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मोदी को शिकायत महंगी पड़ी, पीयू प्रोफेसर की री-इम्पलायमेंट रद्द
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 19 Mar 2016 09:25 AM IST
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पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़
- फोटो : फाइल फोटो
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पंजाब यूनिवर्सिटी(पीयू) में फंड के मिसयूज की प्रधानमंत्री मोदी से शिकायत करना एक री-इंप्लायड प्रोफेसर को भारी पड़ गया। पीयू प्रशासन ने बिना अनुमति प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखने वाले प्रोफेसर की समय से पहले ही री-इम्पलाइमेंट रद्द कर दी है। उधर, इस मामले में प्रोफेसर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गए।
कोर्ट ने सोमवार तक पीयू को जवाब देने को कहा है। जानकारी अनुसार पीयू के इवनिंग विभाग के पूर्व चेयरपर्सन और अंग्रेजी के प्रोफेसर वीके चोपड़ा 60 साल की उम्र पूरी कर री-इंप्लायमेंट पर चल रहे थे।
18 मार्च को प्रो.चोपड़ा के तीन साल पूरे होने थे। लेकिन पीयू प्रशासन ने बिना कोई वाजिब कारण बताए चोपड़ा की री-इंप्लायमेंट 16 मार्च को ही रद्द कर दी। चोपड़ा के अनुसार री-इंप्लायमेंट रद्द करने का प्रशासन ठोस कारण नहीं बता रहा।
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फंड के मिसयूज की शिकायत पड़ी महंगी
प्रो.चोपड़ा ने आरोप लगाया कि उन्होंने नवंबर में पीयू प्रशासन द्वारा की गई खरीद में हेराफेरी की लिखित शिकायत और मामले में जांच की मांग की थी। लेकिन कई महीने तक मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई।
प्रो.चोपड़ा ने मामले की जांच के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी को सीधे चिट्ठी लिख डाली। इस मामले में पीएमओ ने पीयू से जवाब तलब कर लिया। इसके बाद पीयू ने मेरी री- इंप्लायमेंट रद्द कर दी। गौरतलब है कि पीयू सीनेट द्वारा कुछ महीने पहले ही किसी भी प्रोफेसर या कर्मचारी द्वारा सीधे पीएमओ या चांसलर को शिकायत नहीं भेजने संबंधी प्रस्ताव पारित किया है।
पहली बार किसी प्रोफेसर की री-इम्पलाइमेंट बीच में र्दद
पीयू में सभी प्रोफेसर की रिटायरमेंट आयु 60 साल है। लेकिन 1986 से पीयू सभी प्रोफेसर को पांच साल की री-इम्पलाइमेंट देता है। सभी प्रोफेसर को हर साल एक दिन के ब्रेक के बाद निर्धारित सैलरी पर रख लिया जाता है। पीयू के इतिहास में पहली बार प्रो.चोपड़ा को पांच साल की री-इम्पलाइमेंट पूरी होने से पहले ही जबरन घर बैठाने का फैसला लिया गया है। प्रो.चोपड़ा को 2013 में रिटायरमेंट के बाद री-इम्पलाइमेंट दी गई थी।
मेरी री-इम्पलाइमेंट रोकना पीयू प्रशासन की धक्केशाही है। री-इम्पलाइमेंट कैंसिल करने का कोई भी कारण नहीं बताया गया है। पीयू में हो रही अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाने के कारण यह किया गया है। मामला अब पंजाब एंड हरियाणा होईकोर्ट में पहुंच चुका है।
- प्रो.वीके चोपड़ा, ईवनिंग डिपार्टमेंट डिपार्टमेंट
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कोर्ट ने सोमवार तक पीयू को जवाब देने को कहा है। जानकारी अनुसार पीयू के इवनिंग विभाग के पूर्व चेयरपर्सन और अंग्रेजी के प्रोफेसर वीके चोपड़ा 60 साल की उम्र पूरी कर री-इंप्लायमेंट पर चल रहे थे।
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18 मार्च को प्रो.चोपड़ा के तीन साल पूरे होने थे। लेकिन पीयू प्रशासन ने बिना कोई वाजिब कारण बताए चोपड़ा की री-इंप्लायमेंट 16 मार्च को ही रद्द कर दी। चोपड़ा के अनुसार री-इंप्लायमेंट रद्द करने का प्रशासन ठोस कारण नहीं बता रहा।
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फंड के मिसयूज की शिकायत पड़ी महंगी
प्रो.चोपड़ा ने आरोप लगाया कि उन्होंने नवंबर में पीयू प्रशासन द्वारा की गई खरीद में हेराफेरी की लिखित शिकायत और मामले में जांच की मांग की थी। लेकिन कई महीने तक मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई।
प्रो.चोपड़ा ने मामले की जांच के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी को सीधे चिट्ठी लिख डाली। इस मामले में पीएमओ ने पीयू से जवाब तलब कर लिया। इसके बाद पीयू ने मेरी री- इंप्लायमेंट रद्द कर दी। गौरतलब है कि पीयू सीनेट द्वारा कुछ महीने पहले ही किसी भी प्रोफेसर या कर्मचारी द्वारा सीधे पीएमओ या चांसलर को शिकायत नहीं भेजने संबंधी प्रस्ताव पारित किया है।
पहली बार किसी प्रोफेसर की री-इम्पलाइमेंट बीच में र्दद
पीयू में सभी प्रोफेसर की रिटायरमेंट आयु 60 साल है। लेकिन 1986 से पीयू सभी प्रोफेसर को पांच साल की री-इम्पलाइमेंट देता है। सभी प्रोफेसर को हर साल एक दिन के ब्रेक के बाद निर्धारित सैलरी पर रख लिया जाता है। पीयू के इतिहास में पहली बार प्रो.चोपड़ा को पांच साल की री-इम्पलाइमेंट पूरी होने से पहले ही जबरन घर बैठाने का फैसला लिया गया है। प्रो.चोपड़ा को 2013 में रिटायरमेंट के बाद री-इम्पलाइमेंट दी गई थी।
मेरी री-इम्पलाइमेंट रोकना पीयू प्रशासन की धक्केशाही है। री-इम्पलाइमेंट कैंसिल करने का कोई भी कारण नहीं बताया गया है। पीयू में हो रही अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाने के कारण यह किया गया है। मामला अब पंजाब एंड हरियाणा होईकोर्ट में पहुंच चुका है।
- प्रो.वीके चोपड़ा, ईवनिंग डिपार्टमेंट डिपार्टमेंट