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Chandigarh News: 1953 करोड़ के धान की खरीद, 653 करोड़ का भुगतान, 1300 करोड़ अटके
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-अब तक 1.64 लाख किसान 11.77 लाख एमटी धान लेकर पहुंचे, 9.46 लाख की हुई बोली
-72 घंटे में भुगतान का दावा, पांच दिन के बाद भी नहीं मिल रही राशि
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा की मंडियां धान से अटनी शुरू हो गई हैं। अब तक आठ लाख मीट्रिक टन से अधिक धान की खरीद हो चुकी है। सरकार के 72 घंटे के दावे के बावजूद अब तक 32 हजार किसानों को 653 करोड़ राशि का ही भुगतान हो सका है, जबकि 1303 करोड़ रुपये की राशि अटकी हुई है। पांच दिन के बाद भी किसानों के खाते में पैसे नहीं आ रहे हैं।
मंगलवार शाम तक प्रदेशभर की सभी मंडियों में 2,02,767 गेट पास काटे जा चुके हैं और 11.77 लाख मीट्रिक टन धान की आवक हो चुकी है। इसी प्रकार, 1,64,014 किसानों की 9,46,587.24 एमटी की बोली हो चुकी है और 1,45,466 किसानों के 8,86,827.89 एमटी धान के जे फार्म काटे जा चुके हैं।
किसानों की मांग पर 25 सितंबर को धान की खरीद शुरू की गई थी और इसके लिए प्रदेश में 231 मंडियां बनाईं गईं। खरीफ विपणन सीजन- 2023 के दौरान कुल 60 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद का लक्ष्य रखा गया है। अभी तक खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा 4.83 लाख मीट्रिक टन, हैफेड द्वारा 2.49 लाख मीट्रिक टन और हरियाणा राज्य भंडारण निगम 74 हजार मीट्रिक टन धान की खरीद की गई है। इस खरीद के लिए 25,815 किसानों को तय समयावधि के अंदर-अंदर 653.17 करोड़ रुपये की राशि का भुगतान किया गया है।
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बाक्स
219 करोड़ का बाजरा खरीदा, 36 करोड़ का ही भुगतान
प्रदेश में 23 सितंबर से आरंभ हुई बाजरे की खरीद के लिए प्रदेश में 93 मंडियां बनाई गईं। खरीफ विपणन सीजन- 2023 के दौरान भारत सरकार द्वारा टीपीडीएस के लिए 1.50 लाख मीट्रिक टन और पीएम पोषण के लिए 1 लाख मीट्रिक टन बाजरे की खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अभी तक हैफेड द्वारा 1.14 लाख मीट्रिक टन बाजरा खरीदा गया है और 6236 किसानों को 36.82 करोड़ रुपये की राशि का भुगतान किया गया है। एमएसपी के अनुसार, अब तक सरकार की ओर से कुल 219 करोड़ रुपये की कीमत का बाजरा खरीदा जा चुका है, जबकि 183 करोड़ की राशि बकाया है। मक्का की खरीद के लिए भी प्रदेश में 19 मंडियां बनाई गईं हैं।
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भुगतान को लेकर सरकार के अलग-अलग दावे
किसानों को सीधे भुगतान को लेकर सरकार में अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री मनोहर लाल का दावा है कि 72 घंटे में किसानों को राशि भेजी जा रही है, जबकि डिप्टी सीएम, जिनके पास खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की भी जिम्मेदारी है, उनका दावा है कि 48 घंटों में किसानों को भुगतान किया जा रहा है। इस संशय के बीच खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डाॅ. सुमिता मिश्रा का कहना है कि भुगतान की अवधि 72 घंटे की है और बड़ी तेजी से भुगतान का कार्य किया जा रहा है।
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-72 घंटे में भुगतान का दावा, पांच दिन के बाद भी नहीं मिल रही राशि
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा की मंडियां धान से अटनी शुरू हो गई हैं। अब तक आठ लाख मीट्रिक टन से अधिक धान की खरीद हो चुकी है। सरकार के 72 घंटे के दावे के बावजूद अब तक 32 हजार किसानों को 653 करोड़ राशि का ही भुगतान हो सका है, जबकि 1303 करोड़ रुपये की राशि अटकी हुई है। पांच दिन के बाद भी किसानों के खाते में पैसे नहीं आ रहे हैं।
मंगलवार शाम तक प्रदेशभर की सभी मंडियों में 2,02,767 गेट पास काटे जा चुके हैं और 11.77 लाख मीट्रिक टन धान की आवक हो चुकी है। इसी प्रकार, 1,64,014 किसानों की 9,46,587.24 एमटी की बोली हो चुकी है और 1,45,466 किसानों के 8,86,827.89 एमटी धान के जे फार्म काटे जा चुके हैं।
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किसानों की मांग पर 25 सितंबर को धान की खरीद शुरू की गई थी और इसके लिए प्रदेश में 231 मंडियां बनाईं गईं। खरीफ विपणन सीजन- 2023 के दौरान कुल 60 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद का लक्ष्य रखा गया है। अभी तक खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा 4.83 लाख मीट्रिक टन, हैफेड द्वारा 2.49 लाख मीट्रिक टन और हरियाणा राज्य भंडारण निगम 74 हजार मीट्रिक टन धान की खरीद की गई है। इस खरीद के लिए 25,815 किसानों को तय समयावधि के अंदर-अंदर 653.17 करोड़ रुपये की राशि का भुगतान किया गया है।
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219 करोड़ का बाजरा खरीदा, 36 करोड़ का ही भुगतान
प्रदेश में 23 सितंबर से आरंभ हुई बाजरे की खरीद के लिए प्रदेश में 93 मंडियां बनाई गईं। खरीफ विपणन सीजन- 2023 के दौरान भारत सरकार द्वारा टीपीडीएस के लिए 1.50 लाख मीट्रिक टन और पीएम पोषण के लिए 1 लाख मीट्रिक टन बाजरे की खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अभी तक हैफेड द्वारा 1.14 लाख मीट्रिक टन बाजरा खरीदा गया है और 6236 किसानों को 36.82 करोड़ रुपये की राशि का भुगतान किया गया है। एमएसपी के अनुसार, अब तक सरकार की ओर से कुल 219 करोड़ रुपये की कीमत का बाजरा खरीदा जा चुका है, जबकि 183 करोड़ की राशि बकाया है। मक्का की खरीद के लिए भी प्रदेश में 19 मंडियां बनाई गईं हैं।
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भुगतान को लेकर सरकार के अलग-अलग दावे
किसानों को सीधे भुगतान को लेकर सरकार में अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री मनोहर लाल का दावा है कि 72 घंटे में किसानों को राशि भेजी जा रही है, जबकि डिप्टी सीएम, जिनके पास खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की भी जिम्मेदारी है, उनका दावा है कि 48 घंटों में किसानों को भुगतान किया जा रहा है। इस संशय के बीच खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डाॅ. सुमिता मिश्रा का कहना है कि भुगतान की अवधि 72 घंटे की है और बड़ी तेजी से भुगतान का कार्य किया जा रहा है।