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सराहनीय पहलः 10 हजार एलुमनी सुधारेंगे पंजाब यूनिवर्सिटी का परसेप्शन, कुछ ऐसे होगा काम
Fri, 01 Nov 2019 01:47 PM IST
खुशबू गोयल
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 01 Nov 2019 01:47 PM IST
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पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़
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10 हजार एलुमनी पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ का परसेप्शन सुधारेंगे। पीयू प्रशासन ने खाका तैयार करके सभी विभागों को जिम्मा भी दे दिया है। वह साल में एक बार एलुमिनी मीट आयोजित कर इसका संदेश राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय जगत में देंगे। यह प्रक्रिया नवंबर माह से ही शुरू होने जा रही है।
अटल रैंकिंग को छोड़ दें तो निरफ, क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग, टाइम्स रैंकिंग आदि में पीयू की रैंकिंग में अपेक्षाकृत सुधार नहीं हो रहा है। लगातार अंक कम हो रहे हैं। सबसे कम अंक परसेप्शन व स्टूडेंट फैकल्टी रेसो में मिले हैं। रैंकिंग के दौरान तमाम लोगों से पूछा गया। साथ ही गूगल के जरिये सर्वे किया गया तो पीयू की छवि उभरकर सामने नहीं आई जबकि निजी विश्वविद्यालयों की छवि काफी अच्छी मिली। सरकारी विश्वविद्यालयों का परसेप्शन ठीक न मिलने के कारण उसका हल यूजीसी ने निकालना शुरू किया।
रैंकिंग के आंकड़ों को देखते हुए यूजीसी ने कहा है कि परसेप्शन पुराने विद्यार्थियों की मदद से हर विश्वविद्यालय ठीक कर सकते हैं। वह देश दुनिया में जॉब कर रहे हैं। वह पीयू का प्रचार प्रसार आसानी से करेंगे। उनका अपने संस्थान से लगाव भी होगा। उसी को ध्यान में रखते हुए पीयू ने एलुमिनी का डाटा एकत्रित करने का निर्णय लिया और कार्य शुरू कर दिया। कई विभाग तो एलुमिनी मीट करते हैं, पुराने विद्यार्थियों से फीडबैक फार्म नहीं भरवाया जाता है, लेकिन अब यह भरवाया जाएगा।
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इन विभागों के विद्यार्थियों का देश-विदेश में डंका
पीयू के यूबीएस, यूआईपीएस, होटल मैनेजमेंट, फिजिक्स, रसायन विज्ञान विभाग, डेंटल कॉलेज, यूआईएलएस, एंथ्रोपोलॉजी आदि विभागों के पुराने विद्यार्थी देश-दुनिया में नाम कमा रहे हैं। विदेशी रैंकिंग के लिए विदेशों में काम कर रहे पीयू के यह पुराने विद्यार्थी इसके लिए बेहतर कार्य कर पाएंगे। मैनेजमेंट से जुड़े इंस्टीट्यूट के विद्यार्थी भी अच्छे पदों पर कार्य कर रहे हैं। उनकी भी पीयू मदद लेगा।
जनवरी तक पीयू का यह मिशन पूरी तरह धरातल पर होगा। माना जा रहा है कि आगामी वर्ष में जारी होने वाली रैंकिंग में सुधार दिखेगा। इसके लिए हर विभाग अपने-अपने पुराने विद्यार्थियों का डाटा खंगाल रहे हैं। आज तक जिन विभागों ने एलुमिनी मीट नहीं की है उन्हें भी यह करनी होगी।
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अटल रैंकिंग को छोड़ दें तो निरफ, क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग, टाइम्स रैंकिंग आदि में पीयू की रैंकिंग में अपेक्षाकृत सुधार नहीं हो रहा है। लगातार अंक कम हो रहे हैं। सबसे कम अंक परसेप्शन व स्टूडेंट फैकल्टी रेसो में मिले हैं। रैंकिंग के दौरान तमाम लोगों से पूछा गया। साथ ही गूगल के जरिये सर्वे किया गया तो पीयू की छवि उभरकर सामने नहीं आई जबकि निजी विश्वविद्यालयों की छवि काफी अच्छी मिली। सरकारी विश्वविद्यालयों का परसेप्शन ठीक न मिलने के कारण उसका हल यूजीसी ने निकालना शुरू किया।
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रैंकिंग के आंकड़ों को देखते हुए यूजीसी ने कहा है कि परसेप्शन पुराने विद्यार्थियों की मदद से हर विश्वविद्यालय ठीक कर सकते हैं। वह देश दुनिया में जॉब कर रहे हैं। वह पीयू का प्रचार प्रसार आसानी से करेंगे। उनका अपने संस्थान से लगाव भी होगा। उसी को ध्यान में रखते हुए पीयू ने एलुमिनी का डाटा एकत्रित करने का निर्णय लिया और कार्य शुरू कर दिया। कई विभाग तो एलुमिनी मीट करते हैं, पुराने विद्यार्थियों से फीडबैक फार्म नहीं भरवाया जाता है, लेकिन अब यह भरवाया जाएगा।
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इन विभागों के विद्यार्थियों का देश-विदेश में डंका
पीयू के यूबीएस, यूआईपीएस, होटल मैनेजमेंट, फिजिक्स, रसायन विज्ञान विभाग, डेंटल कॉलेज, यूआईएलएस, एंथ्रोपोलॉजी आदि विभागों के पुराने विद्यार्थी देश-दुनिया में नाम कमा रहे हैं। विदेशी रैंकिंग के लिए विदेशों में काम कर रहे पीयू के यह पुराने विद्यार्थी इसके लिए बेहतर कार्य कर पाएंगे। मैनेजमेंट से जुड़े इंस्टीट्यूट के विद्यार्थी भी अच्छे पदों पर कार्य कर रहे हैं। उनकी भी पीयू मदद लेगा।
जनवरी तक पीयू का यह मिशन पूरी तरह धरातल पर होगा। माना जा रहा है कि आगामी वर्ष में जारी होने वाली रैंकिंग में सुधार दिखेगा। इसके लिए हर विभाग अपने-अपने पुराने विद्यार्थियों का डाटा खंगाल रहे हैं। आज तक जिन विभागों ने एलुमिनी मीट नहीं की है उन्हें भी यह करनी होगी।