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'प्रभु' ने बढ़ाया माल भाड़ा, देखिए किसका कबाड़ा?

Fri, 27 Feb 2015 05:37 PM IST
राजीव शर्मा/अमर उजाला, लुधियाना
राजीव शर्मा/अमर उजाला, लुधियाना Updated Fri, 27 Feb 2015 05:37 PM IST
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rail budget: 10 percent Increase in railway freight

रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने बजट भाषण में रेलवे के माल भाड़े को 10 फीसदी तक बढ़ा दिया। इसका सबसे अधिक असर पंजाब पर पड़ेगा। विभिन्न औद्योगिक संगठनों ने इसे वापस लेने की मांग की है।

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बजट भाषण में रेलमंत्री ने रेलवे के माल भाड़े को रेशनलाइज करने की बात की, तो लोगों ने इसे हल्के में लिया, लेकिन बजट की बारीकियां समझते ही उद्यमी परेशान हो गए हैं।
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जरूरी सामान की ढुलाई का माल भाड़ा दस फीसदी तक बढ़ा दिया गया। नतीजतन प्रभु की इस गुगली से उद्यमी और किसान सब परेशान हैं। उद्यमियों का तर्क है कि इससे महंगाई बढ़ने के साथ लोगों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
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बीते आठ माह में पेट्रो उत्पादों की कीमतों में लगातार गिरावट आ रही है। डीजल के रेट में 14 रुपये तक की गिरावट आई है। माहिरों की मानें तो डीजल की कीमतें गिरने से रेलवे को 12 से 15 हजार करोड़ रुपये की बचत हुई है। ऐसे में उद्योग जगत माल भाड़े में कमी की उम्मीद लगाए बैठा था, लेकिन रेल मंत्री ने दाल, अनाज के माल भाड़े में दस फीसदी का इजाफा कर दिया।

वहीं यूरिया का फ्रेट भी दस फीसदी, स्टील का भाड़ा 0.8 फीसदी, एलपीजी गैस का भाड़ा 0.8 फीसदी, सीमेंट का भाड़ा 2.7 फीसदी, कोयले का भाड़ा 6.3 फीसदी, केरोसीन का भाड़ा 0.8 फीसदी, स्लैग का भाड़ा 2.7 फीसदी और स्क्रैप एवं पिग आयरन का भाड़ा 3.1 फीसदी महंगा कर दिया गया है।

कोयले की ढुलाई महंगी, होगा व्यापक असर

rail budget: 10 percent Increase in railway freight

भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) के राष्ट्रीय प्रधान बलबीर सिंह राजेवाल का कहना है कि मोदी सरकार का हर कदम किसान विरोधी है। एक ओर किसान की सब्सिडी को खत्म किया जा रहा है।

दूसरी तरफ भाड़ा बढ़ाया जा रहा है। यूरिया की महंगी ढुलाई का सारा बोझ किसान पर आएगा। कृषि लागत में इजाफा होगा। सरकार किसानों की बजाए सीधे कंपनियों को फायदा देने में लगी हुई है। इस बजट से किसानों को निराशा ही हुई है।

पंजाब कोल एसोसिएशन के प्रधान मनमोहन सिंह ने भी कोयले की ढुलाई 6.3 फीसदी महंगी करने पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि पंजाब कोयले संबंधी अपनी जरूरतों का सौ फीसदी दूसरे राज्यों से आयात करता है। असम जैसे राज्यों से कोयला पंजाब में लाने उसकी लोडिंग, अनलोडिंग, ढुलाई का खर्च पहले ही करीब तीस फीसदी है।

ईंट भट्ठे, इंडस्ट्री एवं पावर प्लांट में कोयले की काफी मांग है। ढुलाई महंगी होने से बिजली, ईंट के अलावा औद्योगिक लागत भी महंगी हो सकती है। इसका बाजार पर व्यापक असर देखने को मिल सकता है।

ढुलाई बढ़ने का असर सीमेंट के दाम पर होगा

rail budget: 10 percent Increase in railway freight

ऑल इंडिया इंडक्शन फर्नेस एसोसिएशन के पंजाब चैप्टर के चेयरमैन संदीप जैन का कहना है कि रेल बजट में पिग आयरन एवं स्क्रैप की ढुलाई 3.1 फीसदी और स्टील की ढुलाई 0.8 फीसदी महंगी की गई है। पंजाब के स्टील उद्योग की जरूरतों को पूरा करने के लिए सौ फीसदी पिग आयरन छत्तीसगढ़, ओडिशा एवं पश्चिम बंगाल से मंगवाया जाता है।

यहां का सेकेंडरी स्टील उद्योग अपनी जरूरत का सत्तर फीसदी स्क्रैप भी आयात करता है। स्क्रैप पर 2500 रुपये प्रति टन भाड़ा लग रहा है। यह उत्पाद की कीमत का दस फीसदी से अधिक है। अब भाड़े में हुई वृद्धि का सीधा असर लागत पर होगा।

पंजाब सीमेंट डीलर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक जुनेजा ने कहा कि सीमेंट पर ढुलाई 2.7 फीसदी बढ़ाने से इसकी कीमतों में इजाफा होगा। पहले ही सीमेंट के दाम कंपनियों ने मनमर्जी कर काफी बढ़ा दिए हैं। अब ढुलाई बढ़ने का असर भी सीमेंट पर आने वाले दिनों में देखने को मिलेगा।

सीमावर्ती राज्य पंजाब को ज्यादा नुकसान
फेडरेशन ऑफ स्माल इंडस्ट्रीज एसोसिएशंस ऑफ इंडिया (फासी) के राष्ट्रीय प्रधान बदीश जिंदल ने कहा कि रेल मंत्री का बजट एंट्री ट्रेड है। इससे कारोबार को नुकसान होगा। पंजाब में सारा कच्चा माल बाहर से आता है और तैयार माल अन्य राज्यों को जाता है। ऐसे में भाड़े की मार सबसे अधिक पंजाब के उद्यमियों पर पड़ेगी। सूबे के उद्यमियों की लागत बढ़ जाएगी।

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