पंजाब की सियासत पर डेरे हावी, जानिए कितनी रखते हैं ताकत
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पंजाब की सियासत पर धार्मिक डेरों का प्रभाव बहुत है। लगातार बढ़ती डेरों के समर्थकों की तादाद एक बड़े वोट बैंक में तबदील हो गई है। डेरे सूबे की कई सीटों पर जीत-हार तय करने की ताकत रखते हैं।
समाजशास्त्रियों के अनुसार पंजाब में सामाजिक व आर्थिक स्तर पर भेदभाव और डेरों में जाति, धर्म का बंधन न होने के कारण भी लोग डेरों की तरफ आकर्षित हुए। बड़ी संख्या में लोगों ने डेरों से जुड़ने के बाद नशा छोड़ा।
डेरों ने समाजसेवी कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई। पंजाब मे छोटे-बड़े मिलाकर करीब नौ हजार डेरे हैं। इनमें तीन सौ ऐसे हैं, जिनका अच्छा खासा प्रभाव है। कुछ डेरों के समर्थकों की संख्या लाखों में है, कई डेरों का विस्तार तो विदेशों तक है।
विवादों से रहा नाता
सच्चा सौदा के प्रमुख संत गुरमीत राम रहीम द्वारा श्री गुरु गोबिंद सिंह जी की वेशभूषा में अपने समर्थकों को जामे-इंसां पिलाने के बाद काफी विवाद हुआ था। संत प्यारा सिंह भनियारा वाले को धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। डेरा सचखंड, बल्लां के प्रमुख संत निरंजन दास पर विएना में हमला हुआ, जिसमें उनके सहयोगी संत रामानंद दास की मौत हो गई।
ये हैं प्रमुख डेरे
डेरा सच्चा सौदा
सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों की तादाद करीब चार करोड़ मानी जाती है, जो पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश व दिल्ली में हैं। पंजाब की सियासत के गढ़ मालवा की 35 सीटों पर डेरे का काफी प्रभाव है।
कहा जाता है कि 2007 में डेरे ने कांग्रेस को समर्थन किया, जिसके बूते पार्टी ने मालवा में शानदार जीत दर्ज की। कांग्रेस नेता हरमिंदर जस्सी संत गुरमीत राम रहीम के समधी हैं।
कहा जाता है कि 2009 लोकसभा चुनाव में शिअद ने बठिंडा सीट पर हरसिमरत कौर बादल को जिताने के लिए डेरे का समर्थन हासिल कर लिया था।
राधास्वामी डेरा
ब्यास स्थित राधास्वामी डेरे का दोआबा और माझा क्षेत्रों में मजबूत आधार है। पंजाब ही नहीं, कई राज्यों से लेकर विदेशों तक में डेरे के समर्थक फैले हुए हैं। समर्थकों की बड़ी तादाद के बावजूद डेरा चुनावों पर हमेशा मौन रहा। कैबिनेट मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया की पत्नी डेरे के पूर्व प्रमुख चरन सिंह के परिवार से हैं। पिछले दिनों राहुल गांधी और कैप्टन अमरिंदर सिंह एक रात डेरे में रुके थे।
डेरा सचखंड
जालंधर के पास बल्लां स्थित डेरा सचखंड रविदास बिरदारी का सबसे महत्वपूर्ण स्थान है। बिरादरी के सभी फैसले यहीं से होते हैं। डेरे ने वाराणसी में गुरु रविदास के जन्म स्थान पर धार्मिक स्थल का निर्माण कराया है। कुछ माह पहले अरविंद केजरीवाल भी डेरा सचखंड पहुंचे थे।
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान
जालंधर के पास नूरमहल स्थित संस्थान का प्रभाव पंजाब ही नहीं, देश-विदेश के कई हिस्सों में है। संस्थान द्वारा कई समाजसेवी कार्य किए जाते हैं। जेलों में कैदियों के लिए भी संस्थान द्वारा प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है।
यह संस्थान और इसके प्रमुख आशुतोष महाराज हमेशा से कट्टरपंथियों के निशाने पर रहे। कांग्रेस और भाजपा नेता हमेशा से यहां हाजिरी लगाते रहे हैं। इस बार आशुतोष महाराज लंबे समय से गहन समाधि में हैं। इसे लेकर हाईकोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई अभी भी जारी है।