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गैंगस्टर बुड्डा केसः हवाला के जरिए भेजी गई थी ड्रग मनी, पाकिस्तान कनेक्शन भी आया सामने

Sun, 16 Feb 2020 10:06 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sun, 16 Feb 2020 10:06 PM IST
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Punjab Police expose Pak links in powerful nexus of narcotics smuggling, hawala transaction
Punjab Police - फोटो : फाइल फोटो

गैंगस्टर बुड्डा केस की जांच के दौरान तीन दिन पहले गिरफ्तार किये गए जगदीप सिंह उर्फ जग्गा (बिल्ला) और गुरविंदर सिंह (पहलवान) के पाकिस्तान से संबंध सामने आए हैं। जांच के दौरान उनके बैंक खातों में पैसों के बड़े लेन-देन का खुलासा हुआ है। प्राथमिक पूछताछ में पता लगा है कि उनको हवाला के जरिये पाकिस्तान के डीलरों से ड्रग मनी प्राप्त हुई थी।

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पुलिस प्रवक्ता के अनुसार, दोनों से पाकिस्तान के सिम कार्ड बरामद किये गए हैं। दोनों गांव कोट धर्म चंद कलां पुलिस थाना झबाल, जिला तरनतारन के निवासी हैं। प्रवक्ता के अनुसार, इन अपराधियों को संगठित अपराध कंट्रोल यूनिट (ओसीसीयू) और एसएएस नगर पुलिस के साझे ऑपरेशन में गिरफ्तार किया गया था। इनके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 21 के तहत पुलिस थाना सिटी खरड़ में एफआईआर दर्ज की गई है।
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एआईजी (एसएसओसी) गुरमीत चौहान और एडीजीपी (आईएस) आरएन ढोके की निगरानी में डीएसपी बिक्रम बराड़ के नेतृत्व वाली टीम ने इस रैकेट की जांच में अब तक तकरीबन 24 बड़े अपराधियों को गिरफ्तार किया है। अब तक की जांच में यह बात सामने आई है कि दोनों आरोपी जो 2014-15 से फरार थे, को अलग-अलग तरीकों और अलग-अलग मार्गों से पाकिस्तान से भारी मात्रा में हेरोइन और जाली भारतीय करंसी प्राप्त हुई थी। डायरेक्टोरेट रिवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई), राजस्थान पुलिस और पंजाब पुलिस को पाकिस्तान से भारी मात्रा में हेरोइन लेने के मामलों में इनकी तलाश थी।

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पांच साल से तलाश रही थी पुलिस

जग्गा और पहलवान दोनों ने अपनी खुद की ढिल्लों ट्रांसपोर्ट कंपनी में ट्रांसपोर्टरों के तौर पर काम किया और पिछले 5 वर्षों के दौरान गिरफ्तारी से बचते रहे। उन्होंने कथित तौर पर ड्रग मनी के साथ अपना साम्राज्य कायम किया और फिरोजपुर के मक्खू जिले में नया मकान खरीदने के साथ-साथ नई दिल्ली से पांच नए ट्रक भी खरीदे थे। उन्होंने कोट धर्मचंद जिला तरनतारन में करीब 4 एकड़ कृषि योग्य जमीन भी खरीदी थी। दोनों के बैंक खातों में भारी लेन-देन का हुआ है। पूछताछ में पता लगा है कि इन्हें हवाला से पाकिस्तान के डीलरों से ड्रग मनी भेजी गई थी।

2008 से सीमा पार से कर रहा था हेरोइन की तस्करी
जगदीप सिंह उर्फ जग्गा 2008 से ही सरहद पार से हेरोइन की तस्करी में शामिल था और तब ही उसने पहली बार पाकिस्तानी सिम कार्डों का प्रयोग करना भी शुरू किया था। वह उसी साल गुरविंदर सिंह उर्फ पहलवान के संपर्क में आया और इसके बाद वह पाकिस्तान के अबद अली उर्फ बदी उर्फ बदली के संपर्क में आया। 

जग्गा ने पाकिस्तान के सिम कार्डों का प्रयोग करके अटारी सरहद के नजदीक गांव राजेतल और महावा ड्रेन के क्षेत्र में जैंका पहलवान और अबद अली (दोनों पाकिस्तानी) के पास से नशे की खेप प्राप्त की। वह फाजिल्का-फिरोजपुर सरहद के नजदीक बोदी लांमा (पाकिस्तान) से नशे की खेप भी खरीदता था। जग्गा 2015 में पाकिस्तान के गांव नरवाड़ निवासी मलिक के संपर्क में आया और उसके बाद से उसे पाकिस्तान से नशे की भारी खेप मिल रही थी। 

उसने पाकिस्तान से ज्यादातर नशे की खेप रावी नदी के जरिये और प्लास्टिक ट्यूब में प्राप्त की थीं। उसने नशे की ढुलाई के लिए के लिए अपने साथी महिंदर सिंह उर्फ मिंदा की आल्टो, लेंसर, स्विफ्ट, ट्रक और टाटा सूमो वाहनों का प्रयोग किया। टाटा सूमो में उसने नशे को छिपाने के लिए पिछली सीट के नीचे न दिखने वाले बक्से बनाए थे। 

एनडीपीएस के मामलों में दो बार गिरफ्तारी के बाद जग्गा ने अंतरराष्ट्रीय नंबर पर व्हाट्सएप का प्रयोग करना शुरू कर दिया था। उसे शुरू में डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस की तरफ से 13 किलो हेरोइन केस में गिरफ्तार किया गया था। इस केस में उसे 2011 में 10 साल की कैद की सजा सुनाई गई थी, लेकिन 2014 में वह पैरोल पर बाहर आ गया। 

डीआरआई ने जनवरी 2015 में 42 किलो हेरोइन केस में उसे फिर गिरफ्तार किया लेकिन अक्तूबर 2015 में तरनतारन में अदालत में पेशी के दौरान वह पुलिस हिरासत से भाग गया और तब से फरार था। संयोग से जगदीप सिंह उर्फ जग्गा के पिता गुरदेव सिंह को भी 2005 के एक ड्रग केस में 11 साल की सजा सुनाई गई थी। 2014 में वह पैरोल पर बाहर आया था और अभी तक फरार है।

जग्गा का चचेरा भाई है पहलवान
जग्गा का चचेरा भाई पहलवान 2014 से 10 किलो हेरोइन की बरामदगी के मामले में फरार था। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने अपना रूप बदला और पगड़ी बांधनी शुरू कर दी थी।

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