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'जब खुला ही नहीं शहीद स्मारक तो संरक्षण का क्या औचित्य?'

Fri, 26 Feb 2016 07:37 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 26 Feb 2016 07:37 PM IST
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Questioned of high court on shaheed bhagat singh smarak issue

शहीद भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव की क्रांतिकारी पार्टी के फिरोजपुर के तूड़ी बाजार स्थित प्रथम मुख्यालय को आम लोगों के दर्शनों के लिए नहीं खोले जाने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस आरके जैन की एकल बेंच ने अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा है कि जब यह स्मारक आम लोगों के लिए खोला ही नहीं गया तो इसके संरक्षण का क्या औचित्य है।

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एडवोकेट एचसी अरोड़ा ने इस मुख्यालय को संरक्षित स्मारक घोषित करने की मांग को लेकर याचिका दायर की थी। पंजाब सरकार ने आश्वासन दिया था कि मुख्यालय को संरक्षित स्मारक घोषित कर दिया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं होने पर एडवोकेट अरोड़ा ने अवमानना याचिका दायर की थी और सरकार ने जल्द नोटिफिकेशन जारी करने की बात कही थी।
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सरकार ने पिछले साल दिसंबर महीने में नोटिफिकेशन जारी कर दी थी, लेकिन शुक्रवार को सुनवाई के दौरान एडवोकेट अरोड़ा ने बेंच को बताया कि नोटिफिकेशन जारी की जा चुकी है, लेकिन अभी तक इस स्मारक को आम लोगों के दर्शन के लिए नहीं खोला गया, तो संरक्षित स्मारक घोषित करने का औचित्य नहीं रह जाता।
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बेंच से कहा गया कि स्मारक 23 मार्च से पहले दर्शनों के लिए खोला जाना चाहिए, उस दिन शहीदी दिवस है और इससे पहले इस संरक्षित स्मारक को दर्शन के लिए खोला जाना असल श्रद्धांजलि होगी। अब बेंच ने सरकार को 21 मार्च तक स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।

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