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बॉलीवुड स्क्रीन पर नजर आएगी चंडीगढ़ की ये बेटी
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 10 Nov 2013 11:18 AM IST
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अपनी जान गंवाकर दूसरों को जिंदगी देने वाली चंडीगढ़ की नीरजा भनोट की कहानी अब बॉलीवुड स्क्रीन पर लाई जा रही है। मशहूर फिल्म मेकर और स्क्रिप्ट राइटर राजकुमार गुप्ता यह पहल करने जा रहे हैं।
उनका कहना है कि वे इस समय एक फिल्म के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं और इसके मुकम्मल होते ही वह नीरजा की कहानी को फिल्म का रूप देने में जुट जाएंगे।
गुप्ता का कहना है कि नीरजा की कहानी किसी भी इंसान के लिए प्रेरणादायी हो सकती है। इससे पहले भी वह‘नो वन किल्ड जेसिका’ जैसी सच्ची घटना पर आधारित फिल्म बना चुके हैं जिसे दर्शकों की अच्छी प्रतिक्रिया भी मिली थी। शनिवार को चंडीगढ़ लिटरेचर फेस्ट के लिए राजकुमार गुप्ता शहर आए हुए थे।
नीरजा भनोट की कहानी
चंडीगढ़ की नीरजा भनोट पैन एम एयरलाइन में फ्लाइट अटेंडेंट थी। 5 सितंबर, 1986 को उनका विमान कराची में चार आतंकवादियों ने हाईजैक कर लिया।
इस दौरान नीरजा ने बहादुरी दिखाई और अपनी जान की परवाह न करते हुए सवारियों को विमान से निकालने में मदद की। सवारियों को बचाते-बचाते आतंकियों की गोली नीरजा को जा लगी और इस तरह नीरजा ने दूसरों की खातिर अपनी जान दे दी।
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इस बलिदान के लिए नीरजा को देश का प्रतिष्ठित बहादुरी पुरस्कार अशोक चक्र दिया गया। यह पुरस्कार पाने वाली नीरजा सबसे कम उम्र की भारतीय थी।
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उनका कहना है कि वे इस समय एक फिल्म के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं और इसके मुकम्मल होते ही वह नीरजा की कहानी को फिल्म का रूप देने में जुट जाएंगे।
गुप्ता का कहना है कि नीरजा की कहानी किसी भी इंसान के लिए प्रेरणादायी हो सकती है। इससे पहले भी वह‘नो वन किल्ड जेसिका’ जैसी सच्ची घटना पर आधारित फिल्म बना चुके हैं जिसे दर्शकों की अच्छी प्रतिक्रिया भी मिली थी। शनिवार को चंडीगढ़ लिटरेचर फेस्ट के लिए राजकुमार गुप्ता शहर आए हुए थे।
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नीरजा भनोट की कहानी
चंडीगढ़ की नीरजा भनोट पैन एम एयरलाइन में फ्लाइट अटेंडेंट थी। 5 सितंबर, 1986 को उनका विमान कराची में चार आतंकवादियों ने हाईजैक कर लिया।
इस दौरान नीरजा ने बहादुरी दिखाई और अपनी जान की परवाह न करते हुए सवारियों को विमान से निकालने में मदद की। सवारियों को बचाते-बचाते आतंकियों की गोली नीरजा को जा लगी और इस तरह नीरजा ने दूसरों की खातिर अपनी जान दे दी।
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इस बलिदान के लिए नीरजा को देश का प्रतिष्ठित बहादुरी पुरस्कार अशोक चक्र दिया गया। यह पुरस्कार पाने वाली नीरजा सबसे कम उम्र की भारतीय थी।