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मूवी में नायक बनना सब पसंद करते हैं, पर 'खलनायक' बनना इनका सपना था

Wed, 06 Sep 2017 04:16 PM IST
अरविंद बाजपेयी/अमर उजाला, चंडीगढ़
अरविंद बाजपेयी/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 06 Sep 2017 04:16 PM IST
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punjan villains in indian bollywood
पंजाब के 'खलनायक'
नायक बनना सब पसंद करते हैं पर ‘खलनायक’ बनने की बात पर चेहरे पर शिकन आ जाती है। पंजाब में कई ऐसे सितारे हैं जिनके कैरियर की शुरुआत ही इस किरदार से हुई। अब उन्होंने खुद को ऐसा स्थापित किया कि सिल्वर स्क्रीन पर उनको देखते ही दर्शकों का गुस्सा उबाल मारने लगता है। यही गुस्सा बताता है कि कैरेक्टर उनके रग-रग में बस चुका है। ऐसे ही चंद कलाकार हैं जिन्होंने अपने कैरियर की शुरुआत बतौर खलनायक की और अब पंजाबी और हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में एक खास पहचान बना ली।
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पंजाबी यूनिवर्सिटी से थिएटर में एमए करने के बाद मोहाली के रहने वाले शिवेंद्र विक्की ने अपना कैरियर बतौर खलनायक शुरू किया। शिवेंद्र विक्की ने बताया कि उनको एक्टिंग का शौक था। कई फिल्मों के लिए ऑडिशन देने के बाद गुरदास मान की फिल्म देस होया परदेस में काम करने का मौका मिला। इस फिल्म में उन्होंने एक आतंकवादी का कैरेक्टर निभाया। उन्होंने कहा कि निगेटिव रोल हमेशा लोगों के ज्यादा ध्यानाकर्षण का केंद्र बनता है।
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उन्होंने कहा कि एक बार निगेटिव कैरेक्टर लोगों ने पसंद किया और मुड़कर नहीं देखा। शिवेंद्र विक्की ने बताया कि कान फिल्म फेस्टिवल में भी उनको जाने का मौका मिला। उनकी अभिनीत फिल्म चौथी पूड को नेशनल अवार्ड भी मिला। पंजाबी और हिंदी फिल्मों में विलेन का किरदार निभाने वाले विक्की बावा ने बताया कि उनके निगेटिव कैरेक्टर की शुरुआत एलबम में निगेटिव एक्टिंग करने के साथ हुई। इसमें कैरम बोर्ड, कोकाकोला वर्सेज मिल्क जैसे एलबम शामिल थे।
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इसके बाद उन्होंने जोरा दस नंबरिया जैसी फिल्मों मेें अभिनय किया। उन्होंने बताया कि कैरियर की शुरुआत में थिएटर ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने थिएटर के बड़े आर्टिस्टों के साथ जब मंच पर काम किया तो वहां से आत्मविश्वास बढ़ा और फिल्मों में अभिनय करने लगे। पंजाब के नीटू पंधेर भी एक ऐसे ही विलेन हैं, जिन्होंने एक्टिंग का कोर्स करने के बाद खुद को खलनायक के तौर पर स्थापित कर लिया।

पंधेर ने कहा कि नायक या खलनायक बड़ी बात नहीं है, बड़ी बात है अदाकारी। पहली बात तो ये है कि एक्टर एक्टिंग कर सके और दूसरी बात यह कि उसकी पर्सनालिटी पर क्या बेहतर लगता है। नीटू ने बताया कि उन्होंने अपनी पहली फिल्म पत्ता पत्ता सिंहा दा बैरी और उसके बाद कच्चे धागे की तो उनको निगेटिव किरदार ज्यादा पसंद आया और अब वह ऐसे ही कैरेक्टर करते हैं।

रोजाना करते हैं अभ्यास
खलनायक की भूमिका निभाने वाले यह एक्टर रोजाना दो से तीन घंटे अपना समय अभ्यास में बिताते हैं। इसके साथ पर्सनालिटी को डेवलप करने के लिए भी वह जिम और रनिंग करते हैं। खलनायक की भूमिका निभाने वाले अभिमन्यु ने बताया कि विलेन का किरदार हमेशा प्रभावशाली होता है। हां, उस कैरेक्टर को करने में हीरो से ज्यादा मेहनत और लगन की आवश्यकता होती है।


शिवेंद्र विक्की
देस होया परदेस (टेरोरिस्ट का कैरेक्टर), सुपर सिंह (राजनीतिज्ञ का किरदार), कबड्डी एक मोहब्बत (निगेटिव), साड्डी वारी आउन दे (एलबम निगेटिव), प्रोफेसर मनी प्लांट (प्रोफेसर वर्मा), छू लेंगे आसमां, शाहिद (टेरोरिस्ट कमांडर का किरदार)।

विक्की बावा
कैरम बोर्ड (शैरीमान), कोकाकोला वर्सेज मिल्क, साब मान, मिट्टी रुदन करे, जोरा दस नंबरिया, नानक शाह फकीरी,  हार्ड कौर।

नीटू पंढेर
पत्ता पत्ता सिंहा दा बैरी, कच्चे धागे (पंजाबी), जोरा दस नंबरिया, पंजाब सिंह, जख्मी (पंजाबी), पींगा प्यार दीयां।
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