new policy for Tax thief and lease mafia

टैक्स चोरी पर लगेगी लगाम: आईडी प्रूफ सिस्टम लागू होने से टैक्स चोरी पर भी लगाम लगेगी। बुकिंग अधिकारियों ने बताया कि अभी तक बाइक जैसे पार्सल को बुक कराने के लिए संबंधित व्यक्ति को आईडी प्रूफ लगाना होता था। लेकिन अगस्त से इसे हर सामान की बुकिंग पर लगाना अनिवार्य किया जा रहा है।

इससे पता चल सकेगा कि पार्सल में क्या है और किस का है। सामान भेजने वाले व्यक्ति ने टैक्स जमा कराया है या नहीं। अगर टैक्स नहीं जमा कराया है तो सामान को बुक नहीं किया जाएगा।

प्रतिमाह तीन लाख बुकिंग: पार्सल बुकिंग केंद्र के अधिकारियों का कहना है कि चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन से प्रतिमाह करीब तीन लाख रुपये का सामान बुक होता है। इसमें अधिकांश पार्सल में चंडीगढ़ से दवाएं भेजी जाती हैं।

आईडी प्रूफ सिस्टम लागू न होने से कई लोग बिना टैक्स जमा किए दवाइयां एक राज्य से दूसरे राज्य में भेजते हैं। इससे जहां सरकार को लाखों का नुकसान होता है। वहीं सामान गायब होने से रेलवे को भी हर्जाना भरना पड़ता है।

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