पंजाब में खुले स्कूल, तापमान जांच और हाथ सैनिटाइज करने के बाद मिली स्कूल में एंट्री
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पंजाब में सरकार के आदेश के बाद गुरुवार से राज्य में कक्षा पांचवीं से बारहवीं के छात्रों के लिए स्कूल फिर से खुल गए हैं। लुधियाना के एक स्कूल के शिक्षक ने बताया कि सभी कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन किया जाएगा। हम अपने बच्चों को स्कूल भेजने से पहले माता-पिता से सहमति पत्र लेंगे। अमृतसर में श्री राम आश्रम पब्लिक स्कूल में प्रवेश द्वार पर छात्रों को तापमान जांचा गया और हाथ सैनिटाइज करवाए गए।
फिरोजपुर : पहले दिन 50 फीसदी बच्चे पहुंचे स्कूल
पांचवीं से 12वीं तक के स्कूल खुलने के बाद पहले दिन सरकारी स्कूलों में 50 फीसदी विद्यार्थी पहुंचे। सामाजिक दूरी का ध्यान रखते हुए एक बेंच पर दो बच्चों को बैठाया गया। गांव गट्टी राजोके स्थित सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल डॉ. सतिंदर सिंह ने बताया कि बच्चों के बैठने के लिए खास प्रबंध किया है। पहले दिन सभी बच्चे मास्क पहनकर आए थे। स्कूल के प्रवेश गेट पर सैनिटाइजर रखा गया है, ताकि बच्चे हाथ सैनिटाइज कर कक्षाओं में बैठे। उधर, पटियाला में उचित शारीरिक दूरी व कोरोना के बचाव के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए बच्चों को कक्षाओं में बैठाया गया।
कासा ने स्कूल खोलने के फैसले का किया स्वागत
पांचवीं से 12वीं तक के स्कूलों के खुलने का सीबीएसई एफिलिएटेड स्कूल एसोसिएशन (दोआबा रीजन) ने स्वागत किया। कासा के अध्यक्ष अनिल चोपड़ा ने कहा कि सभी सदस्यों की सहमति से स्कूलों को 15 जनवरी 2021 से खोला जा रहा है। छात्रों को अभिभावकों की मंजूरी के बाद ही स्कूलों में आने दिया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग तथा सरकारी निर्देशों के अनुसार ही छात्रों के बैठने का प्रबंध किया जाएगा।
Punjab: Schools reopen for students of classes V to XII from today; visuals from Shri Ram Ashram Public School in Amritsar.
— ANI (@ANI) January 7, 2021
Students are undergoing temperature check & hand-sanitization at the entrance gate of the school. pic.twitter.com/X2tTTEXILS
लुधियाना : 'सरकार फैसले को दोबारा से रिव्यू करे, फिर फैसला ले'
लुधियाना में पहले दिन खुले स्कूलों में कम रौनक देखने को मिली। गुरुवार को केवल सरकारी स्कूल ही खुले, प्राइवेट स्कूलों बंद रहे। सरकार के इस फैसले से कुछ परिजन खुश तो कुछ नाराज दिखे। उनका कहना है कि सरकार अपने फैसले को एक बार फिर से रिव्यू करे और दोबारा से फैसला ले। वह बच्चों की सेहत से किसी तरह का कोई खिलवाड़ न करे।
बच्चे सामाजिक दूरी का पालन नहीं कर पाएंगे। प्राइवेट स्कूलों की बात करें तो वहां सामान्य दिनों की तरह नौवीं से बारहवीं तक की कक्षाएं ही लगी। इन स्कूलों में पांचवीं से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को नहीं बुलाया गया।
अमृतसर में सीबीएसई और आईसीएसई से मान्यता प्राप्त स्कूल रहे बंद
अमृतसर में पहले दिन विद्यार्थियों की संख्या नाममात्र रही। महज 40 प्रतिशत विद्यार्थी ही स्कूल पहुंचे। थर्मल स्क्रीनिंग के बाद विद्यार्थियों को कक्षा में बैठाया गया। हालांकि सीबीएसई तथा आईसीएसई से मान्यता प्राप्त स्कूल बंद रहे। संभावना है कि एक-दो दिन बाद इन स्कूलों को भी खोल दिया जाएगा।
आठवीं कक्षा की छात्रा अनुज व रोशनी ने बताया कि उन्हें बहुत खुशी हो रही है कि स्कूलों को दोबारा से खोल दिया गया। अब दोबारा से वे अपने दोस्तों से मिल सकेंगे। सरकारी स्कूल सहंसरा की सातवीं की छात्रा जश्नप्रीत ने बताया कि स्कूल खुलने के बाद अध्यापकों के सानिध्य में वह पढ़ाई अच्छे से कर पाएगी।
माल रोड सरकारी कन्या सीसे स्कूल की प्रिंसिपल मंदीप कौर ने बताया कि विद्यार्थियों की संख्या स्कूल में बढ़ गयी है। कोविड-19 से निपटने के लिए पर्याप्त प्रबंध किए गए हैं। डीईओ सेकेंडरी सतिंदरबीर सिंह ने दावा किया कि 60 प्रतिशत से अधिक बच्चे सरकारी स्कूलों में पहुंचे हैं। कोविड-19 के नियमों का ध्यान रखने के लिए स्कूल प्रबंधकों से कहा गया है।
प्रभाकर सीसे स्कूल के प्रिंसिपल राजेश प्रभाकर ने कहा कि सरकार के फैसले स्कूल प्रबंधकों को रास नहीं आ रहे हैं। सरकार को ठोस फैसला लेना चाहिए। स्कूलों को पूरी तरह से बंद कर दे या फिर अनिवार्य रूप से क्लास लगाने के लिए निर्देश दे। आधे बच्चे ऑनलाइन और आधे बच्चे क्लास में कैसे शिक्षा हासिल कर पाएंगे। कोविड-19 से निपटने के लिए स्कूल प्रबंधक सक्षम है। सरकार के फैसलों से अनुशासनहीनता पैदा हो रही है।