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इस्तीफे के बाद सिद्धू के सियासी भविष्य पर लगा प्रश्नचिह्न, भाजपा ने चुप्पी साधी, पर छोटे दल बुला रहे
Tue, 16 Jul 2019 10:04 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 16 Jul 2019 10:04 AM IST
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नवजोत सिंह सिद्धू
- फोटो : फाइल फोटो
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मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ करीब डेढ़ माह तक जंग लड़ने के बाद नवजोत सिंह सिद्धू ने हथियार डाल ही दिए, वहीं अब उनके सियासी भविष्य पर प्रश्नचिह्न लग गया है। पार्टी आलाकमान में अपनी जिस पैठ के सहारे सिद्धू कैप्टन से लोहा ले रहे थे, वह भी बेअसर रही और बीते एक माह के दौरान आलाकमान ने भी सिद्धू की सुध नहीं ली।
इस तरह सिद्धू न सिर्फ प्रदेश कांग्रेस में, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी अलग-थलग पड़ गए हैं। इससे साफ है कि पूरे घटनाक्रम ने सिद्धू के सियासी भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है। वे कांग्रेस में ही रहेंगे तो उनका स्थान क्या होगा? अगर कांग्रेस को अलविदा कह भी देते हैं तो वे अब किस पार्टी में जाएंगे?
कैप्टन के खिलाफ लड़ाई में सिद्धू को प्रदेश कांग्रेस के किसी नेता या कैबिनेट में अपने किसी सहयोगी का साथ भी नहीं मिला। कैबिनेट सहयोगी ही नहीं, बल्कि पार्टी आलाकमान भी उन्हें कैप्टन का आदेश मान लेने की हिदायत देते रहे। लेकिन सिद्धू नहीं माने और अब अकेले पड़ चुके सिद्धू का सियासी भविष्य अधर में दिख रहा है।
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हालांकि उन्होंने केवल कैबिनेट से इस्तीफा दिया है, कांग्रेस या राजनीति से किनारा नहीं किया है। उन्हें आम आदमी पार्टी पंजाब के अलावा सिमरजीत सिंह बैंस की लोक इंसाफ पार्टी और खैरा की पंजाब एकता पार्टी ने न्योता दे दिया है। भारतीय जनता पार्टी मौजूदा घटनाक्रम के बाद सिद्धू को वापस लेने के सवाल पर चुप है।
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इस तरह सिद्धू न सिर्फ प्रदेश कांग्रेस में, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी अलग-थलग पड़ गए हैं। इससे साफ है कि पूरे घटनाक्रम ने सिद्धू के सियासी भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है। वे कांग्रेस में ही रहेंगे तो उनका स्थान क्या होगा? अगर कांग्रेस को अलविदा कह भी देते हैं तो वे अब किस पार्टी में जाएंगे?
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कैप्टन के खिलाफ लड़ाई में सिद्धू को प्रदेश कांग्रेस के किसी नेता या कैबिनेट में अपने किसी सहयोगी का साथ भी नहीं मिला। कैबिनेट सहयोगी ही नहीं, बल्कि पार्टी आलाकमान भी उन्हें कैप्टन का आदेश मान लेने की हिदायत देते रहे। लेकिन सिद्धू नहीं माने और अब अकेले पड़ चुके सिद्धू का सियासी भविष्य अधर में दिख रहा है।
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हालांकि उन्होंने केवल कैबिनेट से इस्तीफा दिया है, कांग्रेस या राजनीति से किनारा नहीं किया है। उन्हें आम आदमी पार्टी पंजाब के अलावा सिमरजीत सिंह बैंस की लोक इंसाफ पार्टी और खैरा की पंजाब एकता पार्टी ने न्योता दे दिया है। भारतीय जनता पार्टी मौजूदा घटनाक्रम के बाद सिद्धू को वापस लेने के सवाल पर चुप है।
सिद्धू प्रदेश के छोटे दलों के साथ जाएंगे, ऐसा होना संभव नहीं लगता क्योंकि इससे सिद्धू को उतना लाभ नहीं होगा, जितना छोटे दलों को सिद्धू के दम पर खुद को मजबूत करने का मिलेगा। कयास लगाए जा रहे हैं कि सिद्धू फिलहाल कांग्रेस में ही रहेंगे और कोई भी सियासी फैसला अगले चुनाव से कुछ समय पहले ही लेंगे।
सिद्धू का विभाग बदले जाने के बाद से उनके कैबिनेट से इस्तीफे तक के घटनाक्रम में यह बात साफ हो गई है कि कांग्रेस आलाकमान जहां सिद्धू को ढांढस बंधाता रहा, वहीं उसने कैप्टन के फैसलों में भी कोई दखल नहीं दिया। दूसरी ओर, अपनी इस हार के लिए सिद्धू खुद भी जिम्मेदार रहे, क्योंकि उन्होंने राहुल गांधी द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर लाने की पेशकश को भी ठुकरा दिया और सारी ताकत कैप्टन को चित्त करने में लगा दी।
सिद्धू इस प्रकरण में केवल यही चाहते थे कि कैप्टन द्वारा लिए गए फैसले को आलाकमान खारिज करके उन्हें फिर से पुराना विभाग सौंप दे, लेकिन ऐसा हो नहीं सका। इसी दौरान, सिद्धू को अन्य कैबिनेट सहयोगियों का विरोध भी झेलना पड़ा, जिनका यही कहना था कि सिद्धू को कैप्टन का फैसला मानना चाहिए क्योंकि कैप्टन ही टीम के कप्तान हैं।
सिद्धू का विभाग बदले जाने के बाद से उनके कैबिनेट से इस्तीफे तक के घटनाक्रम में यह बात साफ हो गई है कि कांग्रेस आलाकमान जहां सिद्धू को ढांढस बंधाता रहा, वहीं उसने कैप्टन के फैसलों में भी कोई दखल नहीं दिया। दूसरी ओर, अपनी इस हार के लिए सिद्धू खुद भी जिम्मेदार रहे, क्योंकि उन्होंने राहुल गांधी द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर लाने की पेशकश को भी ठुकरा दिया और सारी ताकत कैप्टन को चित्त करने में लगा दी।
सिद्धू इस प्रकरण में केवल यही चाहते थे कि कैप्टन द्वारा लिए गए फैसले को आलाकमान खारिज करके उन्हें फिर से पुराना विभाग सौंप दे, लेकिन ऐसा हो नहीं सका। इसी दौरान, सिद्धू को अन्य कैबिनेट सहयोगियों का विरोध भी झेलना पड़ा, जिनका यही कहना था कि सिद्धू को कैप्टन का फैसला मानना चाहिए क्योंकि कैप्टन ही टीम के कप्तान हैं।