{"_id":"588107e74f1c1b701befe4fc","slug":"punjab-university-why-ugc-and-mha-wants-to-lock-on-pu-says-highcourt","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"पीयू पर ताला क्यों लगाना चाहता है यूजीसी और एमएचए: हाईकोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पीयू पर ताला क्यों लगाना चाहता है यूजीसी और एमएचए: हाईकोर्ट
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 20 Jan 2017 12:59 AM IST
विज्ञापन
Court On PU
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पीयू की खस्ता वित्तीय हालत को देखते हुए वीसी के बयान पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से लिए गए स्वत: मामले में अब हाईकोर्ट ने केंद्र को फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने सवाल किया है कि अन्य विश्वविद्यालयों को जब पैसा जारी किया जाता है, तो आखिर पीयू के मामले में सौतेला व्यवहार क्यों हो रहा है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि यदि ऐसा ही रहा तो मार्च में पीयू पर ताला लगाना पड़ जाएगा।
पूछा है कि आखिर क्यों यूजीसी और एमएचए पीयू पर ताला लगाना चाहते हैं। हाईकोर्ट ने कहा है कि यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) चार सप्ताह में पीयू को 30 करोड़ 50 लाख रुपये जारी करे, ताकि कर्मियों के वेतन का भुगतान हो सके। कोर्ट ने कहा कि पीयू का 100 साल का इतिहास है। यह यूजीसी से भी ज्यादा पुराना है। ऐसे में इस विरासत और शिक्षा के मंदिर को बंद नहीं होने दिया जाएगा।
हाईकोर्ट ने कहा कि यदि यूनिवर्सिटी बंद ही करनी है तो यह भी निर्धारित कर लो कि विद्यार्थियों को कहां एडजस्ट किया जाएगा और स्टाफ को कहां। जस्टिस एसएस सारों और जस्टिस दर्शन सिंह की खंडपीठ ने पीयू को मिलने वाली वार्षिक ग्रांट के बारे में भी चिंता जताई। हाईकोर्ट ने कहा कि जहां लगातार खर्च बढ़ रहे हैं, वहीं ग्रांट की राशि लंबे समय से बढ़ाई नहीं गई है, जो समस्या का कारण है। केंद्र और पंजाब सरकार को आदेश जारी करते हुए हाईकोर्ट ने पीयू की ग्रांट बढ़ाने को लेकर हलफनामा दाखिल करने के आदेश दिए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
पूछा है कि आखिर क्यों यूजीसी और एमएचए पीयू पर ताला लगाना चाहते हैं। हाईकोर्ट ने कहा है कि यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) चार सप्ताह में पीयू को 30 करोड़ 50 लाख रुपये जारी करे, ताकि कर्मियों के वेतन का भुगतान हो सके। कोर्ट ने कहा कि पीयू का 100 साल का इतिहास है। यह यूजीसी से भी ज्यादा पुराना है। ऐसे में इस विरासत और शिक्षा के मंदिर को बंद नहीं होने दिया जाएगा।
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने कहा कि यदि यूनिवर्सिटी बंद ही करनी है तो यह भी निर्धारित कर लो कि विद्यार्थियों को कहां एडजस्ट किया जाएगा और स्टाफ को कहां। जस्टिस एसएस सारों और जस्टिस दर्शन सिंह की खंडपीठ ने पीयू को मिलने वाली वार्षिक ग्रांट के बारे में भी चिंता जताई। हाईकोर्ट ने कहा कि जहां लगातार खर्च बढ़ रहे हैं, वहीं ग्रांट की राशि लंबे समय से बढ़ाई नहीं गई है, जो समस्या का कारण है। केंद्र और पंजाब सरकार को आदेश जारी करते हुए हाईकोर्ट ने पीयू की ग्रांट बढ़ाने को लेकर हलफनामा दाखिल करने के आदेश दिए हैं।
विज्ञापन
कम होगा पीयू का स्टाफ
पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़
- फोटो : डेमो फोटो
फिलहाल पीयू का वार्षिक खर्च 473.73 करोड़
