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हाईकोर्ट के आदेशों को दरकिनार कर रही पुलिस, एफआईआर में लिखी जा रही है अपराधी की जाति

Mon, 03 Jun 2019 10:41 AM IST
खुशबू गोयल रोहित शर्मा, अमर उजाला, मोगा(पंजाब)
रोहित शर्मा, अमर उजाला, मोगा(पंजाब) Published by: खुशबू गोयल Updated Mon, 03 Jun 2019 10:41 AM IST
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Punjab Police Mentioning Accused Caste and Religion in FIR, Punjab Haryana High Court
सांकेतिक तस्वीर
पुलिस विभाग द्वारा हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी किए जाने का मामला सामने आया है। दरअसल, रोक के बावजूद एफआईआर में अपराधी की जाति लिख रहे हैं।
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पंजाब के मोगा जिले में ऐसा वाकया देखने को मिला। पिछले साल जून में हाईकोर्ट ने हिमाचल की तर्ज पर पंजाब और हरियाणा पुलिस को आदेश जारी किए थे कि राज्य में दर्ज होने वाली एफआईआर में अपराधी के धर्म या जाति का जिक्र नहीं किया जाएगा।

हाईकोर्ट ने इस संबंध में दोनों राज्यों की पुलिस से हलफनामा भी लिया था, लेकिन हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद मोगा पुलिस एफआईआर में अपराधी समेत शिकायतकर्ता की जाति भी दर्ज कर रही है। पड़ताल की गई तो पता चला कि हाईकोर्ट के इन आदेशों और मोगा पुलिस की इस कारगुजारी से एसएसपी अमरजीत सिंह बाजवा अनजान हैं।
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अपराधी की कोई जाति व धर्म नहीं होता

पुलिस सूत्रों के अनुसार, पहले पंजाब पुलिस रूल्स 1934 के तहत पुलिस एफआईआर में अपराधी की जाति व धर्म का जिक्र किया करती थी। एफआईआर में अपराधी की जाति दर्ज करने का मुख्य कारण यह था कि एक गांव या फिर शहर तथा किसी क्षेत्र में एक नाम के कई लोग रहते है।

इसलिए जब किसी व्यक्ति के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज होती थी तो अपराधी के धर्म से पुलिस उसकी पहचान कर लिया करती थी, लेकिन वर्तमान में यह प्रासंगिक नहीं है। हालांकि हाईकोर्ट के आदेश से पहले सरकार ने कोर्ट को बताया था कि नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो सभी राज्यों से एफआईआर में दर्ज जाति व धर्म की जानकारी मांगता है।

हाईकोर्ट ने वरिष्ठ वकील एचसी अरोड़ा की याचिका पर फैसला दिया था कि अपराध या फिर अपराधी की कोई जाति व धर्म नहीं होता।

दो बार आ चुका है फैसला

चंडीगढ़ के वरिष्ठ वकील एचसी अरोड़ा ने बताया कि उनके द्वारा हाईकोर्ट में डाली गई याचिका पर अदालत जाति और धर्म पर दो बार अलग अलग फैसला सुना चुकी है, जिसके तहत एफआईआर से जाति का कॉलम हटाया जाए। अरोड़ा ने कहा था कि आज के परिप्रेक्ष्य में कई दशक पहले बनाए गए इन नियमों में कई खामियां हैं, क्योंकि अब पहचान के लिए हर व्यक्ति का आधार नंबर उपलब्ध है। ऐसे में पुलिस की एफआईआर और दूसरे दस्तावेजों में जाति की जानकारी देना सही नहीं है।

थाना बाघापुराना की एफआईआर में लिखी जाति
थाना बाघापुराना पुलिस ने 31 मई 2019 को शिकायतकर्ता सुखमंदर सिंह वासी नत्थूवाला गर्बी के बयान पर जस्सू सिंह वासी नत्थूवाला गर्बी के खिलाफ मारपीट करने के आरोप में केस दर्ज किया था। एफआईआर में पुलिस ने पीड़ित की जाति अनुसूचित जाति और आरोपी की जाति जाट दर्ज की है।

ऐसा मामला मेरे ध्यान में नहीं है। अगर ऐसा है तो इस बारे में अभी चैक करवाएंगे।
- अमरजीत सिंह बाजवा, एसएसपी
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