चंडीगढ़ : नई वार्डबंदी के मसौदे पर उठे सवाल, जानें- भाजपा के किन दो दिग्गजों का गणित बिगड़ेगा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंडीगढ़ नगर निगम की नई वार्डबंदी का मसौदा बुधवार को जारी हुआ। इससे कई वार्ड का नक्शा पूरी तरह से बदल गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में जो नेता मुखर होकर बोलते थे, उनके वार्ड के सबसे ज्यादा हिस्से किए गए हैं। इससे इन नेताओं का गणित बिगड़ गया है। सबसे ज्यादा नुकसान भाजपा के पूर्व मेयर देवेश मोदगिल को उठाना पड़ सकता है।
देवेश मोदगिल वार्ड 22 से पिछले 10 साल से पार्षद हैं। शहर के मेयर भी रह चुके हैं। उनके वार्ड में सेक्टर 31, 47, 48, इंडस्ट्रियल एरिया व फेज 2 का इलाका आता था, लेकिन नई वार्डबंदी में अब इन्हें चार हिस्सों में बांट दिया गया है। सेक्टर 31 को वार्ड 22 से जोड़ दिया गया। इस वार्ड में सेक्टर 32 और सेक्टर 33 भी हैं। सेक्टर 47 को वार्ड 21 से जोड़ा गया, जिसमें बैरमाजरा, फैदां व बुड़ैल जुड़ा हुआ है। सेक्टर 48 को वार्ड 35 में शामिल कर दिया गया है। इस वार्ड में सेक्टर 49, 50 और 63 को भी शामिल किया गया है। जबकि फेज 2 को वार्ड 19 में शामिल किया गया। इसमें रामदरबार और तातरपुर को जोड़ा गया है। मोदगिल को पार्टी का मुखर नेता माना जाता है। वे अपनी बात पार्टी में बेबाकी से रखते हैं।
भाजपा के एक और नेता व शहर के पूर्व डिप्टी मेयर अरविंद दूबे के वार्ड के भी तीन हिस्से कर दिए गए हैं। अरविंद दूबे ने पार्षद का चुनाव सबसे ज्यादा वोटों से जीता था। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को 9421 वोट से हराया था। इतने वोट से शहर में आज तक कोई नहीं जीता है, लेकिन इस बार उनके वार्ड के भी तीन हिस्से हो गए हैं। उनके वार्ड में मौली कांप्लेक्स (रेलवे कालोनी), आंबेडकर आवास योजना, मौली कांप्लेक्स (चरण सिंह कालोनी), भगत सिंह कालोनी, विकास नगर, शिवालिक एनक्लेव व मौली कांप्लेक्स (हाउसिंग बोर्ड) का एरिया शामिल था।
नई वार्डबंदी में अब दूबे के इलाकों को तीन वार्ड में बांट दिया गया है। शिवालिक एनक्लेव को वार्ड छह में जोड़ दिया गया है। आंबेडकर कालोनी, चरण सिंह कालोनी और स्मॉल फ्लैट्स को वार्ड सात में शामिल कर दिया गया, जबकि विकास नगर, मौली जागरां, रायपुर कलां, मक्खन माजरा और रायपुर खुर्द को जोड़कर वार्ड आठ बना दिया गया है। भाजपा में अरविंद दूबे की छवि एक ऐसे नेता के तौर पर रही है, जो अपनी राय को ठोक बजाकर रखते हैं। पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के साथ उनकी तल्खियां कई सामने भी आई हैं।
ऐसा लगता है कि प्रशासन ने बहुत ही जल्दबाजी में वार्ड का खाका तैयार किया है। उसके बाद आपत्ति दर्ज कराने के लिए सात दिन का वक्त दिया गया है, जो बहुत कम है। परिसीमन को देखकर लग रहा है कि सिर्फ पांच से छह वार्ड को हिलाया गया है। -देवेश मोदगिल, पूर्व मेयर व पार्षद
मैं ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहता। कुछ ऐसे इलाकों को इधर-उधर किया गया है, जो समझ से परे हैं। विकास नगर को मौलीजागरां के साथ जोड़ा गया है, जबकि वह दड़वा के नजदीक पड़ेगा। -अरविंद दूबे, पूर्व डिप्टी मेयर व पार्षद
नई वार्डबंदी में आबादी का संतुलन बराबर नहीं
बुधवार को जारी वार्डबंदी के मसौदे पर अब कई तरह के सवाल भी खड़े हो रहे हैं। जानकारों का कहना है कि कई वार्ड की आबादी का संतुलन ठीक ढंग से नहीं रखा गया है। कुछ वार्ड में 10 हजार से ज्यादा आबादी का अंतर पाया गया है, जबकि पंजाब नगर निगम के एक्ट की धारा आठ के मुताबिक सभी वार्ड का संतुलन बराबर होना चाहिए। दूसरी असमंजस की स्थिति अनुसूचित जाति के वार्ड को लेकर है। कई कॉलोनी इधर से उधर हुई हैं। नई जनगणना की रिपोर्ट साल 2021 में आनी है। ऐसे में अनुसूचित जाति के वार्ड को किस तरह से रिजर्व किया जाएगा।
वार्डबंदी में कई तरह की खामियां है। आबादी का संतुलन ठीक ढंग से नहीं रखा गया है। प्रशासन ने यह भी नहीं बताया कि किस वार्ड की कितनी आबादी है। इससे इलाके के लोगों का विकास ठीक ढंग से नहीं हो पाता है। -सतिंदर सिंह पूर्व पार्षद व भाजपा नेता
वार्डबंदी में कई तरह की खामियां हैं। आबादी का संतुलन ठीक ढंग से नहीं बैठाया गया है। ऐसा लग रहा है कि भाजपा के कुछ नेताओं को फायदा पहुंचाने के लिए यह सब किया गया है। अभी हम लोग इसकी स्टडी कर रहे हैं। -सुभाष चावला, पूर्व मेयर