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पंजाबः पनबस की हड़ताल, 1500 बसों के चक्के जाम, यात्री परेशान, अभी नहीं मिलेगी राहत

Wed, 03 Jul 2019 12:40 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लुधियाना(पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लुधियाना(पंजाब) Published by: खुशबू गोयल Updated Wed, 03 Jul 2019 12:40 AM IST
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punjab roadways, punbus workers three days strike
पंजाब रोडवेज का चक्का जाम - फोटो : फाइल फोटो

पनबस की ठेका वर्कर यूनियन ने अपनी मांगों के समर्थन में मंगलवार को बसों का चक्का जाम कर दिया। यूनियन ने यह हड़ताल 4 जुलाई तक जारी रखने का एलान किया है। इस बीच, मंगलवार को पंजाब की ट्रांसपोर्ट मंत्री रजिया सुलताना ने हड़ताली कर्मचारियों को बातचीत का न्योता दिया है। 

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हरियाणा भवन में उत्तरी राज्यों के ट्रांसपोर्ट मंत्रियों और प्रशासनिक सचिवों की बैठक के बाद रजिया सुलताना ने हड़ताल के मुद्दे पर कहा कि जिन कर्मचारियों ने हड़ताल की है, उनका शिष्टमंडल 10 दिन पहले उनसे मिला था और उन्होंने अपनी मांगों की जानकारी भी थी। तब इन कर्मचारियों की ओर से यह भी कहा गया कि वह अपनी मांगों के बारे में विस्तार से चर्चा के लिए मंत्री से दोबारा मिलेंगे। 
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दोबारा बातचीत का समय एक जुलाई सोमवार शाम 6 बजे तय हुआ था लेकिन कर्मचारी मंत्री से मिलने नहीं पहुंचे। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों की मुख्य मांगों में, कांट्रैक्ट पर काम कर रहे कर्मचरियों को रेगुलर करना, गलती होने पर ब्लैक लिस्ट किए जाने पर रोक और वेतन बढ़ाने की मांग थी। 

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हड़ताल - फोटो : अमर उजाला

ट्रांसपोर्ट मंत्री ने कहा कि कर्मचारी नेता अगर बात करना चाहते हैं तो उनके लिए दरवाजे खुले हैं। उधर, कर्मचारी यूनियन के प्रधान रेशम सिंह गिल ने बताया कि उन्होंने 21 जून को ट्रांसपोर्ट मंत्री के साथ बैठक करके सभी मांगों की जानकारी दी थी। विभाग के अधिकारी भी लंबे समय से उन्हें बार-बार मांगें मान लिए जाने के आश्वासन देते रहे हैं लेकिन आज तक किसी मांग को माना नहीं गया है।

हड़ताल से सात जिले सबसे ज्यादा प्रभावित
मंगलवार को पनबस की हड़ताल का सबसे ज्यादा असर सात जिलों- लुधियाना, जालंधर, पटियाला, अमृतसर, बठिंडा, फिरोजपुर और मोगा में दिखाई दिया। पनबस के करीब 3000 कर्मचारी हड़ताल में शामिल हो गए हैं। हड़ताल से अंतरराज्यीय रूटों के साथ-साथ राज्य के भीतर बस सेवा बुरी तरह प्रभावित हुई है। 

हड़ताली कर्मचारियों ने विभिन्न शहरों और कस्बों में रोडवेज की बसों को चलने नहीं दिया। हड़ताल कर रहे कर्मचारियों की यूनियन के नेताओं का कहना है कि कैप्टन सरकार वादों से मुकर रही है। राज्य के 18 रोडवेज डिपो में इस हड़ताल से मंगलवार को वित्तीय नुकसान भी उठाना पड़ा।

ये हैं कर्मचारियों की मांगें
कर्मचारी यूनियन के प्रधान रेशम सिंह गिल ने बतया कि वे लंबे समय से सरकार के सामने अपनी मांगें रखते आ रहे हैं लेकिन उन्हें कोरे आश्वासन ही मिलते रहे हैं।

उन्होंने बताया कि उनकी मुख्य मांगों में- कच्चे कर्मचारियों को पक्का करना, कर्जमुक्त पनबस को पूरे स्टाफ के साथ रोडवेड के अधीन लाना, वेतन वृद्धि, ठेका सिस्टम खत्म करके कर्मचारियों को ड्यूटी पर बहाल करना। उन्होंने आरोप लगाया कि कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने की मांग को छोड़कर बाकी सभी मांगों के बारे में ट्रांसपोर्ट विभाग टालमटोल कर रहा है।

पंजाब रोडवेज की बसों का प्रदेश भर में भले ही तीन दिनों तक चक्का जाम रहेगा लेकिन रोडवेज मुलाजिमों की यह हड़ताल पटियाला में बेअसर रही। दरअसल पटियाला समेत आसपास के कस्बों में पेप्सू रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (पीआरटीसी) की बसों की ही सरदारी है। इस कारण सवारियों को बसें मिलने में किसी तरह की कोई परेशानी पेश नहीं आई। 

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