हजकां की हार, भाजपा की जीत से गठबंधन पर सवाल
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भाजपा ने जहां अपने हिस्से की आठ में सात सीटों पर जीत हासिल कर ली वहीं हजकां अपने हिस्से की दोनों सीटों पर हार गई। गठबंधन में एक दल के खराब प्रदर्शन अब आगामी विधानसभा चुनाव के लिए इस गठबंधन के बने रहने पर सवाल उठने लगा है।
2011 में हुआ था दोनों का गठबंधन
वर्ष 2011 में हिसार लोकसभा उप चुनाव में भाजपा और हजकां के बीच गठबंधन हुआ था। गठबंधन के अनुसार, लोकसभा चुनाव में भाजपा को आठ और हजकां दो सीटों पर चुनाव लड़ना था जबकि विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियां 45-45 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी।
मुख्यमंत्री कार्यकाल भी दोनों पार्टियों के बीच ढाई-ढाई साल का तय किया गया था। पहला कार्यकाल कुलदीप बिश्नोई और दूसरा भाजपा के खाते में डाला गया था।
अब चूंकि लोकसभा चुनाव में भाजपा को सात सीटों पर ऐतिहासिक जीत और हजकां की दोनों सीटों पर हार हुई है। इससे दोनों दलों के बीच तीन साल पहले हुए समझौते पर प्रश्नचिन्ह लगना स्वाभाविक है।
सुषमा स्वराज हैं गठबंधन की मूख्य सूत्रधार
भाजपा की दिग्गज नेता सुषमा स्वराज भाजपा-हजकां गठबंधन की मुख्य सूत्रधार हैं। वे बार-बार गठबंधन मजबूत बताती रही हैं।
हरियाणा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष प्रो. रामबिलास शर्मा भी गठबंधन मजबूत बताते रहे हैं लेकिन उन्होंने कुलदीप बिश्नोई के बयानों और दोनों सीटों पर हजकां की हार के बारे में प्रतिक्रिया नहीं दी है।
अमर उजाला के पूछने पर उन्होंने इतना जरूर कहा कि विधानसभा चुनाव में भाजपा बड़ी भूमिका में रहेगी। कितनी सीटें हजकां को दी जाएंगी के सवाल पर भी उन्होंने चुप्पी साध ली।
विधानसभा चुनाव में भाजपा निभाएगी बड़ी भूमिका
लोकसभा चुनाव में भाजपा ने हजकां से न केवल करनाल सीट हथियाई थी बल्कि विनोद शर्मा की हजकां में एंट्री भी रोक दी थी। इससे कुलदीप बिश्नोई खफा भी लेकिन बाद में उन्होंने कहा था कि विधानसभा चुनाव में हजकां बड़ी पार्टी के रूप में काम करेगी और भाजपा उसी तरह हजकां की बातें माने जैसे हजकां लोकसभा चुनाव में मानती रही है।
कुलदीप बिश्नोई ने 31 मई तक 45-45 सीटों का बंटवारा करने की भी बात कही थी। मगर चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद परिस्थितियां बदल गई हैं। साफ हो गया है कि भाजपा विधानसभा चुनाव में बड़ी भूमिका में रहने वाली है।
चौटाला परिवार के लिए अच्छे दिन आने की उम्मीद जगी
केंद्र में एनडीए की सरकार बनने पर पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के परिवार के लिए अच्छे दिन आने की उम्मीद बंध गई हैं। इनेलो ने हरियाणा में दो लोकसभा सीटों पर जीत हासिल की है जबकि उसके दो राज्यसभा सदस्य हैं।
एनडीए सरकार गठित करने के लिए बेशक इनेलो के सांसदों की जरूरत नहीं है मगर राज्यसभा में दलों के सदस्यों को देखते हुए इनेलो सदस्यों की जरूरत पड़ सकती है। वैसे भी इनेलो की तरफ से बिना शर्त एनडीए सरकार को समर्थन देने की बात पहले भी कही गई थी।
पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के पारिवारिक मित्र पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के जरिए विधानसभा चुनाव में इनेलो के साथ गठबंधन के प्रयास हो सकते हैं। अगर गठबंधन नहीं हुआ और भाजपा-हजकां गठबंधन यूं ही बना रहा तो विधानसभा चुनाव में भाजपा-हजकां गठबंधन, कांग्रेस और इनेलो फिर तिकोने मुकाबले में फंस सकते हैं।