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राफेल विमान में एयरफोर्स लगाएगी ये खास तकनीकी, पलक झपकते ही दुश्मन के उड़ जाएंगे परखच्चे

Sun, 28 Oct 2018 03:05 PM IST
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 28 Oct 2018 03:05 PM IST
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Rafael aircraft will be equipped with smart anti-airfield weapons
राफेल विमान - फोटो : फाइल फोटो

जगुआर और सुखोई-30 के बाद बहुत जल्द ही राफेल विमान भी एक खास तकनीक से लैस होगा। ये तकनीकी इतनी कारगर है कि पलक झपकते ही दुश्मने के इलाके में घुसकर उनके ठिकाने तबाह कर सकती है। दरअसल, जगुआर और सुखोई-30 एमकेआई में ‘स्मार्ट एंटी एयरफील्ड वैपन’ (हल्की श्रेणी का पहला पूर्ण स्वदेशी बम) को लांच करने के बाद अब इंडियन एयरफोर्स के बेड़े में शामिल होने वाले राफेल विमान को भी ‘सॉ’ से लैस किया जाएगा। इस योजना पर काम चल रहा है, इंतजार है तो राफेल विमान के इंडियन एयरफोर्स के बेड़े में शामिल होने का। 

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इसी योजना के अंतर्गत पिछले दिनों डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) ने ‘स्मार्ट एंटी एयरफील्ड वैपन’ (सॉ) के तीन और परीक्षणों को सफल रूप से संपन्न कर लिया है। अब ये वैपन मई 2016 से लेकर अगस्त 2018 तक अपने आठ सफल परीक्षण संपन्न कर चुका है। हर परीक्षण में इस हथियार को अपग्रेड किया गया है।

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राफेल विमान (सांकेतिक चित्र)

 बीते अगस्त में भी इस हथियार के तीन परीक्षण पोखरण की चंदन रेंज में किए गए थे। एयरफोर्स के एक अफसर ने बताया कि इन सफल परीक्षणों के बाद अब इस हथियार को राफेल के साथ जोड़ने की तैयारी चल रही है। जैसे ही राफेल इंडियन एयरफोर्स के बेड़े में शामिल होगा। इस हथियार को राफेल में फिट करने का काम शुरू किया जाएगा।

उनके अनुसार उम्मीद है कि सितंबर 2019 तक पहला लड़ाकू राफेल विमान इंडियन एयरफोर्स के पास होगा। जबकि सितंबर 2022 तक सभी राफेल इंडियन एयरफोर्स के बेड़े में आ जाएंगे। अभी इस वैपन को अगस्त 2018 से पहले किए गए परीक्षणों के आधार पर इंडियन एयरफोर्स के जगुआर और सुखोई विमानों में लांच किया गया है। लेकिन राफेल में भी इस वैपन के लांच होने के बाद इंडियन एयरफोर्स की ताकत और बढ़ जाएगी।

इस तरह हवाई हमला करना होगा और आसान

Rafael aircraft will be equipped with smart anti-airfield weapons
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो

इस वैपन से लैस लड़ाकू विमानों को दुश्मन के हवाई एरिया में घुसकर हमला करना अब ज्यादा आसान होगा। दरअसल, ‘सॉ’ एक प्रकार के हल्के एंटी एयरफील्ड ग्लाइड बम की श्रेणी का हथियार है। जिसका वजन 120 किलोग्राम है। अपेक्षाकृत कम भार वालें इस वैपन को लेकर लड़ाकू विमान दुश्मन के हवाई क्षेत्र में घुसकर सुरक्षित दूरी (100 किमी तक) से जमीन पर टारगेट को निशाना बना सकेंगे और बिना खतरे के तुरंत वापस लौट सकेंगे। अगस्त 2018 में हुए तीन सफल परीक्षणों में इसी का अभ्यास किया गया था।

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