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किसी फिल्मी स्टोरी से कम नहीं इस महिला पहलवान की कहानी, पढ़िए
सुरिंदर पाल/अमर उजाला, जालंधर(पंजाब)
Updated Thu, 12 Jan 2017 09:25 AM IST
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भारतीय पहलवान रिद्धिमा की कहानी
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पढ़ाई के साथ-साथ पहलवानी के गुर सीखे और नाम कमाया। किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है इस लेडी पहलवान के संघर्ष की स्टोरी। भारतीय महिला पहलवान रिद्धिमा के संघर्ष का सफर लुधियाना से शुरू होता है।
इस युवा पहलवान का सपना तो स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पटियाला कैंप से प्रशिक्षण लेकर भारत के लिए खेलने का था, लेकिन उसकी प्रतिभा को यहां के कोच और अधिकारी पहचान नहीं पाए।
यहां दाखिला नहीं हुआ, फिर वह ऑस्ट्रेलिया गईं और ऑस्ट्रेलियाई टीम की ओर से खेलते हुए अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। नवंबर 2016 में रिद्धिमा की प्रतिभा तब दुनिया के सामने आई जब उसने ऑस्ट्रेलिया में हुए मेलबर्न कप के सीनियर वर्ग के मुकाबले में स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।
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रिद्धिमा ने दूसरी कक्षा पास करने के साथ ही राष्ट्रीय जूनियर वर्ग में स्वर्ण अपने नाम कर लिया था। पांचवीं कक्षा में उन्होंने जिले की ओर से खेलते हुए एक बार फिर स्वर्ण पदक हासिल किया। रिद्धिमा के पिता हरीश शर्मा साइकिल स्पेयर पार्ट्स का काम करते हैं।
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इस युवा पहलवान का सपना तो स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पटियाला कैंप से प्रशिक्षण लेकर भारत के लिए खेलने का था, लेकिन उसकी प्रतिभा को यहां के कोच और अधिकारी पहचान नहीं पाए।
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यहां दाखिला नहीं हुआ, फिर वह ऑस्ट्रेलिया गईं और ऑस्ट्रेलियाई टीम की ओर से खेलते हुए अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। नवंबर 2016 में रिद्धिमा की प्रतिभा तब दुनिया के सामने आई जब उसने ऑस्ट्रेलिया में हुए मेलबर्न कप के सीनियर वर्ग के मुकाबले में स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।
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रिद्धिमा ने दूसरी कक्षा पास करने के साथ ही राष्ट्रीय जूनियर वर्ग में स्वर्ण अपने नाम कर लिया था। पांचवीं कक्षा में उन्होंने जिले की ओर से खेलते हुए एक बार फिर स्वर्ण पदक हासिल किया। रिद्धिमा के पिता हरीश शर्मा साइकिल स्पेयर पार्ट्स का काम करते हैं।
आस्ट्रेलिया में पढ़ाई भी की और पहलवानी भी
कबड्डी प्रतियोगिता
साल 2013 में एमडी सुकांत त्रिवेदी ने उनकी ऑस्ट्रेलिया जाकर पढ़ाई जारी रखने में मदद की। ऑस्ट्रेलिया के होम्स ग्लैन सरकारी कॉलेज में दाखिले के बाद रिद्धिमा को यूनिवर्सिटी ऑफ कैनबरा में आगे की पढ़ाई करनी थी। एक साल तक रिद्धिमा ने अपना कोर्स किया।
इसी दौरान उनकी मुलाकात कुश्ती की महिला कोच आमीन याकूबी से हुई। याकूबी ने रिद्धिमा को ‘एक्सट्रीम क्लब’ ज्वाइन कराया। जिम व डाइट के लिए समस्या पैसे की थी इसलिए पार्ट टाइम नौकरी कर ली।
साल 2015 में उन्होंने कैनबरा कप में 55 किग्रा जूनियर व सीनियर कुश्ती में एक साथ गोल्ड अपने नाम किया। रिद्धिमा की नजर साल 2018 में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों पर है। हालांकि उन्हें खेलना तो ऑस्ट्रेलिया की तरफ से है लेकिन उनके पास वहां की नागरिकता नहीं है।
नियमानुसार उन्हें वहां की नागरिकता हासिल करनी होगी। दिन में कॉलेज में पढ़ाई, शाम को नौकरी और रात तक कुश्ती की प्रैक्टिस अभी भी जारी है।
इसी दौरान उनकी मुलाकात कुश्ती की महिला कोच आमीन याकूबी से हुई। याकूबी ने रिद्धिमा को ‘एक्सट्रीम क्लब’ ज्वाइन कराया। जिम व डाइट के लिए समस्या पैसे की थी इसलिए पार्ट टाइम नौकरी कर ली।
साल 2015 में उन्होंने कैनबरा कप में 55 किग्रा जूनियर व सीनियर कुश्ती में एक साथ गोल्ड अपने नाम किया। रिद्धिमा की नजर साल 2018 में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों पर है। हालांकि उन्हें खेलना तो ऑस्ट्रेलिया की तरफ से है लेकिन उनके पास वहां की नागरिकता नहीं है।
नियमानुसार उन्हें वहां की नागरिकता हासिल करनी होगी। दिन में कॉलेज में पढ़ाई, शाम को नौकरी और रात तक कुश्ती की प्रैक्टिस अभी भी जारी है।