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अमृतसर: राधिका गरीब महिलाओं के जीवन में भर रहीं आजादी के रंग, अब तक 10 हजार को स्वावलंबी बनाया
Wed, 26 Jan 2022 01:54 PM IST
ajay kumar
रविंदर शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
रविंदर शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
Published by: ajay kumar
Updated Wed, 26 Jan 2022 01:54 PM IST
सार
राधिका चुघ शहर की ही नहीं बल्कि गांवों की भी गरीब लड़कियों को एक दर्जन के करीब कोर्सों में तीन माह से छह माह तक की ट्रेनिंग देकर उन्हें आत्मनिर्भर बना रही हैं।
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राधिका चुघ
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
अमृतसर में महिलाओं की आजादी की बात होती है तो एक ही नाम सामने आता है...राधिका चुघ का। वह भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ की पत्नी हैं। अब तक राधिका ने दस हजार से ज्यादा गरीब और जरूरतमंद लड़कियों को स्किल ट्रेनिंग देकर अपने पांवों पर खड़ा कर दिया है। अपने स्तर पर ट्रेनिंग देकर उनकी जिंदगी में आजादी के रंग भर चुकी हैं।
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उन्होंने ट्रेनिंग के बाद ज्यादातर लड़कियों को नौकरी दिलाने में तो मदद की ही साथ ही कई महिलाओं को केंद्र सरकार की योजनाओं के अंतर्गत बैंकों से आसान कर्ज दिलवाया और अपना काम शुरू करने में मदद की। राधिका चुघ ने कहा कि उनके पति भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री है। पार्टी में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। करीब आठ साल पहले पति के साथ चुनाव प्रचार के लिए घर से बाहर निकली तो महिलाओं की दयनीय हालत देख कर महिलाओं को ट्रेनिंग देकर उन्हें अपने पांवों पर खड़ा कर उन्हें स्वावलंबी बनाने का ख्याल मन में आया।
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बस, तभी से वे इस काम में जुटी हुई हैं। सिटी में तीन इंस्टीट्यूट चला रहीं हैं। अब गांव की भी गरीब परिवार की लड़कियों को मुफ्त ट्रेनिंग देकर आत्मनिर्भर बनाया जाता है। इस दौरान उन्होंने पाया कि कम पढ़ी लिखी महिलाओं की हालत बहुत दयनीय है और उन्हें स्वावलंबी बनाए जाने की सख्त जरूरत है। तभी से उन्होंने इस पर काम करना शुरू कर दिया।
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पहले तो उन्होंने अपने इलाके की गरीब और कम पढ़ी लिखी लड़कियों को इकट्ठा करके उनको मुफ्त कढ़ाई और सिलाई की ट्रेनिंग देना शुरू किया। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) ने उनकी इस ट्रेनिंग में पंख लगा दिए। पीएमकेवीवाई के शहर में दो संस्थानों की डायरेक्टर राधिका चुघ दसवीं, 12वीं पास और ग्रेजुएट लड़कियों को प्रौद्योगिक की ट्रेनिंग दिलाकर उनको पुरुषों के बराबरी पर खड़ा करने में जुटी हैं। उन्होंने खुद अपने प्रयासों से महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने का जिम्मा उठाया।