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सिद्धू के इस्तीफे के पीछे की कहानी: सुपर सीएम बनना चाहते थे गुरु, पांच दिन में ही निकल गई हवा

Tue, 28 Sep 2021 07:11 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी सुरिंदर पाल, जालंधर
सुरिंदर पाल, जालंधर Published by: विक्रांत चतुर्वेदी Updated Tue, 28 Sep 2021 07:11 PM IST
सार

सीएम चरणजीत सिंह चन्नी ने नवजोत सिंह सिद्धू को सुनना बंद कर दिया था और इसी बात से खफा होकर उन्होंने इस्तीफे का मन बनाया।

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punjab politics: analysis of the reasons behind Sidhu resignation
नवजोत सिंह सिद्धू

विस्तार

पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू पंजाब के सीएम चरणजीत सिंह चन्नी के ऊपर सुपर सीएम बनना चाहते थे। पहले कैप्टन को उतरवाया, फिर जाखड़ व रंधावा को रोका और चन्नी को सीएम बनवाकर उनकी कमांड अपने हाथ में रखने का सिद्धू का सपना पांच दिन में चकनाचूर हो गया। सिद्धू के कहने पर न तो पंजाब का डीजीपी बनाया और न ही विभाग बांटे गए। इस तरह गुरु के सुपर सीएम बनने के सपने की हवा निकल गई और सोमवार रात को ही सिद्धू ने इस्तीफा देने की ठान ली।

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सिद्धू पीपीसीसी प्रधान बनकर अपनी छवि नहीं बना पाए
पंजाब में सिद्धू ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को कुर्सी से हटाने के लिए अभियान छेड़ रखा था और इसमें वह सफल भी हो गए। खुद जहां पीपीसीसी प्रधान बन गए वहीं कैप्टन को कुर्सी से हटवा दिया। सिद्धू की मंशा खुद सीएम बनने की थी लेकिन उनके पक्ष में विधायक नहीं खड़े हुए क्योंकि सिद्धू पीपीसीसी प्रधान बनकर अपनी छवि नहीं बना पाए। विधायक सिद्धू को सीएम बनाने के पक्ष में भी नहीं थे।
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रंधावा काफी तीखे व तेज तर्रार नेता हैं
हाईकमान ने सुनील जाखड़ को पंजाब का सीएम बनाने की तैयारी की लेकिन सिद्धू को पता था कि जाखड़ उनके रिमोट से नहीं चलेंगे, इसलिए जाखड़ का विरोध किया। फिर बात चली सुखजिंदर सिंह रंधावा की लेकिन सिद्धू उनके नाम पर भी अड़ गए। रंधावा काफी तीखे व तेज तर्रार नेता हैं, सिद्दू ने उनका डटकर विरोध किया। आखिरकार, हाईकमान ने चरणजीत सिंह चन्नी के नाम पर मोहर लगा दी। पहले दो दिन गुरु ने चन्नी को अपने तौर तरीके से चलाने की पूरी कोशिश की, जिसमें वह काफी हद तक सफल भी हुए। चंद घंटों में अमृतसर व बटाला के इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन को हटाकर सिद्धू ने अपने चहेते को लगवा लिया, जिसका संदेश काफी नकारात्मक गया।
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इकबालप्रीत सिंह सहोता को डीजीपी बनाया गया
सिद्धू सुपर सीएम बनकर फैलने लेने के लिए मैदान में आ गए। सिद्धू ने रंधावा को गृह विभाग देने का विरोध किया। लेकिन चन्नी ने डिप्टी सीएम रंधावा को गृह विभाग देकर साबित कर दिया कि वह गुरु के भी सीएम हैं। इसके अलावा सिद्धू ने सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय को डीजीपी लगाने के लिए पूरा जोर लगाया लेकिन चन्नी ने एक नहीं सुनी और इकबालप्रीत सिंह सहोता को डीजीपी बनाया गया। सूत्रों के मुताबिक, चन्नी ने सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय को लगाने से इसलिए मना किया क्योंकि उनके डीजीपी की कुर्सी पर बैठने से पंजाब पुलिस अधिकारियों में जबरदस्त गुटबाजी शुरू हो जानी थी। जिससे पुलिस की साख को बट्टा लग सकता था। लिहाजा, इकबालप्रीत सिंह सहोता को डीजीपी बनाया गया।

गुरु की एक नहीं सुनी और राणा गुरजीत सिंह को बनाया मंत्री
सिद्धू ने परगट सिंह को निकाय विभाग देने के लिए जोर लगाया था लेकिन काफी सीनियर नेता ब्रह्म मोहिंद्रा से निकाय विभाग छीनकर परगट सिंह को देने से कैप्टन की लॉबी चन्नी को निशाने पर ले सकती थी। मंत्रियों में खटपट व खींचतान शुरू होने का खतरा था। चन्नी ने परगट सिंह को शिक्षा व खेल मंत्री बनाया, जिससे सिद्धू खफा हो गए। सिद्धू ने एक तीर से दो निशाने करने की कोशिश भी की, गृह विभाग रंधावा के स्थान पर परगट सिंह को देने की वकालत लेकिन चन्नी ने एक नहीं सुनी। कपूरथला से विधायक राणा गुरजीत सिंह को मंत्री न बनाया जाए, इसके लिए भी सिद्धू ने जोर लगाया। चन्नी ने गुरु की एक नहीं सुनी और राणा गुरजीत सिंह को मंत्री बनाया।


पार्टी के उच्च नेताओं की मानें तो सोमवार रात को जब विभागों के आवंटन पर पूरा मंथन चल रहा था तो सिद्धू की एक नहीं सुनी गई। सिद्धू ने सोमवार रात को ही फैसला कर लिया था कि वह पार्टी प्रधान से इस्तीफा देंगे।

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