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पंजाब की सियासत: अपने दिग्गजों के चुनाव रण बदलने लगी पार्टियां, नए हलकों में होगा सूरमाओं का इम्तिहान

Fri, 19 Apr 2024 12:25 PM IST
निवेदिता वर्मा सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 19 Apr 2024 12:25 PM IST
सार

लोकसभा चुनाव से पहले पंजाब में पार्टियां जहां दूसरे दलों के नेताओं को अपने खेमें में खींच रही हैं वहीं अपने दिग्गज चेहरों को उनके पुराने चुनावी क्षेत्रों से हटाकर नए हलकों से उम्मीदवार बनाया जा रहा है। 

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Punjab Political parties changed their veterans election areas in Loksabha election
दलजीत चीमा, चरणजीत चन्नी, सुखपाल खैरा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब की 13 लोकसभा सीटों पर सभी राजनीतिक पार्टियां अपनी-अपनी जीत सुनिश्चित करनी रणनीति बनाने में जुटी हैं। इस कड़ी में सियासी दलों के बीच यह चुनाव शह और मात के खेल से कम दिखाई नहीं दे रहे।

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चमकौर साहिब से विधायक बने चन्नी को जालंधर से टिकट
कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को जालंधर सीट से टिकट दिया है, जबकि वह चमकौर साहिब सीट से पार्टी के विधायक रहे हैं। 2022 में उन्होंने मालवा की दो आरक्षित सीटों से चुनाव लड़ा था, लेकिन दोनों पर हार गए थे। फिर भी उन्हें कांग्रेस ने सीएम प्रोजेक्ट किया, जिसका असर दोआबा में काफी हुआ था। 
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दोआबा दलित बहुल क्षेत्र है और करीब 45 फीसदी वोट दलितों के हैं। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने दोआबा में 23 में से 9 सीटें जीती थीं। लोकसभा चुनाव में दलित वोटों पर नजर बनाए रखते हुए पार्टी ने चन्नी को मालवा से हटाकर दोआबा में जालंधर से उम्मीदवार बना दिया है। 
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जालंधर के दलजीत चीमा गुरदासपुर से मैदान में
अकाली दल के सीनियर नेता और पूर्व मंत्री दलजीत सिंह चीमा जालंधर के रहने वाले हैं, फिर भी पार्टी ने उन्हें रोपड़ से विधानसभा चुनाव में उतारा और वह चुनाव जीतकर सूबे के शिक्षा मंत्री बने थे। इसके बाद 2017 व 2022 के चुनाव डॉ. चीमा हार गए। इस बार अकाली दल ने उन्हें रोपड़ से हटाकर गुरदासपुर लोकसभा सीट के लिए टिकट दिया है। अकाली दल और भाजपा के बीच गठबंधन के दौरान गुरदासपुर सीट भाजपा की झोली में जाती थी और इस सीट पर भाजपा की तरफ से फिल्म अभिनेता सन्नी दिओल, विनोद खन्ना सांसद रह चुके हैं। लेकिन गठबंधन टूटने के बाद अकाली
दल 1997 के बाद पहली बार गुरदासपुर चुनाव लड़ने जा रहा है। डॉ. दलजीत चीमा पार्टी का एक बड़ा चेहरा और सीनियर उपप्रधान के अलावा सुखबीर बादल का दायां हाथ रहे हैं।

आप ने भी किया प्रयोग
आम आदमी पार्टी (आप) ने प्रदेश की सभी 13 सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं, जिसके तहत पार्टी ने एक नया प्रयोग अभिनेता, गायक व फिल्म निर्माता करमजीत अनमोल को फरीदकोट से टिकट देकर गिया है। पहली बार सियासी पारी शुरू करने जा रहे करमजीत अनमोल संगरूर जिले से हैं और मुख्यमंत्री भगवंत मान व करमजीत की दोस्ती कॉलेज के दिनों से है। दोनों ने एक साथ थिएटर भी किया है। 

सीएम के हलके में कांग्रेस के फायर ब्रांड नेता
कांग्रेस ने मुख्यमंत्री मान के हलके संगरूर में नया प्रयोग किया है। भुलत्थ से विधायक सुखपाल सिंह खैरा को पार्टी ने संगरूर सीट से टिकट दिया है। खैरा ऑल इंडिया किसान सेल के प्रधान भी हैं। पार्टी के उच्च सूत्रों के मुताबिक, खैरा को संगरूर भेजने की योजना कांग्रेस के चक्रव्यूह का हिस्सा है। कांग्रेस सीएम भगवंत मान को संगरूर में घेरकर रखना चाहती है और खैरा पार्टी के आप के खिलाफ हमेशा आक्रामक रहे हैं।

इधर, भाजपा ने दिल्ली से सांसद और जालंधर के मूल निवासी हंसराज हंस को इस बार फरीदकोट की आरक्षित सीट से अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया है। इस सीट पर पिछली बार कांग्रेस के टिकट पर गायक मोहम्मद सद्दीक ने जीत हासिल की थी और भाजपा ने हंस राज हंस के तौर पर इस बार जाने-माने गायक को ही मैदान में उतारा है। आम आदमी पार्टी (आप) ने भी इस सीट पर कलाकार कर्मजीत अनमोल को टिकट दिया है। वहीं, मोहम्मद सद्दीक इस बार भी कांग्रेस से इस सीट के लिए टिकट की मांग कर रहे हैं।


इन नेताओं के बदल सकते हैं चुनाव क्षेत्र

  • अकाली दल की हरसिमरत कौर बठिंडा के बजाय इस बार खडूर साहिब से चुनाव लड़ सकती हैं।
  • विजय सांपला होशियारपुर के स्थान पर श्री आनंदपुर साहिब से टिकट की तलाश में हैं
  • जालंधर से चौधरी संतोख सिंह की पत्नी कर्मजीत कौर होशियारपुर से टिकट पाने की कोशिश कर रही हैं

बदलाव से नुकसान भी हुआ
पार्टियों द्वारा अपने दिग्गजों के चुनाव क्षेत्र बदलने का हमेशा लाभ ही हुआ हो, ऐसा नहीं है। पटियाला से विधानसभा चुनाव लड़ने वाले कैप्टन अमरिंदर सिंह ने 2014 में लोकसभा चुनाव अमृतसर से लड़ा था और यह प्रयोग काफी सफल रहा। कांग्रेस के कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस सीट से अरुण जेतली को करारी शिकस्त दी थी। इसी तरह वर्तमान केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी को भाजपा ने 2019 में दिल्ली से अमृतसर में चुनाव लड़ने के लिए भेजा था,जहां वह कांग्रेस के गुरजीत औजला से हार गए थे। हालांकि पुरी उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य हैं और केंद्र सरकार में उन्हें हार के बावजूद मंत्री बनाया है।

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