वीरवार को पीयू के रजिस्ट्रार ने हाईकोर्ट को बताया कि आगामी वर्षों में पीयू में कौन-कौन सी नई जरूरतें पैदा होंगी और उसके लिए कितनी राशि की आवश्यकता होगी। प्रोफेसरों और नॉन टीचिंग स्टाफ के वेतन पेंशन और अन्य सभी खर्चों को मिलाकर फिलहाल पीयू का वार्षिक खर्च 473.73 करोड़ है। 256 करोड़ पीयू खुद जनरेट करता है। वहीं 20 करोड़ पंजाब देता है। इस वर्ष 197 करोड़ का घाटा हुआ।
46.3 करोड़ पिछले घाटे को मिला दें तो 244.04 करोड़ हो जाता है। यूजीसी 176 करोड़ देता है और ऐसे में इस वर्ष 68 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। साल 2021-2022 में विवि का खर्च 715.32 करोड़ हो जाएगा। पंजाब और केंद्र ग्रांट बढ़ाते हैं तभी विवि का अस्तित्व बचेगा। पीयू की ओर से बताया गया है कि यूजीसी ने सेंट्रल यूनिवर्सिटी के फंड को बढ़ाया है। पीयू के आधीन 190 से अधिक कॉलेज हैं। ऐसे में इसे फंड की ज्यादा जरूरत है। पीयू में 75 विभाग हैं और रिजनल सेंटर भी हैं। ऐसे में यूजीसी अलग से फंड की व्यवस्था करे।
कम होगा पीयू का स्टाफ
पीयू ने बताया की साल 2010 में की असेसमेंट के अनुसार पीयू में 1510 शिक्षक और 3011 गैर शिक्षक स्वीकृत थे। साल 2014 में इंटरनल असेस्मेंट के बाद तय किया गया कि 1378 शिक्षक और 2609 गैर शिक्षक कर्मियों के पद ही स्वीकृत रखे जाएं। अगले पांच वर्षों में 474 गैर शिक्षक कर्मी सेवानिवृत्त हो जाएंगे और 545 अस्थायी कर्मियों की अगले तीन वर्षों में छंटनी की जाएगी। इस तरह से गैर शिक्षक कर्मियों की संख्या अगले पांच वर्षों में संतुलित हो जाएगी। पीयू यूजीसी के अनुसार कर्मियों की संख्या कम करने की दिशा में काम कर रहा है, लेकिन यह तत्काल नहीं किया जा सकता।
वीरवार को पीयू के रजिस्ट्रार ने हाईकोर्ट को बताया कि आगामी वर्षों में पीयू में कौन-कौन सी नई जरूरतें पैदा होंगी और उसके लिए कितनी राशि की आवश्यकता होगी। प्रोफेसरों और नॉन टीचिंग स्टाफ के वेतन पेंशन और अन्य सभी खर्चों को मिलाकर फिलहाल पीयू का वार्षिक खर्च 473.73 करोड़ है। 256 करोड़ पीयू खुद जनरेट करता है। वहीं 20 करोड़ पंजाब देता है। इस वर्ष 197 करोड़ का घाटा हुआ।
46.3 करोड़ पिछले घाटे को मिला दें तो 244.04 करोड़ हो जाता है। यूजीसी 176 करोड़ देता है और ऐसे में इस वर्ष 68 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। साल 2021-2022 में विवि का खर्च 715.32 करोड़ हो जाएगा। पंजाब और केंद्र ग्रांट बढ़ाते हैं तभी विवि का अस्तित्व बचेगा। पीयू की ओर से बताया गया है कि यूजीसी ने सेंट्रल यूनिवर्सिटी के फंड को बढ़ाया है। पीयू के आधीन 190 से अधिक कॉलेज हैं। ऐसे में इसे फंड की ज्यादा जरूरत है। पीयू में 75 विभाग हैं और रिजनल सेंटर भी हैं। ऐसे में यूजीसी अलग से फंड की व्यवस्था करे।
कम होगा पीयू का स्टाफ
पीयू ने बताया की साल 2010 में की असेसमेंट के अनुसार पीयू में 1510 शिक्षक और 3011 गैर शिक्षक स्वीकृत थे। साल 2014 में इंटरनल असेस्मेंट के बाद तय किया गया कि 1378 शिक्षक और 2609 गैर शिक्षक कर्मियों के पद ही स्वीकृत रखे जाएं। अगले पांच वर्षों में 474 गैर शिक्षक कर्मी सेवानिवृत्त हो जाएंगे और 545 अस्थायी कर्मियों की अगले तीन वर्षों में छंटनी की जाएगी। इस तरह से गैर शिक्षक कर्मियों की संख्या अगले पांच वर्षों में संतुलित हो जाएगी। पीयू यूजीसी के अनुसार कर्मियों की संख्या कम करने की दिशा में काम कर रहा है, लेकिन यह तत्काल नहीं किया जा सकता।